Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
A) सन्डे गार्जियन कहता है--- आंध्रा प्रदेश में किसानों ने 500 टन टमाटर सड़क पर फेंक दिए। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें अपने टमाटरों के लिए मात्र 10 रूपये प्रति किलो जितनी अत्यंत कम कीमत ऑफर की जा रही है, जिसका उन्होंने विरोध किया। शरद पवार का पसंदीदा व्यंजन प्याज की सब्जी है, और ऐसा लगता है कि गडकरी का पसंदीदा व्यंजन टमाटर सूप है।
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B) सोनिया- शरद ने प्याज की लूट की योजना को अमली जामा पहनाया, और अब नमो- गडकरी ने पिछले 15 दिनों में कम से कम 600 करोड़ रूपये* (जैसा कि मेरा अनुमान है) की टमाटर की लूट को अंजाम दिया!!
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C) WTO पर खाद्य अनुदान का नाटक।
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A) ऐसा नही है कि अति- आपूर्ति हो रही है। सब्जियों का अंतर्राज्यीय तथा अंतर-जिला व्यापार सरकार के अधीन है। और सरकारी नियंत्रण का लाभ उठाते हुए मंत्री तथा व्यापारी यह सुनिश्चित करते हैं कि भले ही किसान टमाटरों को फेंक दे लेकिन उन्हें खरीदा नही जाये, ताकि शहरों में टमाटर की कीमतें आसमान छूती रहें!!
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सन्डे गार्जियन ने बताया की आक्रोशित किसानों ने 500 टन टमाटर सड़क पर फेंक दिए। इन टमाटरों का खुदरा बाजार मूल्य 80 रूपये प्रति किलो के हिसाब से 80,000 रूपये प्रति टन, अर्थात 4 करोड़ रूपये होंगे। भारी मात्रा में टमाटरों के बर्बाद होने और पशुओं को खिला देने के अलावा इतने रूपये के टमाटर नष्ट हुए।
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और इससे भी हैरतअंगेज बात तो यह है कि ToI या RSS के पाञ्चजन्य आदि मीडिया ने इसके बारे में खबर तक नही छापी !! इन सबको अवश्य ही चुप रहने के पैसे मिले होंगे।
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थोक खरीदारों ने राज्य/ केंद्रीय मंत्रियों के आशीर्वाद से एक उत्पादक/ मूल्य निर्धारक संघ बनाया है, और टमाटरों के कुल उत्पादन का मात्र एक छोटा भाग खरीद कर शेष टमाटर फेंकने को किसानो को विवश कर दे रहे हैं। फलस्वरूप शहरों में आपूर्ति बहुत कम हो रही है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं। आइये अनुमान करें कि इन उत्पादक/ मूल्य निर्धारक संघों ने पिछले 15 दिनों में कितने पैसे बनाये।
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B) टमाटर लूट का एक अनुमानित चित्र
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1. आंध्रा प्रदेश में किसानो द्वारा लिया जाने वाला विक्रय मूल्य= आंध्रा प्रदेश में थोक खरीदारों द्वारा चुकाया जाने वाला खरीद मूल्य= 10 रूपये प्रति किलो।
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2. ट्रक की क्षमता= 20000 किलो।
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3. आंध्रा प्रदेश की हैदराबाद एवं अहमदाबाद से दूरी= 900 किलो मीटर= ट्रक से अधिकतम 3 दिन।
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4. दो चालकों एवं एक सफाई कर्मी का वेतन आदि= 2000 रूपये प्रति दिन= 12,000 रूपये
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5. ईंधन का खर्च= 10 रूपये प्रति किलो मीटर = 10,000 रूपये
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6. अन्य खर्च, ट्रक की मरम्मत आदि = 10,000 रूपये
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7. अतः 20000 किलो टमाटरों के परिवहन का खर्च= 32,000 रूपये, यानी 2 रूपये प्रति किलो से भी कम है।
