> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-03-29

Pawan Jury BhilwaraRj

संविधान में जो भी बात लिखी गई है, उसका सही अर्थ करने की शक्ति सिर्फ एक आदमी के पास होती है — सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश !!!
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उदाहरण के लिए जस्टिस वर्मा के घर पर नोट मिलने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट जज संजीव खन्ना ने उसका ट्रांसफर करके मामला रफ़ा दफ़ा कर दिया गया। और इससे न तो लोकतंत्र ख़तरे में आया न ही संविधान !!
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संविधान एक किताब का नाम है। और उसमें लिखी इबारत का अर्थ सिर्फ़ वही माना जाता है, जो सुप्रीम कोर्ट का प्रधान जज यानी संजीव खन्ना कहता है।
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उदाहरण के लिए मोदी साहेब ने राष्ट्रीय न्यायिक आयोग लोकसभा से पास किया, राज्यसभा से पास किया और फिर देश की ज्यादातर विधानसभाओं से भी पास कर दिया। फिर उसे राष्ट्रपति से भी साइन कराया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे असंवैधानिक कहकर फाड़ के फेंक दिया।
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तो जब कोई कहता है कि-
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(1) देश संविधान के अनुसार चलेगा, तो असल में वह कहता है कि, देश संजीव खन्ना के हिसाब से चलेगा।
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(2) संविधान का पालन करो वाक्य का आशय होता है कि, संजीव खन्ना की बात का पालन करो।
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(3) संविधान खतरे में है का मतलब है कि, संजीव खन्ना की बात नहीं मानी तो संविधान खतरे में आ जाएगा।
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(4) संविधान महान है, के मायने है कि, संजीव खन्ना महान है।
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सार यह है कि, जब आप जानना चाहते है कि संविधान क्या कहता है, तो असल में आप यह जानना चाह रहे होते है कि संजीव खन्ना क्या कह रहा है !!! क्योंकि संविधान का अर्थ जो आप कर रहे है उसकी कोई लीगल वैल्यू नहीं है। वैल्यू उसी अर्थ की है, जो संजीव खन्ना बतायेगा।
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कल संजीव खन्ना की जगह राजेश खन्ना इस कुर्सी पर बैठेगा, तो संविधान का वही अर्थ रहेगा जो राजेश खन्ना बताएगा। क्योंकि, किताब की तरह कुर्सी भी कुछ नहीं बोलती। बोलता वही आदमी है, जो उस कुर्सी पर बैठता है।
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समाधान : #JuryCourt
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राष्ट्रीय जूरी कोर्ट क़ानून गैजेट में छापें :
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(1) ताकि जजों की चोटी नागरिकों के हाथ में रहे।
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(2) ताकि संविधान की व्याख्या का अंतिम अधिकार नागरिकों के बहुमत के पास रहे।
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