Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
(translation done by a friend of mine)
1. AK- 420 की कारस्तानियों की वजह से आप तथा आम आदमी शब्द गाली की तरह बन गये हैं। यहाँ तक कि क्रान्तिकारी जैसा पावन शब्द भी अपमानजनक लगने लगा है।
हाल में AK ने शहीद भगत सिंह के नाम का दुरूपयोग करते हुए जो नाटक रचा वह सचमुच शर्मनाक है। AK ने बिकाऊ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को यह झूठ बोलने के लिए खरीदा कि "भारत सरकार, कांग्रेस, भाजपा आदि भगत सिंह की कीमत नही जानते।" और जब बिकाऊ पुण्य प्रसून वाजपेयी ने यह झूठ बोला तो बजाये इसपर आपत्ति जताने के AK बड़े आराम से इसपर सहमत हो गये। तथा बोले "हम भगत सिंह का महत्त्व पहचानते हैं।"
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने भगत सिंह को सम्मान देते हुए 1000 रूपये के सिक्के तथा 5 रूपये की टिकट उनकी तस्वीर के साथ जारी किये। तथा कई अन्य तरीकों से भी उन्हें महत्त्व दिया है। भाजपा/ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के भी कई कार्यक्रम 23 मार्च को भगत सिंह की शहादत की याद में आयोजित किये जाते हैं। संक्षेप में कहें तो बिकाऊ पुण्य प्रसून वाजपेयी तथा AK ने मिलकर यह झूठी पटकथा रची कि "भाजपा भगत सिंह का महत्व नहीं जानती, तथा सिर्फ आप ही ऐसी पार्टी है जो भगत सिंह का महत्व जानती है।"
बिकाऊ पुण्य प्रसून वाजपेयी को इस झूठ के लिए जिंदल द्वारा 2 करोड़ रूपये अदा किये गए।
AK के अनुयायी/ प्रशंसक अब भी बड़ी निर्लज्जता से उनके बचाव में कहते फिर रहे हैं कि "भाजपा व कांग्रेस भी तो साक्षात्कर्ता को खरीद कर झूठ बुलवाते हैं, फिर यदि हम ऐसा करके जनता को मूर्ख बनाते हैं तो गलत क्या है?" अच्छी बात है, यदि आप लोग भी भाजपा व कांग्रेस नेताओं को मूर्ख बनाओ तो हमें कोई आपत्ति नही। लेकिन आप तो मतदाताओं को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरह से कहें तो आप एक ऐसे चोर हैं जो कहता है- " देखो, A तथा B ने तुम्हें लूटा, फिर यदि मैं भी लूटता हूँ तो गलत क्या है?" अब आप रॉबिनहुड तो हो नही जो कि नाजायज कमाई वाले धनी व्यक्तियों को लूट कर उस धन से गरीबों की मदद करता हो। बल्कि आप तो एक और ऐसे नाजायज कमाई वाले धनी व्यक्ति हो जो अपने लाभ के लिए गरीबों को लूटता है।
आपका यह तर्क कि "सभी तो मीडिया को तथा साक्षात्कर्ता को खरीद रहे हैं", भी गलत है। हम, राइट टू रिकॉल ग्रुप के सदस्यों ने कभी जनता को मूर्ख नही बनाया। हमने हमेशा स्वयं की मेहनत की कमाई के पैसे से और औपचारिक प्रक्रिया के तहत पैसे चुकाकर समाचारपत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराये हैं, न कि कभी भी पत्रकारों आदि को खरीदा है। हमने कई कानून ड्राफ्ट भी बनाये हैं। किन्तु उनके प्रचार के लिए भगत सिंह आदि महापुरुषों की तस्वीरों का दुरूपयोग नही किया। पिछले 2 सालों में मैंने जो वीडियो बनाये हैं, उन्हें आप देख सकते हैं। उनमें आपको किसी भी शहीद की कोई तस्वीर नही दिखेगी। हम अपने प्रचार के लिए उनके नाम का उपयोग/ दुरूपयोग नही कर सकते।
