Pawan Jury BhilwaraRj

'वो सलीबो के करीब आये तो हमको,
कायदे क़ानून समझाने लगे है ..'

पिछले तीन दशक से बीजेपी निम्नलिखित कानूनों को पास करने के लिए 'मरी' जा रही है -

1. जनसँख्या नियंत्रण क़ानून
2. बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने का क़ानून
3. राम- कृष्ण जन्म भूमि पर 'भव्य' मंदिर बनाने का क़ानून
4. समान नागरिक संहिता क़ानून
5. यदि U टर्न न ले तो मोरिशश रूट समाप्त करने का क़ानून
6. नेशनल आई डी बनाने का क़ानून

-10 वर्ष तक कहा जाता रहा कि हम सत्ता में नही है ।

जब वाजपेयी सरकार बनी तो कहा गया कि बीजेपी के पास बहुमत नही है ।

- तो अब जबकि बीजेपी के पास बहुमत है तो एक बड़ा ही दिलचस्प पहलू सामने आया है :

अब कहा जा रहा है कि 'राज्य सभा' में बहुमत नही है !!!!!!

आजकल सोशल मिडिया पर मोदी अंधभक्तो द्वारा ये चूपा दिया जा रहा है कि एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत नही है इसीलिए उपरोक्त वांछित क़ानून पास नही हो पा रहे है !!!!!!!!!!

यह तर्क पूरी तरह से झूठ है और चालाकी की पराकाष्ठा है ।

एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत नही है यह बात ठीक है , लेकिन क़ानून पास करने के राज्यसभा में बहुमत चाहिए ये बिलकुल ही मनगड़ंत बात है और टाइम पास करने के लिए कही जा रही है ।

यदि मोदी चाहे तो निम्नलिखित तरीको से क़ानून पास किये जा सकते है । ( करना चाहे तो )

1. लोकसभा में बिल पास किया जा सकता है । इस से बीजेपी की नियत और स्टेंड साफ़ हो जाएगा और राज्यसभा में यदि बिल गिरता है तो अमुक विषय पर अन्य पार्टिया एक्सपोज़ हो जायेगी । गोलमोल स्टेंड से छुटकारा मिलेगा ।

2. राज्यसभा में बिल गिरने पर संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है। संयुक्त सत्र में एनडीए के पास बहुमत है ।
543+250 = 793
793÷ 2 ( +1) = 397 (बहुमत)

एनडीए -
340 + 57 = 397 ( बहुमत *)
* गणना में दो चार सांसद ऊपर नीचे हो तो CBI पीछे लगा कर या अन्य तरीके से उन्हें काबू किया जा सकता है )

3. क़ानून को सीधे ही गेजेट में छापा जा सकता है , गेजेट में छपने से अमुक बिल सीधे ही क़ानून बन जाएगा । जब सत्र आरम्भ हो तो वोटिंग करवाई जा सकती है ।

4. केबिनेट की अनुमति से सीधे ही अध्यादेश लाया जा सकता है । जब सत्र प्रारम्भ हो तब वोटिंग की जा सकती है ।

5. इमरजेंसी लगाने के लिए 273 सांसद चाहिए, जो कि बीजेपी के पास है । इमरजेंसी लगाकर 15 दिन मे सारे वांछित क़ानून पास किये जा सकते है ।

( प्रजा अधीन राजा समूह इमरजेंसी लगा कर क़ानून पास करने के पक्ष में नही है , लेकिन पीएम ऐसा करे तो संविधान में इसकी व्यवस्था है)

एक बार लोकसभा में क़ानून पास हो जाता है तो क़ानून को प्रचार मिलेगा और जनहित के क़ानून को पास करवाने के लिए नागरिको द्वारा राज्य सभा सान्सदो को SmS द्वारा ऑर्डर भेज कर क़ानून पास करने का दबाव बनाया जा सकता है ।

उदाहरण के लिए वाजपेयी सरकार ने जुवेनाइल एक्ट में उम्र सीमा 16 वर्ष से बढ़ा कर 18 वर्ष कर दी थी । जिस से बलात्कार और लव जिहाद को भारी सरक्षण मिला ।

ज्ञातव्य है कि प्रजा अधीन राजा समूह इस मुद्दे को पिछले 2 साल से उठा रहा है, जुवेनाइल की आयु पुन: 18 से 16 करने के लिए समूह ने समाचार पत्रो में विज्ञापन दिए, इस मुद्दे पर सोशल मिडिया पर विडिओ और लेखो के माध्यम से नागरिको और कार्यकर्ताओ से अपने सांसद को sms द्वारा ऑर्डर भेजने की अपील की ।

इस sms केम्पेन का नतीजा है कि जन दबाव को देखते हुए सरकार अपने 12 वर्ष पहले किये गए फैसले पर पुनर्विचार कर रही है ।

सांसद को sms द्वारा ऑर्डर भेजना अपनी मांग रखने का मौजूदा लोकतंत्र में सबसे प्रभावी और सरल तरीका है ।और इस प्रकार के केम्पेन से उपरोक्त कानूनों के पक्ष में भी जन दबाव बनाया जा सकता है ।

स्पष्ट है कि मोदी जो भी क़ानून लाना चाहते है उन्हें लाने कि शक्ति आज कि तारीख में भी संविधान उन्हें देता है ।

राज्यसभा में बहुमत नही होने का कुप्रचार नागरिको को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा नाटक है, नाटक के सिवा कुछ नही ।

प्रजा अधीन राज़ा @ pk।