Pawan Jury BhilwaraRj

कैसे डॉ "नमो" देश को दवाइयों की हाई डोज़ दे रहे है परन्तु देश को उसके साइड इफेक्ट्स के बारे मे ं सूचित नही कर रहे है ?

चिकित्सा व्यवसाय में यह नैतिक मर्यादा है कि मरीज़ को यदि जोखिमपूर्ण दवाईयां दी जाती है तो उसे आगाह किया जाता है कि अमुक दवाई के अमुक साईड इफेक्ट हो सकते है ।

लेकिन राजनीति में नेतिक मर्यादाओ का शायद ही पालन किया जाता है ।

FDI की हाई डोज़ के साईड इफेक्ट्स :

1. कालान्तर* में विदेशी मुद्रा संकट
2. कालान्तर में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण

(* ये कालान्तर उपनिषद और पुराणों वाला कालान्तर नही है, 1000- 500 वर्ष नही, 5-10 साल वाला कालान्तर)

यह बात अनुभव सिद्ध है कि क़र्ज़ वह मेहमान है जो कि एक बार आकर जाने का नाम नही लेता ।

जितना ही हम FDI के जरिये डॉलर ले रहे है , इस डॉलर का अधिकाँश क्रूड ऑइल के आयात का बिल निगल लेता है । जबकि विदेशी कम्पनिया भारत में मुनाफा रुपयों में कमा रही है उनका भुगतान हमे डॉलर में करना होगा ।

और यही डॉलर में पुनर्भरण आगे चलकर हमारी अर्थव्यवस्था को तोड़ कर रख देगा । और तोड़ भी रहा है ।

पर फिर से FDI ( पढ़े क़र्ज़) ले आने से बात ढकी रह जाती है ।
और इस डॉलर को चुकाने के लिए भारत को या तो अपने मिनरल्स और राष्ट्रीय संपत्ति से हाथ धोना पड़ेगा या..

या.. वा .. कुछ नही है , मिनरल्स और सम्पत्तियो से हाथ धोना ही पड़ेगा क्योकि हमारे पास न देने के लिए सोना है न लड़ने के लिए हथियार ।

अब यदि आप अमेरिकी सेना को अमेरिका के हथियारों से ही धूल चटाने के मंसूबे बना रहे है तो बात अलग है ।

क्योकि रक्षा में FDI का यही मतलब है कि हम स्वदेशी हथियार नही बनाने जा रहे है । मतलब कभी भी नही बनाने जा रहे है ।

रक्षा में FDI को दुष्यंत कुमार की इन दो लाइनों से आसानी से समझा जा सकता है -

उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करे,
चाकू की पंसलीयो से गुजारिश तो देखिये ...!!!!!!

दूसरा गंभीर साईड इफेक्ट धर्मांतरण है ।

चूंकी पूरा विश्व आज दो सभ्यताओं का टकराव झेल रहा है ( इसाई और इस्लाम),
जहाँ भी MNCs प्रवेश करती है, वहां बड़े पैमाने पर धर्मानतरण शुरू हो जाते है ।
आप इतिहास उठा कर देख सकते है, आप जानकारी जुटाइये,

'संप्रभु दिवालियो' (sovereign defaultar ) पर गूगल करिये तो आप जानेंगे कि कितने देश इस 'विदेशी विकास' की बलि चढ़ चुके है ।

ये विनाश लेटिन अमेरिका से लेकर अफ्रीका, और अफ्रीका से लेकर मध्य पूर्व एशिया तक कई देशो में हो चुका है । साउथ कोरिया, इंडोनेशिया, फिलिपिन्स, ब्राज़ील, थाईलेंड आदि उन कई में से कुछ है ।

लेकिन चीन ने अपनी 'निर्यात आधारित पुनर्भरण निति' तथा UAE को भारी मात्रा में परमाणु हथियार देने की धमकी देकर खुद को बचा लिया । परन्तु हमारे पास इनमे से कोई सुरक्षा कवच नही है ।

तो ऐसे में जब हमें ये सूचना ज्यादा से ज्यादा नागरिको को पहुचानी चाहिए
तब नमोवादी और नमॉ अंधभक्त 'सब ठीक होगा' , 'कुछ दिन रुको', 'भगवान् (पढ़े मोदी जी) सब ठीक करेंगे' और B+ attitude टाइप के बयान चला रहे है ।

मतलब समझिये कि उनकी स्थिति उन बकरों के समान है जो कि बकरा ईद पर BEST OF LUCK सुन कर खुश हो रहे है तथा अन्य बकरों को भी 'सब ठीक होगा', 'भरोसा करो' आदि भुलावे दे रहे है । और इस सच से अनजान है कि FDI की छुरी से जिबह होने के बाद अच्छे दिन कभी नही आने वाले है ।

FDI के बारे में कुछ किवदंतियां :

( फुरसतियो और पेशेवर कुबुद्धिजिवियो {जो कि केवल भ्रम फैलाने की ही खा रहे है} द्वारा फैलाए गए भ्रम किवदंतिया कहाते है । अमूमन इनका कोई सिर पैर नही होता )

1. FDI ज़रूरी है क्योकि हमारे पास पैसा नही है ।

- झूठ है

: हम संपत्ति कर, विरासत कर लागू कर के तथा 80G समाप्त कर के अकल्पनीय धन जुटा सकते है । (जुटाने का मन हो तो )
वरना यदि आप शोपिंग करने के लिए यदि अपनी किडनी बेचना चाहे तो आपकी मर्जी है )

: इस से हमारे देश में तकनीक आएगी ।

- सफ़ेद झूठ है

- आज तक कभी किसी देश को FDI से तकनीक हासिल नही हुयी (ताइवान अपवाद )
। और रक्षा में तो सवाल ही नही तकनीक देने का ।

आप ठाकुर से उम्मीद कर रहे है कि मांगने पर वो अपने हाथ आरा मशीन से कटवा कर गब्बर को गिफ्ट दे देगा ।

- विदेशी कम्पनिया हथियारों में किल स्विच नही डालेगी ।

- खुशफहमी है ।

- आप मानने पर आये तो यह भी मान सकते है कि वो आपके लिए जो हथियार बनायेंगे उनमे किल स्विच नही डालेंगे, पर जो हथियार वो खुद के लिए बनायेंगे उनमे किल स्विच डाल कर उसका कोड आपको दे देंगे । हद हो गयी अंधभक्ति की।

- हकीकत यह है कि सभी कम्पनिया और यहाँ तक कि US मिलिट्री भी इस प्रकार का कोई आश्वासन नही देती, बल्कि लिखित में सूचित करती है कि यदि दिए गए हथियारों में ट्रोज़न है तो हमारी कोई जिम्मेदारी नही है ।

समाधान :

हमें चाहिए कि अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डरभेजे कि सेना को मज़बूत करने के लिए तथा बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियारों के उत्पादन के लिए:

जूरी सिस्टम, संपत्ति एवं विरासत कर, हथियार बंद नागरिक समाज की रचना, गणित एवं विज्ञान में सात्य प्रणाली तथा प्रजा अधीन पीएम, सीएम आदि क़ानून तत्काल पास किये जाए । ताकि भारत का इराकीकरण होने से बचाया जा सके ।

प्रजा अधीन राजा @ pk