Pawan Jury BhilwaraRj
'गाय हमारी माता है
इस से वोट आता है'
अक्टूबर 1966 में जनसंघ, RSS और विहिप के समर्थन से 10000 से अधिक साधुओ ने संसद को घेर कर 'तत्काल' प्रभाव से संसद में गौ हत्या निषेध बिल पास करने की मांग की थी ।
आज वही ताकते सत्ता में बैठी है । नरेन्द्र मोदी इस बिल को 'आराम' से पास करने के मूड में क्यों है ?
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शाष्त्री जी की हत्या के बाद जनवरी 1966 में देवी इंदिरा अम्मा ने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली । न उन्होंने सांसद का चुनाव लड़ा था न ही गौ हत्या निषेध बिल पास करने का कोई वादा किया था ।
अक्टूबर में हज़ारो साधुओ ने संसद और के. कामराज के निवास को घेर लिया ।
सेंकडो की संख्या में साधु संसद परिसर में घुस चुके थे और संसद कक्ष में घुसने की संभावना आसन्न थी ।
देवी इंदिरा अम्मा ने फायरिंग का आदेश दिया और 10 साधुओ का अवसान हो गया ।
देवी इंदिरा अम्मा ने आनदोलन को बहुत ही बदतर ढंग से संभाला था , यदि समय रहते आंसू गेस के गोले और लाठीचार्ज का आदेश दिया जाता तो मामले को कंट्रोल किया जा सकता था ।
किन्तु देवी इंदिरा अम्मा जिन साधुओ पर लाठी चलाने से खुद को बचाती रही, उन्ही साधुओ के खून से अपने हाथ रंगा बैठी ।
देवी इंदिरा अम्मा द्वारा दिया गया फायरिंग का आदेश घोर निंदनीय था, और इस से बचा जा सकता था ।
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पश्चात, देवी इन्दिरा अम्माँ ने उन सभी राज्यों में गौ हत्या निषेध बिल पास करवाए जिन राज्यों में कोंग्रेस सत्ता में थी ।
पश्चिम बंगाल और केरला में कोंग्रेस की मेजोरिटी नही होने से इन राज्यों में बिल पास नही हुए ।
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1985 से बीजेपी, आरएसएस और विहिप लगातार गाय बचाओ गाय बचाओ के एलान दे कर वोट खींच रहे है और सत्ता में आकर इस बिल को लंबित कर रहे है ।
1997 में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने कहा कि हमारे पास सिर्फ 182 सांसद है, जबकि अब 283 सांसद होने के बावजूद बिल पास नही कर रहे है ।
अब नमो अंधभक्त कुप्रचार कर रहे है कि बीजेपी के पास राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नही है ।
जबकि सच्चाई यह है कि सयुंक्त सेशन आहूत कर के इस बिल को पास किया जा सकता है ।
उल्लेखनीय है कि वाजपेयी सरकार के दौरान राज्यसभा में पोटा बिल गिर गया था तब वाजपेयी ने सयुंक्त अधिवेशन बुलवाकर पोटा क़ानून को पास किया था ।
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इस मुआमले में आम आदमी पार्टी इन गायवादी पार्टियों से ज्यादा ईमानदार है ।
कम से कम उनका स्टेंड क्लीयर है कि वे गायो की कटवाई का समर्थन करते है, अत: उनके कार्यकर्ताओ एवं मतदाताओं को इस बात की जानकारी है कि यदि केजरीवाल सत्ता में आते है तो गायो की कटवाई की स्पीड थोड़ी बढ़ जायेगी, जो भी है, लेकिन बात तो क्लियर है कि केजरीवाल को गायो की कटवाई से कोई समस्या नही है । अच्छी बात है ।
राजनीति में क्लियर स्टेंड का स्वागत किया जाना चाहिए, चाहे कोई पार्टी कभी कभार ही ऐसा स्टेंड लेती हो ।
परन्तु ये गायवादी पार्टियाँ विपक्ष में रहते तो गौ रक्षा के बयान और नारे लगाती है ,और सत्ता में आने के बाद भी उन मुद्दों पर बयान और नारे ही लगाती है । क़ानून पास करने का नाम नही लेती ।
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आखिर क्यों बीजेपी गौ हत्या बिल को लंबित कर रही है ?