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8. इसमें टमाटर सड़ने और बर्बाद होने की हानि भी शामिल कर लें, तो टमाटरों के परिवहन का खर्च= 10 रूपये प्रति किलो।
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9. अतः अहमदाबाद में थोक विक्रय मूल्य होगा= 20 रूपये प्रति किलो।
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10. पिछले 15 दिनों में शहरों में टमाटर का थोक विक्रय मूल्य रहा है= 50 रूपये प्रति किलो I अतः. सकल मुनाफा = 30 रूपये प्रति किलो। सामान्य दिन का लाभ होना चाहिए=10 रूपये प्रति किलो। अतः लूट= 20 रूपये प्रति किलो।
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11. भारत के शहरों में लगभग 20 करोड़ समृद्ध व्यक्ति रहते हैं। पिछले 15 दिनों में नकद मूल्य 80/ किलो तथा थोक मूल्य 50 / किलो होने से कुछ लोग तो प्रतिदिन 50 ग्राम टमाटर खाएंगे, कुछ 200 ग्राम प्रति दिन। औसतन टमाटर की उपभोग दर मान लीजिये 100 ग्राम प्रति व्यक्ति रहेगी, अर्थात पिछले 15 दिनों में 1.5 किलो।
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12. अतः कुल उपभोग= 20 करोड़ * 1.5 किलो/ प्रति व्यक्ति= 30 करोड़ किलो।
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13. अतः लूट= 30 करोड़ किलो * 20 रूपये प्रति किलो = 600 करोड़ रूपये।
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कृपया ध्यान दे कि मैं अधिकतम लगत खर्च बता रहा हूँ, जैसे- रेलवे द्वारा परिवहन में खर्च मात्र 10 रूपये प्रति 100 किलो पर आएगा !! लेकिन मैं ट्रक मान कर चल रहा हूँ, और चालकों एवं सफाई- कर्मियों का भी अधिकतम वेतन मैंने माना है।
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तब भी पिछले 15 दिनों की लूट की दर कम से कम 600 करोड़ रूपये प्राप्त हो रही है!!
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अतः इन टमाटरों से कितना जूस निकलेगा? कल्पना कीजिये कि सभी अनाजों, सब्जियों, फलों से कितना जूस, ब्रेड, सलाद आदि बनता होगा? इसमें बैंकिंग, भूमि, सरकारी ठेकों का खर्च भी जोड़ लीजिये। इसी से पता चलता है कि कैसे कांग्रेस, भाजपा, आआपा आदि पार्टियों के नेताओं के प्रायोजकों के पास इतने पैसे आते हैं कि वे वोटो की खरीद फरोख्त के लिए हजारों रूपये बिकाऊ मीडिया को दे पाते हैं।
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सारांशतः यह कह सकते हैं कि टमाटर की बढ़ी हुई कीमतों के रूप में हम अन्ना के अप्रैल- 2011 के आंदोलन के मीडिया कवरेज, अन्ना द्वारा दूसरी बार अगस्त- 2011 में किये गए अनशन, अगस्त- 2013 में एके द्वारा किये गए अनशन, 2013 में एके के लिए विधान सभा चुनाव के लिए किये गए मीडिया कवरेज, बिकाऊ अर्नब द्वारा लिए गए राहुल गांधी के साक्षात्कार, नमो के लिए 2 वर्षों तक किये गए बड़े पैमाने पर HHN-GGN कवरेज आदि का हर्जाना चुका रहे हैं। इन कवरेज के लिए मीडिया को किसी ने तो पैसे दिए होंगे। और उस पैसे के श्रोत FDI या टमाटर या दोनों होंगे। इस प्रकार जन लोकपाल, स्वराज, HHN-GGN, ABMS आदि का मुफ्त का मनोरंजन हमें मल्टीप्लेक्स की टिकटों से भी अधिक महंगा पड़ा।
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इसके लिए मैं यह समाधान प्रस्तावित करता हूँ कि --- कृपया अपने सांसद को SMS द्वारा आदेश भेजें कि वे राजपत्र में TCP ड्राफ्ट प्रकाशित करें। एक बार यदि यह ड्राफ्ट आ जाये तो हम नागरिक सभी अनाजों, सब्जियों, और फलों पर लगाये जाने वाले सभी व्यापारिक प्रतिबंधों (जमाखोरी को छोड़कर) को हटाने हेतु कानून ड्राफ्ट प्रकशित करा सकते हैं। कृपया अपने सांसद को यह आदेश भेजें, देखें: ""# TCP see section-1.3 of rahulmehta.com / 301.htm".
