Pawan Jury BhilwaraRj
Jury Court:
नीचे उत्तरप्रदेश चुनाव में 3 विधानसभा के 3 उम्मीदवारों को प्राप्त मतों की जानकारी है। जिसमे हम सबसे कम वोट पाने वाली पार्टियों की तुलना देखते हैं।
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1) विधानसभा क्षेत्र वाराणसी दक्षिण
राइट टू रिकॉल पार्टी :-149 (0.08%)
आम आदमी पार्टी :- 922 (0.47%)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:- 2166(1.11%)
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2) विधानसभा क्षेत्र मेहनौन
राइट टू रिकॉल पार्टी :- 551(0.26%)
आम आदमी पार्टी :- 583(0.27%)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:- 5499(2.56%)
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3) विधानसभा क्षेत्र फामफाउ
राइट टू रिकॉल पार्टी :- 307(0.15%)
आम आदमी पार्टी :- 465 (0.22%)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:-2319(1.13%)
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ये तीन यादृच्छिक रूप से चयनित विधानसभाओ का अवलोकन हैं।
इसमे आप देख रहे है कि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी को भी ज्यादा वोट नहीं मिले हैं, जबकि ये पार्टियां पेड मीडिया पार्टियां हैं, इनके पास पैसा का समंदर है और भयंकर प्रचार तंत्र व अनुभव भी हैं।
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जबकि राइट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारो के सामने कई चुनोतियाँ रहती हैं।
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1. राइट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवार सीमित संसाधनों के साथ चुनाव लड़ती है,ये चुनाव प्रचार में सिर्फ 10 से 14 हजार तक खर्च कर पाते हैं।
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2. राइट टू रिकॉल पार्टी आइडेंटिटी पॉलिटिक्स नहीं खेलती है अर्थात धर्म, जाति, क्षेत्र, लिंग, व्यवसाय, आदि के आधार पर वोट नहीं मांगते हैं, हमारा सिर्फ यह है कि यह ड्राफ्ट है अच्छा लगे तो प्रचार करो व ठीक लगे तो वोट दो, बस .. इसके अलावा कुछ नहीं।
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3. राइट टू रिकॉल पार्टी पेड मीडिया के खिलाफ कार्य करती हैं तो RRP के उम्मीदवारों को पेड मीडिया का सहयोग नहीं मिलता है और न ही हम पेड मीडिया के सहयोग की अपेक्षा करते हैं।
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4. राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट आम आदमी के लिये पढ़ने में बोरिंग है ज्यादातर लोग पढ़ने व समझने की तकलीफ नहीं लेना चाहते हैं,और हमारे पास ड्राफ्ट के अलावा कोई मसाला नहीं है|
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हमारे मानने में राइट टू रिकॉल पार्टी के उम्मीदवारों को मिले वोटों का वास्तविक मूल्य उनके 100 गुणे के बराबर हैं, यदि आपको एक वोट भी मिला है तो इसका मतलब हैं कि आपने एक व्यक्ति को तो इन कानून ड्राफ्ट के महत्व से परिचित करा दिया।
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नोट:- भारत में फ्लैट वोटिंग सिस्टम होने के कारण हमारा काम बेहद मुश्किल हो जाता हैं, क्योंकि वोटर उसी को वोट देते हैं जो जीतने की स्थिति में हो, वरना वे वोट खराब करना नहीं चाहते है इसलिए छोटी पार्टियों को ज्यादा वोट नहीं मिलते हैं। जब आप आइडेंटिटी पॉलिटिक्स नहीं करते है तो आपके पास एक ही विकल्प रहता है वोटर को कॉन्विस करो कि इन ड्राफ्ट के अलावा दूसरा कोई सॉल्यूशन नहीं है और यह बेहद मुश्किल और टाइम खपाऊँ काम है।
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