Pawan Jury BhilwaraRj
आपको मालूम है हनुमान जी इतने सकसेज़ क्यों हुए ? 📍📍
कैसे वो पहाड़ उखाड़ कर ला पाए ?
( हांलाकि सुषेण और लछमण जी को कंधो पर उठा के ले जाते तो वजन भी कम रहता और पहाड़ भी डिस्टर्ब नही होता🎭 , लछमण को बूटी भी ज़ल्दी मिलती और भरत का तीर भी नही खाना पड़ता । पर श्री राम चन्द्र जी ने कहा था कि बूटी तो यहीं लगेगी , इसलिए .. 🌱🌱और प्रभु के लिए क्या कहें.. वो तो लीला कर रहे थे , और लीला तो अपरंपार ही होती है , उसका कोई ओर छोर नही होता ) 😎
कैसे उन्होंने लंका में आग लगा दी ( पर पूंछ में नही लगने दी )
तो वो ऐसा कैसे कर पाते थे ।
इस पर काफी सिर मग्जन करने से एक ही कारण समझ आता है , जिस कारण बालाजी की शक्तिया अपरिमित रूप से बढ़ गयी थी ।
और वो कारण था भक्ति ।😴😴😴 एक्चुली हनुमान जी ' भगत' आदमी थे । बस इसी से पूरा सुन्दर काण्ड कर डाला था उन्होंने ।
भक्ति में बहुत शक्ति होती है ।
ऐसे ही एक और केरेक्टर थे । विभीषण ।
विभीषण भी भगत आदमी थे । हनुमान जब लंका फूंकने गए थे, तभी उन्होंने ताड़ लिया था कि लंका से ये FDI लगाईं जा सकती है । 😆😆😆😆
विभीषण भी लंका के फुंकने के बाद निवेश के लिए बढ़िया टेरेटरी ढून्ढ रहे थे । तो सेटिंग बैठ गयी ।
भगतो में सेटिंग फटाफट हो जाती है । 👬👬
बाली भी एक ताक़तवर राजा था , पर बाली ने सोचा भी नही था कि सुग्रीव श्री राम से मित्रता की आड़ में इत्ती भयंकर FDI लगा रहा है , 👺जो कि उसे नज़र भी तीर खाने के बाद आने वाली थी । 😹😹😹😹😹
वेसे रावण के विनाश और लंका ध्वंस का मूल कारण भी FDI ही था । न वो परस्त्री धन पर नज़र डालता न उसका विनाश होता ।
महाभारत में भी कौरवों ने शकुनी नाम की लॉन्ग टर्म FDI लगा रखी थी । और इस एक FDI ने सारे कौरवों को हस्तिनापुर समेत सल्टा दिया । 🙈🙈🙈🙉🙉🙉
लब्बो लुआब यह कि जहाँ भी FDI लगती है अल्टीमेटली सूपड़े साफ़ हो जाते है । 🌍🌎🌏
पर भगत लोग इतने चक्कर में नही पड़ते, भगत लोगो का इंटरेस्ट FDI में नही होता , उनकी रुचि ये जानने में होती है कि FDI लगाईं किसने है ?
अगर 'प्रभु' ने लगाईं है तो FDI क्या FFDI से भी कोई दिक्कत नही है । प्रभु इच्छा प्रबल है । भगत जो ठहरे ।
(someone is asking 'wt the hell is FFDI'.. ? even we cd nt able to undrstand FDI... FD is enough ! 'may be fixed deposit' )
पर निर्मल बाबा का कहना है कि 'भगती' सही जगह इस्तेमाल करो, देश पर कृपा आनी चालू हो जायेगी ।
हर हर FDI घर घर FDI