Pawan Jury BhilwaraRj
"शर्म इन को मगर नही आती ..."
नौकरियां UNLIMITED...
पिछले 15 दिनों में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित तीन परीक्षाएं रद्द हो चुकी है :
- R- PMT
- RAS - PRE
- COMMERCE
लगभग दो वर्ष पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करके सहायक लोक अभियोजक (APP ) की परीक्षाए रद्द करके RPSC से राजस्थान न्यायिक परिक्षाये आयोजित करने की जिम्मेदारी छीन कर स्वयं ले ली थी ।
कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि 'क्यों नही RPSC को भंग कर दिया जाए' ?
मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले के चलते अब तक पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मी कान्त वाजपेयी और शिवराज सिंह चौहान के मुख्य सचिव एस के मिश्र समेत 450 गिरफ्तारियां हो चुकी है ।
1000 मेडिकल छात्रों के एडमिशन रद्द करने पड़े है, और घोटाले के 500 करोड़ के होने का अनुमान है ।
उमा भारती , संघ के दिग्गज नेता सुरेश सोनी और दिग्गी राजा पर भी आरोप लग रहे है, और शिवराज की पत्नी साधना की भूमिका भी संधिग्द है ।
जबकि शिवराज ने CBI जांच की मांग को खारिज कर दिया है ।
2011 में उत्तर प्रदेश लोक सभा की मुख्य परिक्षा का परिणाम आया तो छात्रों ने बवाल कर दिया।
प्रदर्शन हुए, गोलियां चली, सिर फूटे, बसे जली, गिरफ्तारियां हुयी और गुस्साए छात्रों ने लोक सेवा आयोग के दरवाजे पर लाल स्याही से 'यादव आयोग' लिख दिया ।
कारण ... ?
अन्य पिछड़ा वर्ग में 70% से ज्यादा यादव अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे ।
बवाल के बाद अखिलेश ने नयी नीति का आश्वासन दिया, लेकिन 2014 के अंतिम नतीजों (2011) ने छात्रों के भरोसे को तोड़ दिया ।
OBC श्रेणी में उत्तीर्ण 86 छात्रों में से 50 छात्र 'यादव' जाति के थे ।
OBC श्रेणी में से अपग्रेड होकर सामान्य श्रेणी में जाने वाले सभी छात्र भी 'संयोग' से यादव थे ।
अंक तालिकाओ के सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ कि यादव जाति के छात्रों को साक्षात्कार में दिए गए अंको का औसत 138 था , जबकि सामान्य श्रेणी के छात्रों का औसत 115 अंक , SC/ST को औसतन 105 और गैर यादव जाति के OBC छात्रों को 110 अंक दिए गए ।
*साक्षात्कार 200 अंको का था, नियमानुसार 140 अंक से अधिक देने पर साक्षात्कार मंडल को विशेष टिपण्णी करनी होती है ।
इस प्रकार यादव जाति के छात्रों को 138 से 140 अंक दिए गए । यहाँ तक की परीक्षा के टॉपर हिमांशु कुमार गुप्ता को भी साक्षात्कार में 105 अंक मिले ।
स्पष्ट है कि सभी राज्यों के लोक 'सेवा' आयोग राजनेतिक आकाओं के साथ मिलकर नौकरियों की दुकान चला रहे है और ऊपर से लेकर नीचे तक मुनाफे की बन्दर बाँट होती है ।
प्रतिभाशाली और निचले तबके के छात्र मेहनत करके भी प्रतिफल नही पा रहे और नाकारा, निकम्मी और धंधेबाजो की फ़ौज राजकीय सेवाओ में बढती जा रही है । हद तो यह है कि डॉक्टर, इंजिनियर और न्यायिक सेवाओ तक सभी पद इस बीमारी की चपेट में आ रहे है ।
एक आम धारणा समाज में यह बनती जा रही है कि सरकारी नौकरी साठं गाँठ और रुपयों के लेनदेन से हासिल की जा सकती है ।
इस धारणा को तोड़ कर भरोसा बहाल करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रशासन को प्रजा अधीन किया जाए ।
समाधान :
1. कुछ महत्व पूर्ण पदों को छोड़कर अन्य परीक्षाओं से साक्षात्कार की प्रक्रिया समाप्त हो ।
2. साक्षात्कार के अंक तुरंत दिए जाए, ताकि छात्र को अपने अंक पता रहे ।
3. साक्षात्कार मंडल का गठन साक्षात्कार दिवस पर ही औचक और क्रम रहित विधि से किया जाए ।
4. राज्य तथा केंद्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य प्रजा अधीन किये जाए ।
5. मानव संसाधन मंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री को प्रजा अधीन किया जाए ।
6. सीएम तथा पीएम को प्रजा अधीन किया जाए ।
7. नौकरिया देने में भ्रष्टाचार के आरोपियों का 'नार्को टेस्ट इन पब्लिक' का क़ानून लागू हो ।
- सभी नागरिको से निवेदन है कि अपने क्षेत्र के सांसद को इन कानूनों को पास करने के सम्बन्ध में SMS द्वारा ऑर्डर भेजे ।
प्रजा अधीन राजा @ pk