अतः आम आदमी पार्टी से अनुरोध है कि कृपया पैसों के बल पर पत्रकारों को खरीद कर उनसे झूठ का व्यापार कराना बंद करें।
========================
2. मतदान के दिन हीं IPL7 के मैच का भी आयोजन होने की स्थिति में राजनीति में अल्प रुचि रखने वाले युवा मतदान बूथ पर नहीं जायेंगे। फलस्वरूप मतदान दर में काफी कमी आएगी।
इसके लिए मैं यह समाधान प्रस्तावित करता हूँ कि हम मतदाताओ को चुनाव आयोग को यह आदेश देना चाहिए कि वे बीसीसीआई प्रमुख को आदेश देकर IPL मैच की तिथि 1 महीने के लिए आगे बढ़वा दें। और यदि बीसीसीआई प्रमुख ऐसा करने से मना करते हैं तो उन्हें कारागार की सजा होनी चाहिए। चुनाव आयोग के पास यह विशेषाधिकार है कि वह क्रिकेट मैच को इस कारण से स्थगित करा सकता है कि इससे जनता के बीच तनाव होगा तथा मतदान प्रभावित होगा। साथ हीं चुनाव आयोग के इस निर्णय के खिलाफ अदालत में याचिका भी चुनाव संपन्न होने के बाद हीं दी जा सकती है। उदाहरण के लिए चुनाव आयोग ने 17 मई तक एक्जिट पोल के नतीजों को प्रकाशित करने पर रोक लगाया है। इसी प्रकार चुनाव आयोग IPL मैचों पर भी 17 मई तक रोक लगा सकता है।
यदि आप चाहते हैं कि मतदान % ज्यादा से ज्यादा हो, तो कृपया इस पोस्ट को शेयर करें।
=============================
3. अरविन्द केजरीवाल, मीडिया, अन्ना आदि के विरूद्ध मैं जो भी दावे करता हूँ, यदि आपमें से किसी भी व्यक्ति को उसका प्रमाण चाहिए तो कृपया RTI (सूचना का अधिकार) के तहत एक आवेदन मेरे घर के पते पर भेजें। मेरे घर का पता आप मेरे फेसबुक प्रोफाइल से प्राप्त कर सकते हैं। मैं आपको सारे प्रमाण भेज दूंगा। ये सभी साक्ष्य कुल 22410 पृष्ठों में हैं।
कृपया ध्यान रहे कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आवेदक को सूचना प्राप्त करनेके लिए प्रति पृष्ठ 2 रूपये चुकाने होते हैं। अतः कृपया आवेदन के साथ हीं Rs 44820का एक डिमांड ड्राफ्ट जो कि 'राहुल चिमनभाई मेहता' के पक्ष में बना हो, संलग्न करना न भूलें।
आपकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए ये प्रमाण एक अपेक्षाकृत छोटे पैकेज में भी उपलब्ध कराये जा सकते हैं, जिसमें कुल 1025 पृष्ठ हैं। इसके लिए कृपया 2050 रूपये का डिमांड ड्राफ्ट आवेदन के साथ संलग्न करें।
ध्यातव्य है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना या साक्ष्यों का PDF के रूप में या email द्वारा उपलब्ध कराये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि आप इन पृष्ठों को स्कैन करना चाहें तो स्वयं कर सकते हैं। किन्तु यदि आप स्कैन किये हुए पृष्ठ चाहते हैं तो इसके लिए आपको 10 रूपये प्रति पृष्ठ अलग से देना होगा।
साक्ष्य अधिनियम के अनुसार भी जो व्यक्ति साक्ष्य चाहता है उसे ही उसका लागत खर्च वहन करना होता है।
इसका एक और तरीका भी है जिसके द्वारा आपका खर्च कम से कम आएगा। इसके लिए आपको मेरे खिलाफ मानहानि का एक मुक़दमा दायर करना होगा। और तब मैं साक्ष्यों की एक प्रति अदालत को मुफ्त में उपलब्ध कराऊंगा। फिर आप भी उसकी प्रतियां अदालत द्वारा तय मूल्य पर सीधे अदालत से हीं प्राप्त कर सकते हैं।