Pawan Jury BhilwaraRj
इस सड़क पर इस कदर कीचड़ बिछी है...
हर किसी का पाँव यहाँ घुटनों तक सना है ।
कैसे अरविन्द केजरीवाल FDI का विरोध करने वालो को जोकर साबित कर रहे है ?
वो ऐसा कर के MNCs को फायदा पहुंचा रहे है ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें भारी मिडिया कवरेज मिले ।
कल मैं एक कार्यकर्ता को रेल में FDI से होने वाले नुक्सान के बारे बता रहा था ।
मेरा विरोध FDI से पैदा होने वाले डॉलर संकट के सम्बन्ध में था , जो कि वास्तव में चिंतनीय पहलू है ।
बिना इस मसले को समझे कार्यकर्ता ने मुझे चिढ़ाना शुरू कर दिया और मुझसे कहा कि 'तुम भी केजरीवाल की तरह बेसिरपैर के तर्कों से रेल में FDI का विरोध कर रहे हो'
आखिर क्यों केजरीवाल काल्पनिक किराए के आधार पर जापानियो की आलोचना कर रहे है ?
ऐसा कर के वो FDI से होने वाले गंभीर और वास्तविक नुक्सान से कार्यकर्ताओं का ध्यान हटा रहे है ।
अरविन्द गांधी द्वारा 72000 रु के टिकेट का आकलन पूरी तरह से झूठ है और ये कोई मुद्दा ही नही है ।
सच्चाई यह है कि जापानी आसानी से 4000-5000 का टिकेट रख कर मोटा मुनाफा कमाने वाले है ।
केजरीवाल चाहते है कि डॉलर संकट से ध्यान हटाने के लिए 72000 रु के टिकेट का डर लोगो में डाला जाए ।
ऐसा करने से टिकेट दर का विरोध होगा और जब वास्तविक दर , जो कि 4000-5000 के बीच रहने वाली है, सामने आएगी तो जनता अपने आप को खुश महसूस करेगी ।
और इस प्रकार का माहौल बनाया जायेगा कि कुछ कमअक्ल और 'विकास' के विरोधी कार्यकर्ता फ़िज़ूल में FDI का विरोध कर रहे है ।
इस तरह वास्तविक नुकसान पर गंभीर चर्चा को धक्का पहुंचेगा ।
रेल में FDI के आने से जो देश को नुक्सान होने वाला है, उसके बिन्दु इस प्रकार है -
1. निर्यात शून्य क्षेत्र में निवेश होने से हमें जापानियो से एक डॉलर की भी कमाई नही होने वाली है ।
2. जापानी जो भी मुनाफा कमाएंगे उसके बदले में भारत सरकार को डॉलर में भुगतान करना होगा । मतलब जितना ही जापानी रुपये कमाएंगे उतना ही हम डॉलर गवाएंगे ।
3. जापानियो को स्टेशन, होटल, माल और सेवा क्षेत्र के मोनोपोली राइट्स होंगे और सभी से होने वाला मुनाफा जापानियो को डॉलर में देना होगा ।
4. इस ट्रेक पर चलने वाली हमारी स्वदेशी ट्रेनों जैसे शताब्दी, दुरंतो और राजधानी की कमर टूट जायेगी और ये ट्रेक बदहाल हो जायेंगे ।
यदि इस ट्रेक पर अपनी स्वदेशी ट्रेनों को बढ़ावा देने के कानूनों को पास करते है तो हम आसानी से हाई स्पीड ट्रेनों का नेटवर्क खड़ा कर सकते है ।
जमीन , पटरियां, बोगी, सर्विस आदि सभी कुछ हमारे पास स्वदेशी है , हमें सिर्फ इंजन आयात करने है,, जिसका सिर्फ एक बार डॉलर चुकाना होगा और हम पर डॉलर का भार नही पड़ेगा ।