- क्योकि 2002 में गुजरात का मीट उत्पादन 9 लाख मीट्रिक टन था, जो कि नमो के रहते 2012 में बढ़कर 22 लाख मीट्रिक टन हो गया ।
- क्योंकि नमो ने अपने 9 वर्ष के कार्यकाल में ऐसा कोई बिल पास नही किया जो गायो को दुसरे राज्य में ले जाने को प्रतिबंधित करता हो ।
- क्योंकि बीजेपी शासित किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई बिल पास नही किया ।
- क्योकि नमो ने गौ तस्करी में पकडे गए अपराधियों का नार्को टेस्ट करने का हमेशा विरोध किया ।
- क्योंकि बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में कभी भी गौ निषेध बिल का ड्राफ्ट नही छापा न ही कभी कार्यकर्ताओं को दिया ।
- क्योंकि 10 वर्ष विपक्ष में रहते कभी भी बीजेपी के किसी सांसद ने गौ हत्या रोकने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश नही किया ।
- क्योंकि जब 12 जुलाई 2012 को कोंग्रेस विधायक अकिल आसिफ ने MP विधान सभा में गौ हत्या निषेध बिल पेश किया तो बीजेपी सांसदों ने बिल के खिलाफ मतदान कर के 66 मतों से बिल को गिरवा दिया ।
- क्योंकि गौ देश में गौ हत्या का पूरा रेकेट बीजेपी और आरएसएस के नेता चलाते है और इस धन्धे से इन्हें करोड़ो की आय होती है ।
- क्योकि क़त्ल खानों को दी जाने वाली भारी सब्सिडी में इन्हें हिस्सा मिलता है और कई नेताओं का पैसा क़त्ल खानों में लगा है ।
- क्योंकि देश की कई छोटी मोटी गौ शालाओं पर निगरानी और पंजीयन की माकूल व्यवस्था नही होने से दान से पलने वाली गायो की तस्करी की सम्भावनाए बढ़ जाती है ।
- क्योंकि भारत विश्व में सबसे अधिक बीफ निर्यात करता है और बीफ की मांग बढती जा रही है ।
- क्योंकि अब बीजेपी सबके साथ से 'सबका' विकास करना चाहती है ।
- क्योकि बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ता गाय बचाओ का आन्दोलन फेसबुक औरवाट्स एप पर चलाने में व्यस्त है तथा 'प्रजा अधीन राजा समूह' को छोड़ कर कोई भी संघठन गौ हत्या निषेध बिल के क़ानून ड्राफ्ट का प्रचार नही कर रहा है ।
- क्योंकि पामेला एंडरसन (PETA) ने 'गो वेजिटेरियन' के प्रचार अभियान से आरएसएस, बीजेपी और विहिप से ज्यादा गायो को बचाया है ।
- क्योकि बीजेपी,आरएसएस और विहिप के लिए गाय भी राम मंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता की तरह सिर्फ एक वोट खींचू मुद्दा है ।
- क्योंकि 'पहले शौचालय फिर देवालय' जैसे बयान देकर तिरुपति से 1800 किलो सोना लूटने वाले नमो भी अब सेकुलर होने की राह पर है ।
- क्योकि बिना चुनावी मौसम के ऐसे बिलों की बरसात करने से वोटो की फसल में कोई इजाफा नही होता, इसलिए बीजेपी और आरएसएस UP विधानसभा चुनाव या फिर 2019 के आम चुनाव के ऐन पहले ही भावनाओं को आंदोलित करने वाले ऐसे बिल को पास करने पर 'विचार' करेगी , ऐसे में जितना ही तंदूर दहकेगा, हिन्दुत्व की हांडी उतनी ही लज़ीज़ पकेगी । और अगर तब तक रोज गायों की कटवाई हो रही है तो बकौल नमो 'मुझे क्या.. मेरा क्या..'?
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कुल मिलाकर जिस प्रकार स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी तेल, साबुन, शेम्पू अपनाओ के नारे लगाता है लेकिन रक्षा, बीमा और रेल में विदेशी अपनाओ का समर्थन करता है ,
भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से कोका कोला त्रस्त है किन्तु मोरिशश रूट से अरबो का काला पैसा सफ़ेद करने वाले खुश है,
विहिप के तोगड़िया सभी हिन्दुओ की रक्षा करने के लिए ( न जाने किस से ) उन्हें त्रिशूल से लेस करना चाहते है किन्तु सभी नागरिको को हथियार रखने के क़ानून का विरोध करते है ,
उसी प्रकार आरएसएस और बीजेपी के पास गाय बचाने के नारे है, बयान है, रेलिया है, FB, wts app पर माहौल बनाने के लिए सोशल मिडिया सेल है, हज़ारो गौ रक्षा सीमितिया और गौ शालाएं है, झुंड बना कर गौ वंश से भरे ट्रको की धर पकड़ करते गोइन्दे है, गाय के नाम पर करोडो का चंदा इकठ्ठा करने वाली संस्थाए और साधु है, लाखो प्रचारक, करोडो स्वयं सेवक, लट्ठ चलाना सिखाने के लिए हज़ारो शाखाए है, कई राज्यों में सरकारे और संसद में गाय को बचाने के नाम पर चुने हुए 283 सांसद है,
किन्तु गायो की कटवाई रोकने के लिए 4 पेज का कानूनी ड्राफ्ट लिखने की फुर्सत नही है और उसे संसद में रखने की नीयत नही है ।
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मुंबई वाले ज़रायम पेशा मुम्बईकरो को 'अंडरवर्ल्ड' कह कर पुकारते है, सभी को पता होता है कि अमुक अंडरवर्ल्ड से है ।
ये स्थिति कम भयावह है ।
क्योंकि वे तो सामने से अंडरवर्ल्ड है, लेकिन आरएसएस और बीजेपी जैसे संघठन तो 'अन्दर से अंडरवर्ल्ड' है , और पूरे देश की गेम बजा रहे है । यह स्थिति ज्यादा पेचीदा और खतरनाक बन जाती है ।
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¶ समाधान :
1. सभी कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि दिए गए लिंक से गौ हत्या निषेध बिल का कानूनी ड्राफ्ट डाउनलोड करे , तथा
अ. यदि आप किसी गौ रक्षा संघठन से जुड़े है तो उनके नेताओं को ये ड्राफ्ट दे तथा अपने मेनिफेस्टो में छापने को कहे ।
ब. यदि नेता इनकार करते है, तो उस संघठन की गतिविधियों में अपना समय नष्ट न करे।
स. सभी गौ रक्षको तथा नागरिको में इस कानूनी ड्राफ्ट का प्रचार करे ।
2. अपने क्षेत्र के सांसद तथा विधायक को SMS द्वारा यह ऑर्डर भेजे, कि इस कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में छापा जाए ।
ड्राफ्ट यहाँ से डाऊनलोड करे :
rahulmehta . com / 301 . h . htm
प्रजा अधीन राजा @ pk