Pawan Jury BhilwaraRj
'नमो का FDI जिहाद'
सोनिया, नमो, केजरीवाल तथा इनके अंधभक्त, वह कार्य कर रहे है, जिसे 200 वर्ष पहले ईस्ट इंडिया कंपनी करने में असफल रही थी । देश डॉलर के पुनर्भरण संकट में फंसता जा रहा है, जिसका निश्चित दुष्परिणाम यह होगा कि देश के बहुमूल्य खनिज़ संसाधन और राष्ट्रीय सम्पदाएँ नीलाम होगी, स्वदेशी उद्योग बंद हो जायेंगे और धर्मांतरण में तेजी आएगी ।
लेकिन कोई भी राजनेतिक पार्टी इस बारे में नागरिको को सूचित नही कर रही है ।
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विदेशी डॉलर की आवक होने से डॉलर गिरा जिस से फौरी तौर पे पेट्रोल की कीमतों में कमी आयी, जो कि कुछ समय में फिर से पूर्व स्थिति में आ जायेगी । बस ये इतना ही है जिस से पेट्रोल सस्ता हुआ, और कुछ नही ।
अब जापान से 35 बिलियन डॉलर का निवेश लाने की बात की जा रही है । इस निवेश से लाक्षणिक तौर पे अस्थायी विकास दर बढ़ेगी और बाज़ार हिलोरे लेने लगेगा, लेकिन हमारे स्वदेशी उद्योगों को सरंक्षण देने वाले कानूनों के अभाव में निर्यात गिरेगा, और हमारी अर्थव्यवस्था फिर से औंधे मुंह गिरेगी ।
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कुछ खुशफ़हम और अपूर्ण जानकारी धारको का मानना है कि, जापान की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की धर्मांतरण में कोई रुचि नही है तथा जापानियों द्वारा मिशनरीज़ को फंडिंग नही की जायेगी । जबकि सच्चाई यह है कि जापानी कम्पनियों के निवशको और विशिष्ट वर्गो में अमेरिकन MNCs की अंदरखाने अच्छी खासी घुसपेठ है, एवं इन्ही के द्वारा इन्हें निर्देशित किया जाता है । पुष्टि के लिए जापान के पूर्व पीएम तथा वर्तमान पीएम की पत्नी के धार्मिक एवं मिशनरीज़ से गठजोड़ की जानकारी के लिए गूगल करे । ( plz also google on nanjing war )
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बजाय इसके कि हमारे देश में तकनीक पैदा करने के लिए जूरी ट्रायल और गणित विज्ञान में सात्य प्रणाली के कानूनों को गेजेट में छापा जाए, नमो धुंवाधार MNCs के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे है। इस से हमारे बचे खुचे उद्योग भी नष्ट हो जायेंगे और हम हमेशा के लिए तकनीक के लिए अन्य देशो पर निर्भर रहेंगे । जूरी सिस्टम और सात्य प्रणाली के कानूनों के अभाव का ही ये नतीजा है कि आज हम 1000 रूपये मूल्य का साधारण मोबाइल फोन भी नही बना पा रहे है, जबकि चीन का MI3 भारत में आउट ऑफ़ स्टॉक चल रहा है ।
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FDI को लेकर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का स्टेंड सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिस तरीके से बदला है, वो शोध का विषय है । हालांकि स्वदेशी जागरण मंच और चूपावादी संघठन RSS ने भी सत्ता में आते ही FDI के प्रति जो सुर बदले है वो किसी जादू से कम नही है, फिर भी बाबा रामदेव के शार्प V टर्न ने इन U और M टर्न लेने में माहिर संघठनो को भी कायल कर दिया है ।
इन्ही बाबाजी ने मई 2014 से पहले FDI को जितना अकेले ही कोसा उतना तो RSS और जागरण मंच ने भी नही कोसा था ।अब ये सभी संघठन अपना स्वदेशी का नज़ला तेल, साबुन, सर्फ़, पेप्सी, कोक आदि पर उतार रहे है और रेल, रक्षा, बीमा आदि भारी भरकम क्षेत्रो में FDI पर चुप्पी साधे बैठे है ।
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FDI के बारे में नमो द्वारा भ्रामक बयान दिए जा रहे है कि FDI के आने से तकनीक आएगी, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और विकास होगा ।
अव्वल तो यह कि FDI से प्रतिस्पर्धा ही समाप्त हो जाती है, जब किसी क्षेत्र में स्वदेशी कम्पनियां बचेगी ही नही तो तकनीक लेगा कौन ? यह अनुभव सिद्ध है कि MNCs जहां भी जाती है एकाधिकार स्थापित कर लेती है ।
क्योंकि हम स्वदेशी इकाइयों को सरंक्षण देने के क़ानून पास नही कर रहें है इसलिए FDI से विकास की जगह विनाश होगा, MNCs द्वारा कमाए गए मुनाफे का भुगतान डॉलर में करने में असफल रहेंगे और हमारी राष्ट्रीय संपत्तियां नीलाम हो जायेगी ।
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समाधान : जूरी ट्रायल और WOIC का ड्राफ्ट गेजेट में छापा जाए । इन कानूनों के ड्राफ्ट यहाँ से मुफ्त डाउनलोड करे -
rahulmehta . com / 301 . htm
सभी कार्यकर्ताओं से अपील है कि अपने क्षेत्र के सांसद को इन कानूनों के ड्राफ्ट गेजेट में छापने का ऑर्डर SMS द्वारा भेजे ।
प्रजा अधीन राजा @ pk