Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

विकिपीडिया पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बांग्लादेश की जनसँख्या 1960 ई. में पाकिस्तान की तुलना में 11% अधिक थी जो कि अब 18% कम हो गयी है। दूसरी तरह से कहें तो ये आंकड़े दर्शाते हैं कि 4.5 करोड़ या उससे भी अधिक बांग्लादेशी भारत में रह रहे हैं। इनमें से कितने शरणार्थी हैं और कितने घुसपैठिये इसका पता लगाने की आवश्यकता है। समाधान ---- कृपया देखें: rahulmehta . com/301.htm का अध्याय 32, 33.

भाजपा, कांग्रेस, आप, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद् आदि के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं से बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या को नजरअंदाज कर नारेबाजी, टोपी पहनना, वोट बटोरने आदि पर ध्यान केंद्रित करने को कह रखा है। भारत स्वाभिमान संघ के कार्यकर्त्ता भी नारेबाजी तथा सदस्यता अभियान में अत्यंत व्यस्त हैं। अन्ना ममता बेगम के लिए प्रचार करने में व्यस्त हैं, ये वही ममता बेगम हैं जो पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश के साथ मिलाने के लिए काम कर रही हैं। अतः सिर्फ हम रिकॉलिस्ट हीं इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।

"Hard Worker" नाम के एक रिकॉलिस्ट ने पाकिस्तान- बांग्लादेश की जनसँख्या सम्बन्धी ये आंकड़े मुझे दिए। मैंने विकिपीडिया पर भी देखा। संक्षेप में आंकड़े इस प्रकार हैं:

(जनसँख्या करोड़ में दी गयी है।
जनसँख्या P= पाकिस्तान की जनसँख्या
जनसँख्या B= बांग्लादेश की जनसँख्या
P/B = पाकिस्तान की जनसँख्या बनाम बांग्लादेश की जनसँख्या)

वर्ष , जनसँख्या Pak , जनसँख्या Bang , P/B
1950 , 03.7 , 04.1 , Pak से 10% अधिक
1960 , 04.5 , 05.0 , Pak से 11% अधिक
1975 , 06.8 , 07.1 , Pak से 04% अधिक
1980 , 08.0 , 08.7 , Pak से 08% अधिक
1990 , 11.1 , 10.6 , Pak से 05% कम !!!
2000 , 14.4 , 12.4 , Pak से 14% कम
2011 , 17.3 , 14.2 , Pak से 18% कम

बावजूद इसके कि उस समय की तुलना में बांग्लादेश में जन्मदर तो उच्च हो चुकी है, मृत्यु दर समान है, बांग्लादेश की जनसँख्या पाकिस्तान से 18% कम हैं |

यदि बांग्लादेश की जनसँख्या पाकिस्तान से 8% ज्यादा होती तो यह 18.6 करोड़ होती। बांग्लादेश की विकासदर पकिस्तान से ज्यादा है, अतः आज बांग्लादेश की जनसँख्या पाकिस्तान से 12% अधिक तो होनी हीं चाहिए थी, अर्थात 19 करोड़।

इस प्रकार लगभग 5 करोड़ बांग्लादेशी बांग्लादेश से गायब हैं। क्या ये सभी अमेरिका चले गए? अथवा ये सभी भारत चले आये? आप के नेता ये पूछते फिरते हैं कि "क्या आपके पास कोई सबूत है कि बांग्लादेशी भारत ही आये हैं, अमेरिका या स्विट्ज़रलैंड नही गए?"

भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद्,कांग्रेस, आप, आदि जैसे राजनीतिक दलों के पास करोड़ों रूपये का काला और सफ़ेद धन है। अतः ये इस काम के लिए हजारों विश्लेषकों को नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन किसी भी नेता, वेतनभोगी विश्लेषक, या अवेतनभोगी कार्यकर्त्ता के पास इसके लिए समय नही है कि इस पर आंकड़ा संग्रह करके उसे उपर्युक्त तरीके से टेबल बना कर दर्शा सकें, जिससे कि एक अँधा व्यक्ति भी समझ सके कि 5 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी भारत में ही हैं। इनमें से कुछ तो शरणार्थी हैं, जिनका स्वागत है। किन्तु इनमे से अधिकांश घुसपैठिये हैं जिनका पता लगाकर तथा प्रमाण ढूंढकर उन्हें कारागार में डाल देना चाहिए तथा देश से निकाल देना चाहिए।

परन्तु कोई भी नेता यह सब करने नही जा रहा। कांग्रेस/ आप/ सपा/ राजद/ नीतीश आदि खुले तौर पर बांग्लादेशियों का पक्ष लेते हैं, तथा भाजपा नेता इस समस्या का समाधान करने में सक्षम नही हैं। लगभग 5- 10 भाजपा नेताओं को छोड़कर अधिकांश भाजपा नेता बांग्लादेशी-समर्थक हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान हम कार्यकर्ताओं को बिना चुनाव प्रचार में व्यस्त नेताओं को परेशान किये स्वयं ही करना होगा। और यदि कुछ ईमानदार भाजपा नेता सत्ता में आते भी हैं तो भी उन्हें राज्यसभा या यहाँ तक कि लोकसभा में भी आगामी कई वर्षों तक बहुमत नही मिलनेवाला। आप/ कांग्रेस/ भाजपा नेताओं ने इन आंकड़ो को समाचारपत्रों तक में प्रकाशित नही कराया, इससे इस मुद्दे पर इनकी अरूचि तथा कमजोरी दिखती है।

अतः हम कार्यकर्त्ता बिना नेताओं को परेशान किये इस समस्या का हल कैसे कर सकते हैं? इसका समाधान मैंने अध्याय 32 तथा अध्याय 33 में दिया है। देखें: rahulmehta . com/301.htm