Pawan Jury BhilwaraRj

FDI की सुनामी ले डूबी मोदी लहर को ।
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सरकार बनने के सिर्फ चार महीने बाद हुए उपचुनावों में मोदी लहर का मुलम्मा उतरता नज़र आ रहा है । नमो को नतीजे आने से पहले भनक भी नही लगी कि पेड मिडिया में धुँआधार प्रचार के बावजूद जमीन दरकने लगी थी ।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के चुनावों की जीत का श्रेय भी नरेन्द्र मोदी को देने वाले उनके भक्त उपचुनावों में हुयी हार से नमो को उसी तरह बचा रहे है, जिस तरह गांधी परिवार के भक्त सोनिया-राहुल और प्रियंका को बचाते रहे है । जबकि नरेन्द्र मोदी और उनके डिप्टी शाह ने नतीजो पर चुप्पी साध रखी है ।
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120 दिन के शासन काल में कुछ फैसले जिनका असर इस हार पर रहा :
1. नमो ने चुनाव विकास के मुद्दे पर भले ही लड़ा हो, लेकिन जो भारी वोट उन्हें आम चुनावों में मिला, उसका मुख्य कारण हिंदुत्व का अंडर करंट था । मंदिर, गाय, समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधने से समर्पित हिन्दू वादी कार्यकर्ताओं में भरोसा टूटा , मंदिरों के सोने की लूट ने बची खुची कसर पूरी कर दी ।
2. आम चुनाव के दौरान पेड मिडिया ने नमो के दर्ज़न भर इंटरव्यू का प्रसारण 24×7 किया था, जिस से सस्पेंडेड वोटर ने भावनात्मक लहर पर सवार होकर मतदान किया । चूंकि लहर कोई भी हो क्षणिक ही होती है, इसलिए ये मतदाता वर्ग फिर से उदासीन हो चुका था ।
3. नमो ने राष्ट्रवादी निति की जगह FDI जनित विकास की राह पकड़ी, इस से स्वदेशी को समर्पित कार्यकर्ताओं का नमो से मोह भंग हुआ, जबकि ग्रामीण और कृषक वर्ग अपने आप को बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी आदि के बेहिसाब प्रचार से खुद को अलग थलग समझने लगा ।
4. वरिष्ठ नेताओं को डाक में बिठाने, अन्य नेताओं के पर कतरने और पार्टी को हाई जेक करने से पार्टी के अन्दर मौन असंतोष पनपा और जनता में अक्खड़ मिजाज़ नेता की छवी बनी ।
5. सी- सेट पर सरकार ने ढुलमुल रवैया अपनाया ।
6. UP में मायावती ने उम्मीदवार न उतार कर और मुलायम ने आजम खान को पिंजड़े में डाल कर बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाया ।
7. RSS, SJM और BST के सत्ता में आते ही सुर बदलने को इन संघठनो के कार्यकर्ता पचा नहीं पाए ।
8. कोंग्रेस और अन्य पार्टी के नेताओं ने अंट शंट बकने और विवादित बयान देने से परहेज बरता ।
9. चूंकि उपचुनाव नेतृत्व परिवर्तन के लिए निर्णायक नही होते, इसलिए मतदाता उदासीन रवैया अपना लेते है ।
10. कार्यकर्ताओं के एक वर्ग विशेष को नमो से कुछ हिला देने वाले चमत्कार की उम्मीद थी, उनके हौसले टूट गए ।
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बावजूद इसके नमो की FDI निति जारी है, चीन की सेना ने भारतीय सीमा में घुसपेठ कर के निर्माणधीन केनाल का कार्य रोक दिया है, उसी समय नमो चीनी पीएम ज़िनफिंग के साथ अहमदाबाद में नदी किनारे चहल कदमी कर रहे है ।
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बदतर स्थिति यह है कि पेड मिडिया यह भ्रम फैला रहा है कि बीजेपी की हार इसलिए हुयी, क्योंकि नमो ने विकास को किनारे कर के योगी आदित्यनाथ के सहारे हिंदुत्व के मुद्दे पर वोट मांगे । जबकि सच्चाई इसके उलट है । योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद आदि पर बवाल सिर्फ UP में ही मचाया था, जबकि बीजेपी को सभी राज्यों में मुहं की खानी पड़ी । यहाँ तक की गुजरात में भी । स्पष्ट है कि ये जनादेश नमो के 120 दिन के कार्यकाल के आधार पर ही आया है । पेड मिडिया यह भ्रम फैला कर FDI की निति को जारी रखना चाहता है, जबकि अवाम ने FDI को सिरे से खारिज कर दिया है ।
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कोंग्रेस और अन्य पार्टियाँ इसमें अपनी जीत देख रही है, लेकिन जनता 120 दिन पहले ही उनके कुशासन को खारिज कर चुकी है, और अब नमो से भी उम्मीदे टूटने के कगार पर है ।
तो फिर अब किसे चुनेंगे आप ? राहुल, मुलायम या नितीश को !!
मायने यह कि सत्ता या नेता परिवर्तन से देश के हालात में सुधार की गुंजाइश नही है ।
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समाधान : कार्यकर्ताओं को यह समझना चाहिए कि नेता भक्ति और पार्टी पूजन से देश में वांछित वदलाव की उम्मीद करना बेमानी है, अत: कार्यकर्ताओं को राष्ट्र हित के कानूनों का प्रचार नागरिको में करना चाहिए, ताकि जन दबाव द्वारा जन हित के क़ानून पास करवाए जा सके ।

प्रजा अधीन राजा @ pk