Pawan Jury BhilwaraRj
लेंड माइंस -3
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छोटे उम्मीदवारों को उड़ाने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको द्वारा बिछायी गयी लेंड माइंस – छोटी पार्टियों को स्थायी चुनाव चिन्ह न देने का क़ानून।
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(1) उन्होंने क़ानून बनाया कि, पार्टियाँ दो तरह की होंगी
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(a) मान्यता प्राप्त पार्टियाँ एवं
(b) अमान्यता प्राप्त पार्टियाँ
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(2) फिर उन्होंने दूसरा क़ानून छापा कि, जिस पार्टी का कोई सांसद या विधायक जीत जाएगा उसे ही मान्यता प्राप्त पार्टी का टेग मिलेगा।
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(3) फिर उन्होंने छापा कि हम सिर्फ मान्यता प्राप्त पार्टी को ही स्थायी चुनाव चिन्ह देंगे, और छोटी पार्टियों को हर चुनाव में अस्थायी चिन्ह के लिए एप्लाई करना होगा। (मतलब उनका चिन्ह बदलता रहेगा)
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(4) फिर उन्होंने छापा कि -- मतपत्र / ईवीएम पर पार्टियों के नाम नहीं लिखे जायेंगे। मतपत्र पर सिर्फ उम्मीदवार का नाम एवं पार्टी का चुनाव चिन्ह आएगा !!
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नतीजा : बड़ी पार्टियाँ पूरे साल अपने सिम्बल का प्रचार करती रहती है। पोस्टर में, बेनर में, होर्डिंग में, लेटर पेड पर, झंडो पर, विज्ञापनों में, सब जगह वे अपने चिन्ह को छापते रहते है। मतलब प्रत्येक मतदाता को यह पहले से ही पता रहता है कि बीजेपी का चिन्ह फूल, बसपा का हाथी और कोंग्रेस का निशान हाथ है।
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किन्तु छोटी पार्टी को एवं उनके प्रत्याशी को पता नहीं है कि उसे कौनसा चिन्ह मिलने वाला है। अत: वह अपने चिन्ह का प्रचार नहीं कर सकते। उन्हें चिन्ह मतदान के 10 दिन पहले दिया जाता है। चिन्ह मिलने के बाद प्रचार सामग्री आदि छपवाने में 2-3 दिन बर्बाद हो जाते है, और 7 दिन बचते है। और मतदान के 1 दिन पहले चुनाव प्रचार रोक दिया जाता है।
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मतलब हफ्ते से ज्यादा समय नहीं मिल पाता। और चूंकि आपको चिन्ह अभी मिला है अत: इसी हफ्ते में आपको पूरे लोकसभा क्षेत्र (मतदाता संख्या 25 लाख) में चिन्ह पहुँचाना है !!! प्रत्याशी काफी कम लोगो तक पहुँच पाता है, और उसे कम वोट मिलते है।
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समाधान – छोटी पार्टियों को भी स्थायी सिम्बल जारी किये जाने चाहिए।
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#PrefVotingSys
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#VoteVapsiPassbook
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