Pawan Jury BhilwaraRj
'बीजेपी और योगी का वोट जिहाद'
सन 2001 में वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में माननीय मंत्री महोदय अरुण जेटली ने संसद में एक क़ानून पास किया था जिसके अनुसार :
'यदि 18 वर्षो से कम आयु का कोई नवयुवक किसी भी श्रेणी के किसी भी अपराध को चाहे कितनी भी दफा करे, उसे 3 वर्ष से अधिक सजा नही दी जा सकती, ऐसे युवक अपराधी को, चाहे उसने बलात्कार अपहरण और नृशंस हत्या की हो, कारागृह में नहीं रखा जा सकेगा, पुलिस द्वारा रिमांड पर लेकर पूछताछ नही की जा सकेगी तथा उसकी पहचान को सार्वजनिक नही किया जा सकेगा'
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ज्ञातव्य है कि इस क़ानून के प्रभाव में आने से स्त्री के खिलाफ हिंसक अपराधो में भारी वृद्धी हुयी तथा लव जिहाद को पिछले 13 वर्षो में बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला । सजा पाए जाने का न्यूनतम जोखिम होने से 15 से 18 वर्ष के नवयुवको का हौसला बढ़ा, और दुष्परिणाम किशोरियों को भुगतना पड़ा । उल्लेखनीय है कि निर्भया काण्ड के मुख्य आरोपी की आयु भी 18 वर्ष से कम ( 17 वर्ष कुछ माह ) थी ।
राहत इन्दोरी याद आते है -
नयी हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती है,
कबूतरो को खुली छत बिगाड़ देती है,
जो जुर्म करते है इतने बुरे नही होते मगर,
सजाएं न देकर अदालतें बिगाड़ देती है ।
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जब संसद में इस क़ानून को प्रस्तुत किया गया था तब भी अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट के ख्याति प्राप्त दिग्गज वकील थे, तथा भगवा वस्त्र धारी आदित्यनाथ, योगी कहाते थे ।
इन्ही जेटली साहब ने इस बिल को प्रस्तुत किया था और इन्ही योगीराज ने इस बिल को पास करने के लिए 'हां' के पक्ष में मतदान किया था ।
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पिछले 13 वर्षो से इस क़ानून की आड़ में महिलाओं के खिलाफ तमाम तरह के अपराध होते रहे, परन्तु योगी आदित्यनाथ ने इस क़ानून को समाप्त करने के लिए संसद में कभी प्राइवेट मेंबर बिल पेश नही किया ।
इस प्रकार इस समस्या को बढ़ने दिया गया, ताकि वक़्त आने पर इस समस्या पर बयानबाजी करके वोट खींचे जा सके ।
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इस बात को कोई बच्चा भी समझ सकता है कि इस समस्या का बीज न सिर्फइनके द्वारा बोया गया बल्कि इसे फलने फूलने दिया गया, ताकि वक़्त आने पर इस मुद्दे पर वोटो की फसल काटी जा सके । यह सभी पार्टियो की रणनीति होती है कि पहले समस्या बढाने के लिए क़ानून बनाओ, और फिर उस समस्या का हल्ला मचा कर वोट बटोरो । जितनी ज्यादा समस्याएं, उतने ज्यादा वोट । क्योंकि हम इस बात को मानने को राजी नही है कि, योगी राज और जेटली महोदय को अंदेशा नही था कि, इस क़ानून को पास करने से लव जिहाद और बलात्कार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि होगी ।
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तो अब इन मुद्दों को क्यों जोर शोर से उठाया जा रहा है ?
^ क्योंकि बीजेपी राम मंदिर, धारा 370, समान नागरिक संहिता आदि समस्याओं को पिछले 25 सालो से नारों के रूप में उठा उठा कर वोट खींच रही है , और इन मुद्दों में अब करंट दौडाने की शक्ति नही रही ।
^ क्योंकि ये मुद्दे केंद्र सरकार के अधीन आते है, और नमो को इन समस्याओं को निपटाने के लिए बहुमत मिल चुका है ।
^ क्योंकि यह खुला रहस्य है कि विकास का मुद्दा वोट के लिहाज़ से दो कौड़ी का है, और केवल विकास के नाम पर UP विधान सभा में बहुमत नही जुटाया जा सकता ।
^ क्योंकि UP में 80 में से 73 सीट मिलने का मुख्य कारण हिंदुत्व का अंडर करंट तथा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण था, न कि सबका साथ सबका विकास का चूपा ।
^ क्योकि नमो ( मै जन्म से हिन्दू हूँ, और राष्ट्रवादी हूँ, इसलिए हिन्दू राष्ट्रवादी हूँ ) तथा उनके डिप्टी शाह ( मेरी हार्दिक इच्छा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनना चाहिए ) अपनी बयानों की पारी आम चुनावों में खेल चुके है, इसलिए अब भगवा प्रतिक बना कर योगी आदित्यनाथ को अखाड़े में उतारा गया है ।
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समाधान : कार्यकर्ता ऐसे नेताओं को बिलकुल भी बढ़ावा नही देवें जो कि समस्या बढ़ाते है और फिर उन समस्याओं को उछाल कर वोट बटोरते है ।
लम्बे चौड़े वादे करने वाले और मंच, रलियों, इंटरव्यू आदि में दहाड़ने वाले नेताओं के बयानों को अनदेखा करे और उनसे समस्या के निवारण के लिए लिखित कानूनी ड्राफ्ट देने के लिए कहें ।
प्रजा अधीन राजा @ pk