लेकिन जापानियो के आने के बाद MNCs रेल मंत्री और अधिकारियों पर ऐसे कानूनों को पास करने के लिए दबाव बनायेंगे ताकि हमारी स्वदेशी ट्रेने उड़ जाए और उनको मोनोपोली मिल जाए ।
और उसके बाद आपके पास सिर्फ जापानी ही विकल्प बचेंगे । फिर किराए में वृद्धि, और वृद्धि, और मुनाफा, और भी ज्यादा मुनाफा, और ये सारा मुनाफा हमें डॉलर में चुकाना पड़ेगा ।
लेकिन यदि हम युद्ध स्तर पर अपनी ट्रेनों में सुधार करते है तो आसानी से सिर्फ इंजन इम्पोर्ट करके 160 km/घंटे की हाई स्पीड ट्रेनों के कई ट्रेक्स के इन्फ्रास्टक्चर डाले जा सकते है । हाई स्पीड ट्रेन मुंबई अहमदाबाद की दूरी 4 घंटे में तय कर सकती है, नॉनस्टॉप होने से समय में और भी कमी लाई जा सकती है ।
इस गंभीर विषय पर देश में चर्चा न हो पाए इसलिए अरविन्द गांधी जैसे बिकाऊ नेता देश को काल्पनिक किराए के नाम पर भ्रमित कर रहे है ।
- आरएसएस और बाबा रामदेव जैसे चूपा वादी तेल साबुन मिर्ची में स्वदेशी अपनाओ का स्वांग कर रहे है ।
- मौलाना मुलायम, माया मनु, ममता आपा, लालू चारा, नितिश ब्लोअर आदि से इस सम्बन्ध में उम्मीद करना भी दीवार पे सिर मारने के बराबर है ।
-मिडिया रेप स्केंडल, लॉर्ड्स विजय , आलू प्याज, मिर्ची जैसी शाश्वत और अन्य गैर जरूरी खबरे दिखाकर जनता का टाइम वेस्ट करने में व्यस्त है ।
- नमो FDI से 'विकास' की सुनामी लाने पर तुले हुए है, और मोदी भक्त देश उन्हें 5 साल के लिए लीज़ पर देकर बेसुध हो चुके है ।
- कोंग्रेस 45 सांसदों के भरोसे जैसे तैसे विपक्ष का दर्ज़ा पाने की उधेड़बुन मैं व्यस्त है ।
- अन्य हिन्दू वादी, गाय वादी और संस्कृति सभ्यता वादी कार्यकर्ता फेसबुक और वाट्स एप पर गायो को बचाने के एलान देने और हिन्दूओ को जगाने में व्यस्त है ।
ये सभी सयाने जानते है कि जब डॉलर पुनर्भरण की बारी आएगी तो इनमे से कुछ की हड्डियों की राख बन चुकी होगी, कुछ राजनीति से संन्यास ले चुके होंगे, कुछ अप्रासंगिक हो चुके होंगे, कुछ विदेश जाकर बस चुके होंगे और यदि फिर भी देना पड़ा तो फिर से देश के खनिजो की खाने, जमीन आदि इतना पड़ा है देश के पास बेचने के लिए , कुछ भी बेच देंगे । जैसे टुकड़ा टुकड़ा कर के 23 साल से बेचते आये है ।
समाधान :
1. सभी कार्यकर्ता नेता भक्ति, पार्टी भक्ति, संघठन भक्ति से विमुख होकर निष्पक्ष स्त्रोतों से FDI से होने वाले नुक्सान का आकलन करे, इस विषय को गंभीरता से समझे , तब इस बारे में अपनी राय स्थिर करे ।
- सभी नागरिको से निवेदन है कि अपने क्षेत्र के सांसद को रेल में FDI न देने का ऑर्डर SMS द्वारा भेजे ।
- आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील है कि अपने नेताजी से FDI से होने वाले डॉलर संकट पर अपनी राय व्यक्त करने को कहें ।
प्रजा अधीन राजा @ pk