Pawan Jury BhilwaraRj
'करनी न पूछो योगी की'
ऐसे बेरिस्टर के लिए आप क्या कहेंगे, जो सड़को पर क़ानून सम्मत बहस करता हो, लेकिन कचहरी में खामोशी की चादर तान लेता हो ?
इस विरोधाभास की तुलना ऐसे ऊँचे कद के नेताओं से की जा सकती है जो अपने साक्षात्कार और रलियों में किसी मुद्दे पर कर्रे वाले ऐलान देते हो, किन्तु संसद में सम्बंधित विषय का प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने से कतराते हो ।
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UP विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र 'योगी' आदित्यनाथ भी वही कर रहे है ।
योगी महाराज का कहना है कि -
'पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दूओ को भारत की नागरिकता दी जानी चाहिए'
अच्छी बात है !
लेकिन क्या उन्हें ये नागरिकता पेड मिडिया के माइक पर बोलने से मिल जायेगी ?
मुश्किल है !
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प्रजा अधीन राजा समूह इस मांग का समर्थन करता है, लेकिन हमें लगता है कि ऐसा सिर्फ क़ानून पास करके ही किया जा सकता है , बयान बाजी से नही ।
समूह इस सम्बन्ध में कानून बनाने की मांग 2004 से ही कर रहा है, और हमने इस सम्बन्ध में लिखित कानूनी ड्राफ्ट दिया है । तथा इस विषय पर भी लिखित ड्राफ्ट दिया है कि पाकिस्तान से आने वाला नागरिक हिन्दू ही है कोई घुस्पेठिया नही, इसके निर्धारण के लिए आगंतुक का नार्को टेस्ट , ब्रेन मेपिंग तथा डीएनए टेस्ट हो, ताकि उसके हिन्दू शरणार्थी होने को सुनिश्चित किया जा सके ।
हमने प्रस्ताव किया है कि इन सभी मामलो की सुनवाई जूरी ट्रायल द्वारा हो ।
इन कानूनों का मुद्रित संस्करण 2012 से प्रकाशित हो रहा है ।
ड्राफ्ट देखने के लिए कृपया इस लिंक को देखे :
rahulmehta . com / 301 . h . htm
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योगी महाराज चाहते है कि चुनावों के मद्देनज़र विवादित बयान देकर हिन्दू वोट खींचे जाए, और सरकार बनाई जाए ।
उनके कृत्यों से लगता है कि इस विषय में कोई क़ानून पास करने की उनकी मंशा नही है ।
यदि योगी आदित्यनाथ वाकई इस क़ानून को लाने के प्रति गम्भीर है , तो उनके पास इसका लिखित ड्राफ्ट होना चाहिए, और उन्हें इस ड्राफ्ट को कार्यकर्ताओं में वितरित करना चाहिए ।
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क्या आप जानते है कि योगी महाराज ने पाकिस्तान के हिन्दू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के निस्बत संसद में कितनी बार प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है ?
- शून्य, सिफ़र, जीरो, नन
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चूंकि नमो और उनके डिप्टी शाह अब जिम्मेदार पदों की शोभा बढ़ा रहे है इसलिए वक़्त का तकाज़ा है कि अब वे दोनों विवादित बयानों के प्रसारण में सयंम बरते ।
नतीजतन योगी आदित्यनाथ आजकल फॉर्म में चल रहे है, और बयानों के उत्पात मचा रहे है ।
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जहां मुस्लिम ज्यादा हो जाते है वहाँ पे दंगे ज्यादा होते है - योगी उवाच ।
लव जिहाद अन्तराष्ट्रीय साज़िश है - योगी उवाच
ठीक बात है । साज़िश है ।
परन्तु इस समस्या के समाधान के लिए योगी ने पिछले 100 दिन में या 20 वर्ष की सांसदी में कितने प्राइवेट मेंबर बिल पेश किये है ?
- अण्डा ।
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असल में हमारे तमाम भारी भरकम नेता देश को संसद की जगह टीवी चेनलो के स्टूडियो से बयानों के माध्यम से ही चलाना चाहते है ।
- कारण ?
क्योंकि हमारे नेता जानते है कि नागरिक कानूनों में कम बयानों में ज्यादा, संसद की कार्यवाही में कम और पेड मिडिया के सर्कस में ज्यादा और समाधान में कम और समस्या में ज्यादा रुचि दिखाते है ।
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समाधान : हमें नेताओं के बयान सुनने ही नही चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमुक समस्या पर नेताजी ने कितने क़ानून पास किये है अथवा समस्या के समाधान के लिए लिखित में कानूनी ड्राफ्ट दिए है या नही ।
प्रजा अधीन राजा @ pk