Pawan Jury BhilwaraRj
धारा 370 के निरसन को 3 साल हो चुके है। वहाँ अब तक चुनाव नहीं हुए है। असामान्य हालात हवाला देकर इतनी लंबी अवधि तक चुनावों को निलंबित नही किया जा सकता।
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जब तक चुनाव नहीं होंगे तब तक हालात सामान्य नहीं होंगे। और यदि आप चुनाव टालेंगे तो हालात और भी बिगड़ते जाएँगे। और फिर आप हालात सामान्य नहीं है बोलकर चुनाव टालते जाएँगे।
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तो आप इसे कब तक टालेंगे - 3 साल, 4 साल, 5, 7, 10 साल !! कब तक। क्योंकि जब तक चुनाव नही होंगे तब तक जन जीवन सामान्य नहीं होगा।
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मुझसे जब यह पूछा जाता है कि — मोदी साहेब के धारा 370 के फ़ैसले पर आपका क्या कहना है, तो मेरा जवाब होता है — कश्मीर में लिया गया फ़ैसला अभी प्रक्रिया धीन है। इसे पूरा हुआ तब माना जाएगा जब वहाँ पर चुनाव होंगे और चुनी हुई सरकार काम करने लगेगी।
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अभी यह काम आधा ही हुआ है, पूरा नहीं। क्योंकि वहाँ के लोग धारा 370 हटाए जाने के एवज़ में अपने वोटिंग राइट्स खो चुके है !!
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चुनाव प्रक्रियाएँ हुकूमत के ख़िलाफ़ बंदूक़ उठा लेने के फ़ैसले के नैतिक आधार को कमजोर कर देती है, और सशस्त्र विरोध को समुदाय का समर्थन नहीं मिल पाता। यदि भारत के शेष राज्यों में भी चुनाव ख़त्म कर दिए जाए तो काफ़ी लोग कोई न कोई हवाला देकर बंदूक़ उठाना शुरू कर देंगे और उन्हें समर्थन भी मिलने लगेगा।
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दूसरे शब्दों में, जाया तौर पर लंबे समय तक चुनाव टालकर हम वहाँ पर मिलीटेंसी के पनपने की एकदम नयी ज़मीन तैयार कर रहे है। मोदी साहेब पर ये ज़िम्मेदारी बनती है कि अपने कार्यकाल के भीतर वहाँ पर चुनाव करवाकर अपने आधे काम को पूरा करे।
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चुनाव कराने से शुरुआती चरण में कुछ डिस्टर्बेंस सामने आ सकता है। किंतु चुनाव नहीं करवाने से जो डिस्टबेंस आएगा, वह ज़्यादा हानिकर होगा।
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