Pawan Jury BhilwaraRj
'भय बिनु होय न प्रीति....'
नमो ने पाकिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया बंद कर दी है, अच्छी बात है ।
ये बात अलग है कि पाकिस्तान से बात शुरू करना और रोकना, दोनों ही प्रक्रियाए टाइम वेस्ट करने वाली बात है ।
हमें युद्ध की तैयारी करनी चाहिए
हालांकि प्रजा अधीन राजा समूह का मानना है कि बातचीत से ही सभी समस्याओं का हल निकाला जाना चाहिए ,
शान्ति का कोई विकल्प नही होता ।
पाकिस्तान भी बातचीत से ही सभी समस्याओं को सुलझाना चाहता है । लेकिन पाकिस्तान बातचीत के लिए सिर्फ तब ही वाकई गंभीर दिखाई देगा जब भारत बातचीत की टेबल पर चाय-काफ़ी के कप और बिसलेरी की बोतल की जगह आधुनिक हथियार रख कर बात करे ।
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अमेरिका और पाकिस्तान के बीच इसीलिए शांतिपूर्वक बातचीत सम्भव है , क्योंकि अमेरिका जब बात करता है तो अमेरिका अपनी टेबल पर ढ़ेर सारे हथियार रखता है ।
कमोबेश यही स्थिति चीन की है, चीन को पाकिस्तान ने J&K का काफी हिस्सा (gwada) इसीलिए दिया क्योंकि चीन की टेबल पर भी हथियारों का ज़खीरा रहता है ।
अमेरिका और चीन हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भर है, इसीलिए बातचीत आसान हो जाती है, किन्तु भारत हथियारो की आयातित बैसाखियों पर टिका हुआ है । इसलिए बातचीत बार बार टूटती रहती है, और 'प्रोपर' माहोल नही बन पाता वार्ता का ।
महाकवि तुलसीदास सुंदर काण्ड में चेताते हुए कहते है :
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति,
सहज कृपण सन सुन्दर निति,
ममता रत सन ग्यान कहानी,
अति लोभी सन बिरती बखानी,
क्रोधी सम, कामही हरि कथा,
ऊसर बीज बए फल जथा ।
अर्थात शठ और कुटिल व्यक्ति के साथ विनयशील व्यवहार का उद्योग उसी प्रकार नष्ट हो जाता है जिस प्रकार बंजर भूमि में बीज डालने से बीज नष्ट हो जाता है ।
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शान्ति स्थापना में भय की भूमिका :
क्या हमने कभी विचार किया है कि अमेरिका,रूस, ब्रिटेन या चीन से यदि हमें युद्ध लड़ना पड़ता है तो....
तो... तो तो तो !!! तो ###₹':'*€¢°^अब्बा डब्बा जब्बा ।
और यदि चीन ने अपने न्यूक्लियर वेपन और क्रूज़ मिसाइल्स पाकिस्तान को दे दिए.!!
तो भी %#**%₹ अब्बा डब्बा जब्बा ।
युद्ध में यदि हमे कम्पनियों ने हथियार देना बंद कर दिया या FDI व्युत्पन्न हथियारों के 'ट्रोज़न' एक्टिवेट हो गए तो भी &₹#'^€¢ अब्बा डब्बा जब्बा ।
झुरझुरी दौड़ रही है क्या बदन में ?
भारत महान, हिन्दू जागो, एक हो जाओ, भारत विश्व शक्ति, भारत विश्व गुरु, मेरा भारत महान आदि डायलोग तो ठीक है, पर हथियार कहाँ है ?
क्योकि हमें पता है हमारी सेना की दूकान में सामान इन्ही देशो से आता है । यदि युद्ध के समय हमे इन देशो ने हथियार देना बंद कर दिया या FDI निर्मित हथियारों में इम्प्लांट ट्रोजन सक्रीय कर दिया तो हमारी सेना की दूकान युद्ध के दौरान ही बंद हो जायेगी , और चीन और पाक की सेना मद्रास तक न पहुंचे उसके प्रतिरोध के लिए नागरिको के पास क्या हथियार है ?
नेल कटर, सब्जी काटने के चाकू ? विहिप के पौने तीन इंच के त्रिशूल ? आरएसएस की लाठिया ?
इनसे रुकेगी सेना ?
