Pawan Jury BhilwaraRj
ताकि स्मरण रहे:
- 2011 में एक सेन्सस हुआ था, जैसा की हर दशक में होता आया है ।
- 2011 की जनगणना के सभी आंकड़े 2012 में प्रकाशित किये गए, किन्तु धर्म और भाषा के आँकड़े शूर्पनखा गाँधी प्रकाशित करना 'भूल' गयी ।
- बीजेपी और केजरीवाल के भी ये बात उस समय 'ध्यान' में नही आई ।
- अब तो बात 2 साल पुरानी हो गयी इसलिए सब पार्टिया 'भूल' चुकी है ।
- पेड मिडिया का भी इस और कभी 'ध्यान' नही गया ।
- ऐसे गंभीर विषय को भुला देना देश को बहुत भारी पड़ सकता है, अत: नागरिको का फ़र्ज़ है कि अपने नेताओं को इस सम्बन्ध में स्मरण कराते रहे ।