Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
रेलवे के किराये में वृद्धि अनिवार्य एवं अपरिहार्य था। ईंधन की कीमते बढ़ती जा रही हैं, और रेलवे कर्मियों की तनख्वाह भी बढ़ रही है। साथ ही रेलवे के विस्तार हेतु भी पैसों की आवश्यकता है। अतः रेल भाड़े का बढ़ाया जाना ही एकमात्र विकल्प है- यह न तो स्थिर रह सकता है न ही इसे कम किया जा सकता है।
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यह दुःख का विषय है कि गरीबों के हित में अन्य निर्णय नही लिए जा रहे, जिनमे वैट, सेवा कर, उत्पादन शुल्क आदि को हटाना तथा इनकी जगह संपत्ति कर, ज्यूरी प्रणाली, डीडीएमआरसीएएम आदि को लागू करना मुख्य हैं। इसका कारण यह है कि कांग्रेस, भाजपा, आआपा आदि राजनीतिक दल उपर्युक्त बदलावों का विरोध करते हैं तथा कार्यकर्ता अंध- भक्तों की तरह उनका अनुसरण करते हैं।
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आआपा= एके रेलवे किराये में वृद्धि के मुद्दे को जोर- शोर से उछाल रहे हैं ताकि यह तथ्य छिपा रहे कि वे गरीबी को हटाने में सहायक डीडीएमआरसीएएम का विरोध कर रहे हैं। आआपा= एके= नमो= भाजपा= कांग्रेस, ये सभी डीडीएमआरसीएएम के विरोधी हैं, और यह इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि इनमे से किसी को भी गरीबों के मरने और जीने से कोई मतलब नही।