Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

बांग्लादेशी घुसपैठ पर भाजपा का 1996/ 1998 का घोषणापत्र क्या कहता है? 1996/ 1998 के घोषणापत्र में भाजपा नेताओं ने एक अर्थहीन वादा किया था कि वे बांग्लादेशियों को देश से निकालेंगे। कृपया प्रथम कमेंट के लिंक देखें।
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(लिंक अंग्रेजीमें है . यह हिंदी अनुवाद है)
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अवैध घुसपैठ
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कांग्रेस तथा संयुक्त मोर्चे की सरकारें अपने स्वार्थों के कारण इस समस्या से हमेशा दूर भागते आये हैं। बांग्लादेश से आनेवाले अवैध घुसपैठियों की संख्या आधिकारिक सूत्रों के अनुसार 1.7 करोड़ से भी ज्यादा पायी गयी है। इसका काफी बुरा प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था पर पड़ा है। इस सिलसिले को और अधिक दिनों तक जारी रखने की अनुमति नही दी जा सकती। हमारी सरकार निम्नलिखित कदम उठाएगी-
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1. अवैध घुसपैठियों को रोकने तथा उन्हें वापस भेजने के लिए अधिक कड़े कदम उठाना। सीमा की घेराबंदी जहाँ भी संभव हो तुरंत शुरु की जाएगी। सीमा की चौकसी बढ़ाई जाएगी।
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2. अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए आवश्यक कदम उठाना, तथा उनके नाम मतदाता सूची से हटाना।
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3. नागरिकों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर रखना।
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भाजपा भारत को अगली शताब्दी के शुरूआती दशकों में ही एक समृद्ध एवं ताकतवर राष्ट्र बनाने के लिए दूरदर्शी सोच तथा राजनीतिक इच्छा शक्ति रखती है। इसके लिए भारत का मजबूत तथा सुरक्षित होना अनिवार्य रूप से अपेक्षित है। हम इसके लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की स्थापना करेंगे, जो कि सुरक्षा सम्बन्धी तथा राजनीतिक एवं आर्थिक खतरों के लगातार विश्लेषण एवं सरकार को लगातार इन विषयों पर सलाह देगी।
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अब 1996 के घोषणापत्र की कुछ पंक्तियाँ देखें :
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"भाजपा बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या के समाधान हेतु प्रतिबद्ध है। घुसपैठियों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाये जायेंगे तथा उन्हें उनके देश वापस भेजा जायेगा।"
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मेरे पास 1991, 1994 आदि के घोषणापत्रों का लिंक उपलब्ध नही है। किन्तु मैने उस समय उनकी छपी हुई प्रतियां पढ़ी थीं। मुझे याद है कि इन घोषणापत्रों में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर लिखा था।
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मैं यह कहना चाहता हूँ कि--- बांग्लादेशियों को देश से निकलने का मुद्दा भाजपा नेताओं के लिए राम जन्मभूमि देवालय जैसा ही एक दूसरा मुद्दा बन गया है। ये एक और ऐस ढोल है जिसे कि वे चुनाव आने पर बजते हैं और जिस दिन मतदान समाप्त होत है उसी दिन शाम के 6 बजते ही भूल जाते हैं। अतः कृपया व्यर्थ की उम्मीद न करें।
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फिलहाल भारत के पास उपलब्ध सभी विकल्पों में से नमो सबसे कम बुरे नेता हैं। किन्तु बाकि भाजपा में जेटली, शौरी, यशवंत आदि अनेकों ठग मौजूद हैं। अतः कृपया व्यर्थ की यह उम्मीद न पालें कि भाजपा नेता अगले पांच वर्षों में यहाँ तक कि 1 लाख बांग्लादेशियों को भी देश से निकालने जा रही है।
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वस्तुतः मीडिया बिकी हुई है। यही कारण है कि एक भी बिके हुए मीडिया कर्मी अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 1996 में तथा पुनः 1998 में बांग्लादेशी मुद्दे पर दिये गए झूठे वादे के आधार पर नमो का विरोध नही कर रहा।
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इसके लिए मैं यह समाधान प्रस्तावित कर रहा हूँ कि कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे ऐसे कानून- ड्राफ्टों पर ध्यान केंद्रित करें जिनके द्वारा बांग्लादेशियों की पहचान साबित कर के उन्हें भारतीय मुस्लिमों से अलग किया जा सके तथा देश से निकला जा सके। इसके लिए कृपया rahulmehta . com \ 301.htm का अध्याय 32 तथा अध्याय 33 देखें।