यह लगभग तय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हो सकता है । इस युद्ध को टालने के लिए हमें हथियार चाहिए , ढ़ेर सारे हथियार , ताकि शक्ति संतुलन बन जाए ।
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तीन दिन की विनय के बाद जब श्री रामचन्द्र ने शोषक बाण का संधान किया तो समुद्र देवता तत्काल त्राहि माम त्राहि माम का उच्चारण करते हुए बातचीत की टेबल पर नही बल्कि सीधे चरणों में ही आकर बैठ गए ।
तुलसी महाराज कहते है :
उरग मकर झस गन अकुलाने,
जरत जंतु जलनिधि जब जाने,
कनक थार लिए मनी गन नाना,
आयउ विप्र रूप तजि माना ।
किन्तु लंकेश को मुग़ालता था कि उसके पास लड़ने के लिए पर्याप्त हथियार है, फलस्वरूप युद्ध टाला नही जा सका ।
दुर्योधन ने तो वासुदेव को बन्दी बना ने की कोशिश की ही थी , किन्तु 'विराट स्वरुप' देख कर उसकी आँखे 'खुल' गयी और दुर्योधन ने बंदी बनाने का विचार 'पोस्टपोंड' कर दिया ।
हमे यह समझना बहुत ज़रूरी है कि पाकिस्तान एक UNSTABLE CONTRY है । पाकिस्तान ऐसा बाबाजी है जिस से लड़ के हमें सिर्फ भभूत ही हाथ आने वाली है ।
पाकिस्तान से शान्ति वार्ता सिर्फ हथियारों के टीले पर बैठ कर ही की जा सकती है ।
और इस युद्ध को सिर्फ एक भय से ही टाला जा सकता है , वो डर जो जीव मात्र में सिहरन पैदा कर देता ह ।
मौत का भय, युद्ध का भय ।
यदि हम इस भय का संचार करने में सफल हो जाते है , तो शान्ति स्थापित हो सकती है । और कोई विकल्प नही । कम से कम पाकिस्तान के साथ तो नही ।
वासुदेव चाहते तो युद्ध टाल सकते थे । लेकिन उन्होंने शस्त्र न उठाने की शपथ लेकर कौरवों को कुरुक्षेत्र में खिंचे चले आने की प्रेरणा कर दी थी । निहत्थे वासुदेव को देखकर ही कौरव युद्ध की हिम्मत जुटा सके थे ।
वासुदेव का अभीष्ट कौरवों की मुक्ति या विनाश रहा होगा, इसे समझा जा सकता है ।
किन्तु हम इस युद्ध को टाल ले यही बेहतर है । इन कौरवों की मुक्ति हमे भी महंगी पड़ सकती है ।
और यदि ये खुद ही मुक्त होने के लिए आमादा हो जायेंगे तो फिर एक कुरुक्षेत्र और सही ।
पर तब तक हम गांडीव उठाने की ताकत तो जुटा ले ।
लड़ेंगे किस से ? हथियार कहाँ है ?
आइये अपनी चतुरंगिनी सेना को अस्त्रो शास्त्रों से लेस करने के लिए निम्नलिखित कानूनों को गेजेट में छपवाने की मांग करे ।
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¶ वास्तविक समाधान :
- NPT डील को रद्द कीजिये और एक 50 मेगाटन का वायुमंडलीय विस्फोट कीजिये ।( पोकरण -2 में 45 किलोटन का विस्फोट किया था ) इस से पाकिस्तान की अवाम में भय का संचार होगा ।
- NPT डील रद्द करने से बड़ा बवाल मचेगा, इसके लिए हर नागरिक को बन्दूक रखने की छूट दीजिये , और उर्जा के सम्बन्ध में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में क़ानून बनाइये
- रक्षा में FDI को केंसिल कीजिये और सव्देशी आधुनिक हथियारों के उत्पादन के लिए वेल्थ टेक्स और जूरी सिस्टम के क़ानून गेजेट में छापिये ।
वेल्थ टेक्स से हमें इतना पैसा मिलेगा की हम सेना खड़ी कर सके और जूरी सिस्टम और गणित विज्ञान में सात्य प्रणाली से हमारी तकनीक का विकास होगा और घरेलु हथियार उत्पादक कम्पनियों को सरंक्षण मिलेगा ।
- पीएम और रक्षा मंत्री को प्रजा अधीन कीजिये ।
- परमाणु इंधन के लिए थोरियम पर अनुसंधान शुरू करवाइए ताकि युरेनियम के लिए अमेरिका पर निर्भरता खत्म हो ।
- राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस के चित्र भारतीय मुद्राओं पर छापिये, ताकि नागरिको को सेना और हथियारों के महत्त्व की जानकारी मिले ।
- धारा 370 ख़त्म कीजिये ।
- पाकिस्तान से सभी प्रकार के व्यापारिक रिश्ते ख़त्म कीजिये।
- पाकिस्तान को हवाई यातायात के लिए भारतीय मार्ग के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कीजिये, और खुद भी उनके हवाई मार्ग का इस्तेमाल मत कीजिये ।
