Pawan Jury BhilwaraRj
1. शिन्जो आबे ने नमो से शंका व्यक्त की थी, कि यदि आपके पास पर्याप्त सोना नहीं है, तो तमाम तामझाम के बावजूद जापान यात्रा असफल रहेगी ।
2. आरक्षण पर RSS का R टर्न
3. दलितों की सहमती से आरक्षण का समाधान ।
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भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार 315 बिलियन डॉलर है, जबकि क़र्ज़ 440 बिलियन डॉलर ।
ऐसे में जबकि हमें विदेशी कंपनियों को पूँजीगत लाभ और कमाए जा रहे मुनाफे का अतिरिक्त भुगतान डॉलर में करना है, बहुराष्ट्रीय कंपनीयां भारत में सुरक्षित निवेश करने में ही रुचि दिखा रही है ।
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अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए MNCs ने भारत को अपने विदेशी मुद्रा भण्डार को बढ़ाने के लिए कहा, नतीजे के रूप में नमो ने तिरुपति मंदिर से 1.8 टन सोना लूटा । आप कह सकते है कि बुलेट ट्रेन की पटरियां उस सोने से ढ़ाली जायेगी जो सोना हिन्दू श्रद्धालुओ द्वारा तिरुपति मंदिर में कतरा कतरा दान देकर इकट्ठा किया गया था ।
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लगभग एक हज़ार वर्ष पहले गजनी इस सोने को नही लूट सका था, 400 वर्ष के शासन के दौरान ब्रिटिश भी ऐसी हिम्मत नहीं जुटा सके । UPA ने स्वर्ण भंडारों वाले मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में ले लिया था, किन्तु अंतिम सफलता गजनी के वंशजो को ही मिली ।
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ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि यह सोना SBI के पास गिरवी नही रखा गया है, बल्कि जमा किया गया है, SBI इस सोने को बेचने, गलाने और अन्य बेंको के पास गिरवी रखने के लिए स्वतंत्र है । सोने के बदले SBI ने मंदिर ट्रस्ट को गोल्डबांड दिए है । यदि भारत का व्यापर घाटा बदस्तूर जारी रहता है तो हमारा विदेशी मुद्रा संकट और भी गहराएगा और हम इस सोने से हाथ धो बैठेंगे ।
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जब RSS से इस सबंध में अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा गया तो संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि, भारत में रहने वाले सभी हिन्दू है, जबकि योगी आदित्यनाथ का जवाब था कि, जहां मुस्लिम आबादी बढ़ जाती है, वहां ज्यादा दंगे होते है, और UP चुनावों के मद्देनज़र उनके लिए लव जिहाद पर चर्चा करना ज्यादा लाभकारी है ।ऐसे में जबकि नमो चुनाव प्रचार के दौरान 'देवालय से पहले शौचालय' बनाने का बयान देकर अपना मन्तव्य पहले ही स्पष्ट कर चुके थे, तो अब इस भगवा ब्रिगेड से मंदिरों के खजाने की रक्षा की उम्मीद करना ज्यादती होगी ।
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समाधान : नागरिको से निवेदन है कि RBI गवर्नर, वित्त मंत्री तथा प्रधानमन्त्री को प्रजा अधीन करने के कानूनी ड्राफ्ट्स को गेजेट में छापने का ऑर्डर अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा भेजे, ताकि भविष्य में होने वाली सोने की लूट को रोका जा सके ।
इन कानूनों के ड्राफ्ट्स यहाँ से मुफ्त डाउनलोड करे:
rahulmehta . com/301.h.htm ( chaptar - 6,9 )
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2. आरक्षण को लेकर RSS का M टर्न :
2006 में आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व ने बयान दिया की रामविलास पासवान जैसे संपन्न दलितों को, जो कि आरक्षण का पर्याप्त लाभ ले चुके है, अपने आरक्षित हितो का त्याग कर देना चाहिए । चूंकि अब वही पासवान उनकी सरकार में मंत्री है, आरएसएस ने चुप्पी साध ली है ।
