Pawan Jury BhilwaraRj

'श्रेय लूटने की छटपटाहट'

यह देखा गया है कि जब भी आम कार्यकर्ता किसी विषय पर जनदबाव द्वारा कोई सकारात्मक बदलाव करवाने में सफल होते है तो नेता उस बदलाव का श्रेय लेने को आतुर रहते है । इस से कार्यकर्ता हतोत्साहित होते है ।

मेनका गांधी ने जुवेनाइल एक्ट में उम्र सीमा 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने का फैसला किया है ।
हालांकि राजनेतिक इच्छाशक्ति के अभाव में इस प्रावधान को 2010 से प्रभावी नही किया जा रहा है, इस कारण 1 वर्ष बाद दिल्ली गेंग रेप का मुख्य अभियुक्त सडको पर खुला घूम रहा होगा ।

जुवेनाइल एक्ट में उम्र सीमा 18 से घटाकर 16 वर्ष करने का केम्पेन प्रजा अधीन राजा समूह 2012 से ही चला रहा है ।
इस क़ानून के प्रचार के लिए समूह ने तीन बार समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाए ।यू ट्यूब पर विडिओ बनाकर इस विषय को उठाने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया , सोशल मिडिया पर कई आर्टिकल लिखे तथा संशोधित कानूनी ड्राफ्ट प्रकाशित किया ।

इन प्रयासों के फलस्वरूप हज़ारो कार्यकर्ताओं ने अपने क्षेत्र के सांसदों को इस बिल के सम्बन्ध में SMS भेजे और नेताओं पर इस क़ानून में संशोधन का दबाव बना ।

अपनी मांग सरकार के सामने रखने का सबसे सीधा तरीका यह है कि अपने क्षेत्र के सांसद को इस सम्बन्ध में SMS द्वारा उनके मोबाईल पर ऑर्डर भेजा जाए ।
इस से आपकी बात सीधे ही सरकार के पास बिना किसी हो हल्ले के पहुँच जाती है और नागरिको के पास अधिकृत सबूत भी रहता है । 'सोमोके' नही चाहते कि ऐसे आन्दोलन को प्रचार मिले, जिस से करोडो नागरिक अपनी बात सरकार के सामने सीधे और स्पष्ट रूप से रख सके, इसलिए नमो सरकार इसका पूरा क्रेडिट ले रही है ।

मोदी अंधभक्तो का कहना है कि ये संशोधन 'स्वप्रेरणा' से लाया गया है । इस संभावना को क्षीण करने वाले कुछ तथ्य :

- जुवेनाइल एक्ट राजीव सरकार ने पास किया था, मूल बिल में जुवेनाइल की उम्र सीमा 16 वर्ष थी किन्तु वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में अरुण जेटली और शौरी ने सऊदी से घूस लेकर इस में संशोधन किया और जुवेनाइल की उम्र सीमा बढाकर 18 वर्ष कर दी । लेकिन इस तथ्य की चर्चा न कर के पेड मिडिया इसे छुपा रहा है ।

- तब वाजपेयी सरकार में मंत्री मेनका ने इस क़ानून का समर्थन किया था ।

- दस वर्षो के दौरान न तो बीजेपी और न ही मोदी ने कभी इस क़ानून का विरोध किया ।

- 10 वर्षो के दौरान कभी बीजेपी नेताओं ने इस क़ानून में संशोधन के लिए संसद में प्राईवेट मेंबर बिल पेश नही किया ।

- बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में इस क़ानून में संशोधन का उल्लेख नही किया ।

- दिल्ली गेंग रेप के बाद कभी किसी बीजेपी के नेता ने जुवेनाइल एक्ट में संशोधन के पक्ष में बयान नही दिया न ही कभी समर्थन किया ।

- कोंग्रेस ने भी 10 वर्ष सत्ता में रहने के दौरान इसमें बदलाव नही किये । निर्भया काण्ड के बावजूद ।

- केजरीवाल ने कभी इस क़ानून के संशोधन की मांग नही की ,न ही घोषणा पत्र में लिखा ।

- सपा, बसपा , लेफ्ट और ममता की भी यही स्थिति है ।
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- किसी NGO और सामाजिक संघठन ने इस संशोधन की मांग नही की ।

संशोधन के निहित स्वार्थ :

- जैसे जैसे SMS केम्पेन आगे बढ़ रहा था, बीजेपी एक्सपोज़ हो रही थी तथा यह संभावना बढती जा रही थी कि तूल पकड़ने पर इस संशोधन का श्रेय SMS केम्पेन को मिलेगा ।

- पेड़ मिडिया में यूपी और दिल्ली में होने वाले बलात्कार का फूटेज बढ़ता जा रहा है, रेप का मुद्दा 2 साल से पेड मिडिया में गर्म है, बीजेपी यूपी चुनाव में इसे मुद्दा बनाना चाहती है । इसके लिए इस क़ानून में संशोधन का प्रचार यूपी विधानसभा चुनावों में किया जा सकेगा । वस्तुत: चुनाव तक मिडिया में यूपी की रेप की घटनाएं प्रमुखता से छाई रहने वाली है जबकि पेड मिडिया को यह तथ्य प्रमुखता से नही बताने के लिए भुगतान किया जा रहा है कि देश में सबसे ज्यादा रेप मध्य प्रदेश में होते है ।

- 'मेडम' मेनका को लगता है कि 'शहजादे' वरुण यूपी के सीएम बनने के काबिल है, प्रचार के दौरान मेनका इस क़ानून का श्रेय वरुण के पक्ष में डायवर्ट कर सकेगी ।

खैर राजनेतिक दलों को राजनीति करने की छूट है और उन पर नैतिक मापदंड लागू नही होते, यह बात जग जाहिर है । इसलिए समस्याओं का समाधान भी चुनावी फसल काटने के मौसम में किया जाता है ।
किन्तु जो क़ानून पास किया गया है उसमे भी कई खामियां है ।

- 16 से 18 वय का अपराधी जुवेनाइल है या नही इसका फैसला करने का अधिकार जुवेनाइल बोर्ड को दिया गया है ।

परिणाम - रसूख दार परिवार के लड़के बोर्ड को मोटी घूस देकर खुद को जुवेनाइल घोषित करवा सकेंगे ।

- जुवेनाइल बोर्ड को प्रजा अधीन नही किया गया है ।

- जुवेनाइल के निर्धारण के लिए नागरिको की ज्यूरी द्वारा फैसले का प्रावधान नही किया गया है ।

13 वर्ष पहले बीजेपी द्वारा किये गए एक निंदनीय फैसले के कारण भारत में बलात्कार , लव जेहाद, अपहरण और जेहाद की घटनाओं में जबरदस्त ईजाफा हुआजिन्हें कि रोका जा सकता था ।

सबक - यदि कार्यकर्ता और नागरिक नेता भक्ति के स्थान पर अच्छे कानूनों का प्रचार करे और अपने सांसदों को क़ानून ड्राफ्ट के ऑर्डर SMS द्वारा भेजे तो सुधार तेजी से लाये जा सकते है ।

प्रजा अधीन राजा @ pk