- पेट्रोल और गेस पर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए:
- DDMRCM क़ानून को गेजेट में छापिये ।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ढांचा सुधारिए, कम एवरेज वाली महंगी आयातित कारो और बाइक्स पर भारी कर आरोपित कीजिये ।
- साइकिलो के उपयोग को प्राथमिकता दीजिये और देश के लिए थोड़ी साइकिल भी चलाइये ।
- गौ वंश की कटवाई पर प्रतिबन्ध लगाइये और गोबर गेस के प्लांट बड़े पैमाने पर लगे , इसे प्रोत्साहित कीजिये, अनुदान दीजिये ।
इन उपायों से हम उर्जा के क्षेत्र में सऊदी अरब पर निर्भरता से मुक्ति पा जायेंगे ।
- हमारे घर में घुसे बैठे 2 करोड़ मीर जाफरो और जयचंदों (बांग्लादेशी घुसपेठियो ) को खदेड़ने का कानून गेजेट में छापिए ।
- इन सभी कानूनों के ड्राफ्ट rahulmehta . com / 301 . h . htm से मुफ्त डाउनलोड कीजिये और नागरिको में इनका प्रचार कीजिये ।
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छद्म ( फर्ज़ी ) समाधान :
- राष्ट्रवाद के नाम पर कार्यकर्ताओं का टाइम वेस्ट करने वाले और देश की सेना मज़बूत करने के लिए आवश्यक कानूनों का विरोध करने वाले RSS जैसे फर्ज़ी संघठनो से दूरी बनाइये । ( यदि आपको इस आरोप पर एतराज है तो RSS के नेताओं से सेना को मज़बूत करने के लिए कानूनी ड्राफ्ट्स देने को कहे , वे खुद ही आपको अपने संघठन से निकाल बाहर करेंगे या 'बाद' में {मतलब अगले जनम में}ड्राफ्ट देने को कहेंगे )
- नेताओं की टोपियाँ पहनकर, झंडे, झाडू लहराते हुए सडको पर नारे लगाते हुए भटकने में उर्जा नष्ट करने की जगह कानूनों का प्रचार कीजिये ।
- शाखाओं में जाकर लाठी चलाना सीखने की जगह हथियार रखने के क़ानून की मांग कीजिये ।
- प्रभु (नमो) की भक्ति में समय नष्ट न करे, कितनी भी भक्ति करने से भी सीटे 283 ही रहेगी , बढ़ने वाली नही है । प्रभु के प्रवचनों की अमृत वर्षा में भीगने से बेहतर है , यह देखे कि प्रभु कौन से क़ानून पास कर रहे है और कौनसे नही ।
- विहिप, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, स्वदेशी जागरण मंच आदि टाइम पास करने की भारी भरकम मशीनों से देश कि सेना मज़बूत करने के ड्राफ्ट्स मांगे । नही देने पर आप प्रजा अधीन राजा समूह द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट्स उन्हें दे और इनमे कमिया बताने को कहे । ( यदि कोई कमी हो तो उनसे सुधार कर देने का आग्रह करे )
- पेड मिडिया के सामने बैठ कर अफीम पीना बंद करे। प्रचार , बयान , वादे और नारों की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकल कर क़ानूनो की वास्तविक दुनिया में आये ।
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जिन कार्यकर्ताओ को लगता है कि वार्ता नही करने से पाकिस्तान 'घबरा' गया है, नवाज़ शरीफ को दस्त लग गए है, पाक के जनरलो में हडकंप मच गया है, पूरा पाकिस्तान हमने हिला कर रख दिया है..
हमारे इस 'कठोर कदम' से जिहादियो ने जिहाद छोड़ कर परचून की दुकाने खोल ली है, तो वो इस मीठी खुश फहमी में जी सकते है ।
#हालांकि पाकिस्तान के उच्चयोग ने दिल्ली में ही प्रेस कोंफ्रेंस कर के स्पष्ट कर दिया है कि 'हुर्रियत नेताओं से बातचीत जारी रहेगी' । मतलब भारत ( प्रभु ) को जो उखाड़ना है उखाड़ ले ।
लेकिन यदि कार्यकर्ताओं को लगता है कि हिन्दू जागो, एक हो जाओ, भारत विश्व गुरु है, भारत महान है टाइप के नारो से सेना मज़बूत नही होने वाली, और सेना मज़बूत हुए बिना पाकिस्तान नही मानने वाला ,तो हमारे पास एक मात्र विकल्प है कि हम अच्छे कानूनों का प्रचार करे और पीएम पर इन कानूनों को गेजेट में छापने का दबाव बनाए ।
*सभी कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि इन कानूनों के ड्राफ्ट गेजेट में छापने के लिए अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे ।
प्रजा अधीन राजा @ pk