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लोकसभा चुनाव के दौरान आरक्षण विरोधी कार्यकर्ताओं ने नमो के सोशल मिडिया प्रचार में भूमिका निभायी और यह उम्मीद रखी कि चूंकि आरएसएस आरक्षण विरोधी है अत: सत्ता में आने पर नमो आरक्षण की समस्या का समाधान करेंगे । अस्तु समस्त युवा वर्ग का ध्रुवीकरण नमो को पीएम बनाने के लिए हुआ । चुनाव प्रचार के दौरान UP, बिहार में नमो के पिछड़ा होने को उछाला गया, और आरएसएस आरक्षण विरोधी हावभाव में बना रहा । अब बहुमत मिलने के साथ ही RSS फिर से आरक्षण समर्थित हो गया है, क्योंकि UP चुनाव में दलित वोट बेंक निर्णायक होता है । ( see link in comment )
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1991 के दशक में आरएसएस आरक्षण समर्थित था, राव सरकार के दौरान न्यूट्रल हो गया, वाजपेयी सरकार के दौरान समर्थन में और UPA के दौरान फिर से विरोधी हो गया । 2014 के आम चुनाव में समर्थन और विरोध की सीमा रेखा पर बना रहा, अब सरकार बनने पर फिर से आरक्षण समर्थित हो गया है ।
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अन्य राजनेतिक पार्टियों की तरह RSS भी एक लुंज पुंज, रीढ़ विहीन, मौका परस्त और टाइम वेस्टर संघठन है, जिसकी कथनी और करनी में मीलों का फासला होता है । आरएसएस समाधान के लिए कोई कानूनी ड्राफ्ट्स नही देता, बल्कि कार्यकर्ताओं को संघठन से चिपकाए रखने के लिए, सिर्फ नारे और विवादित बयान देकर भ्रम में बनाए रखता है ।
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समाधान : कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि वे आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से आरक्षण पर अपना रूख स्पष्ट करने के लिए कानूनी ड्राफ्ट देने का आग्रह करे । ऐसा कहने पर वे आपको आरएसएस छोड़ कर चले जाने के लिए कहेंगे और आपका समय नारे लगाने और ढ़ोल बजाने जैसी गतिविधियों में बर्बाद होने से बच जाएगा ।
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3. दलितों की सहमती से आरक्षण की समस्या का समाधान :
प्रजा अधीन राजा समूह 2004 से आरक्षण की समस्या के समाधान के कानूनी ड्राफ्ट का प्रचार कर रहा है, जिसके मुख्य बिंदु इस प्रकार है -
1. कोई भी दलित या पिछड़े वर्ग का सदस्य तहसीलदार के कार्यालय में जाकर 'आर्थिक विकल्प' के लिए आवेदन कर सकेगा।
1अ. उसका दलित/ पिछड़े वर्ग का दर्जा बरकरार रहेगा ।
1ब. उसे समायोजित मुद्रा-स्फीति के अनुसार 600 रू हर वर्ष मिलेगा, जब तक कि वह अपने आर्थिक विकल्प को समाप्त नही कर देता ।
1स. जब तक वह भुगतान प्राप्त करेगा, आरक्षण कोटे में आवेदन नही कर सकेगा ।
1द. इसके लिए पैसा सिर्फ जमीनों की कर वसूली से आएगा, और कहीं से नही ।
1य. जिन्होंने आर्थिक विकल्प लिया है, उनकी संख्या के आधार पर आरक्षित पदों की संख्या में कमी की जायेगी ।
उदाहरण - मानिए की भारत की 100 करोड़ की आबादी में से 14 करोड़ ST सदस्य है, अत: 1000 सीट में से 140 सीट अमुक वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी । मानिए इन 14 में से 6 करोड़ आर्थिक विकल्प चुनते है तो आरक्षण 14×6/14 = 6% कम कर दिया जाएगा । 14%-6% = 8% आरक्षण प्रभावी होगा ।
2. यदि कोई आर्थिक विकल्प धारी व्यक्ति फिर से सामाजिक विकल्प चुन लेता है, तो वह फिर से आरक्षण के लाभ का पात्र होगा। किन्तु यदि वह फिर से आर्थिक विकल्प की और लौटता है, तो उसे 6 माह बाद से 600 रू प्रति वर्ष मिलेंगे ।
3. यदि किसी व्यक्ति ने आरक्षण का लाभ लेकर सीट लिया है, तो वह आर्थिक विकल्प का पात्र नही होगा ।
4. यदि माता-पिता दोनों ने आर्थिक विकल्प लिया है, तो उनके 18 वर्ष के कम आयु के बच्चो को 300 रू प्रति वर्ष मिलेगा , जो अधिकतम दो संतानों पर लागू होगा ।
5. यदि किसी व्यक्ति ने आर्थिक विकल्प चुना है, तो वह फिर से आरक्षण का लाभ लेकर सीट ले सकता है । लेकिन वह तभी पात्र माना जाएगा जब वह आर्थिक विकल्प छोड़ देता है ।
विस्तृत ड्राफ्ट यहाँ से डाउनलोड करे -
rahulmehta . com/301. h. htm ( chapter - 8 )
प्रजा अधीन राजा @ pk