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C) WTO पर खाद्य अनुदान का नाटक
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नमो ने WTO की साडी शर्तें मान ली, जैसे- हर क्षेत्र में FDI लागू करना, दो को छोड़कर-- (1 ) खुदरा (रिटेल) में FDI तथा (2) खाद्य अनुदान। वस्तुतः नमो भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मांगे, जैसे- रेलवे में FDI , रक्षा क्षेत्र में FDI आदि को स्वीकार करते हैं, जो कि WTO में शामिल नही है। यह खाद्य अनुदान विरोध का महज एक नाटक है। नमो ने भी मॉरीशस मार्ग को स्वीकार किया है!!
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इस नाटक के मूल अंश निम्नलिखित हैं-
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1. नमो तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिक यह दिखाना चाहते हैं कि नमो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधीन नही हैं।
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2. अतः बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिक 100 शर्ते रखेंगे, जिनमे से नमो 98 शर्ते मान लेंगे, और दो पर न बोल देंगे- रिटेल एवं खाद्य में FDI पर।
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3. बिकाऊ मीडिया को इन दो मुद्दो पर नमो की न को प्रचारित करने तथा अन्य सभी मुद्दो जैसे- रेलवे, रक्षा आदि में FDI को तथा मॉरीशस मार्ग को नमो द्वारा स्वीकार करने की बात को ढकने के लिए पैसे दिए गए हैं।
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अतः नमो ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरेंगे जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को न बोल सकता है !!
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बैंकिंग, रेलवे, आदि में FDI तथा यहाँ तक कि मॉरीशस मार्ग तक को स्वीकार कर लेने को देखते हुए नमो को MMS-2 तथा ABV-2 की श्रेणी में रख सकते हैं।
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अब वक़्त आ गया है कि हम सभी नागरिकों से इसके लिए अनुरोध करें कि वे कांग्रेस/ नमो आदि द्वारा बैंकिंग, रेलवे, आदि में FDI लागू करने से हुई हानि पर ध्यान दे।खाद्य अनुदान मुद्दे पर बिकाऊ मीडिया द्वारा किये जा रहे प्रचार को नजरअंदाज करें।
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कृपया यह भी ध्यान रखें कि एके ने भी FDI या यहाँ तक कि मॉरीशस मार्ग का भी विरोध नही किया। वस्तुतः आआपा के सभी चार सांसदों ने मॉरीशस मार्ग को समाप्त करने हेतु लोकसभा में एक PMB = प्राइवेट मेंबर'स बिल (स्वतंत्र सदस्य विधेयक) पेश करने से इंकार किया, और बहाना बनाया कि PMB कभी सफल नही होता। अतः WTO के मामले में So = Mo = Ke. (soniya= मोदी= केजरीवाल) .
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पुनश्च, यदि आप FDI तथा उससे उत्पन्न होने वाले डॉलर संकट जिससे हमें भविष्य में पूरे खनिज भंडार को बेचने पर विवश होना पड़ेगा, को समाप्त करना चाहते हैं, तो कृपया अपने सांसद को SMS द्वारा आदेश भेजें। देखें: "#TCP see section-1.3 of rahulmehta.com / 301.htm". एक बार यदि TCP आ जाये तो हम भारत में FDI का वर्चस्व रोकने के लिए राजपत्र में आवश्यक कानून ड्राफ्ट प्रकाशित करा पाएंगे।