> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-04-28

Pawan Jury BhilwaraRj

Sandeep Singh:

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अमरीका का लोकडाउन भारत के लोकडाउन में अंतर-----
मीडियाकर्मियों और सोनिया-मोदी-केजरीवाल और इनके कार्यकर्ताओं ने अमेरिका और भारत के लॉकडाउन के अंतर के बारे में बहुत सी जानकारियाँ छुपाएँ रखी। ये रहे कुछ अंतर। ये रहे कुछ बिंदु जो वे छिपा रहे हैं।
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(1) अमेरिका में कोई जबरदस्ती चिकित्सा नहीं की गई।
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(1.01) अमेरिका में किसी भी तरह की जबरदस्ती टेस्टिंग नहीं की गई. अगर कोई नागरिक टेस्टिंग के लिए मना करता है तो उसे घर में रहने का ऑर्डर दिया गया. और अगर वह उस आर्डर को नहीं मानता तो उस पर कानूनी कार्रवाई की गई. लेकिन कोई भी जबरदस्ती की टेस्टिंग नहीं हुई। जबकि भारत में सारी पार्टियां वह सोनिया गांधी हो नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल कांग्रेस rss. सबने जबरदस्ती टेस्टिंग रखी।
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(1.02) अमेरिका में किसी भी तरह का अस्पताल में जाकर इलाज कराना कानूनी तरीके से बाध्य नहीं था. अगर उसे corona पॉजिटिव पाया जाता है तो वह या तो हॉस्पिटल में जा सकता है या तो घर पर रह सकता है। पर भारत में कानून छापे गए हैं उसमें या तो मरीज को खुद उठकर अस्पताल जाना होगा और या फिर पुलिस उसे खींचकर लेकर जाएगी. या फिर निजी अस्पतालों में उसका इलाज होगा जहां उसे ₹100000 देना पड़ सकता है।
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(1.03) एक बार मरीज अस्पताल में पहुंच गया तो अमेरिका में उस पर कोई जबरदस्ती औषधि नहीं दी गई जबकि भारत में पुलिसके द्वारा जबरदस्ती मरीजों को दवाई लेने के लिए बाध्य किया गया। और मरीज के खिलाफ केस फाइल किया जा सकता है अगर उसने दी गई दवाई को लेने से इनकार किया। हाइड्रो क्लोरो क्वीन जो पेशेंट किसी भी तरह का करोना के लक्षण नहीं दिखा रहे थे उसे भी जबरदस्ती दी गई !!!
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(1.04) अमरीका में शव परीवारजनो को वापिस किये गए । और उन्हें पोस्टमॉर्टेम कराने की छूट थी। लेकिन भारत में सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने कानून बनाये की कोरोना मृत व्यक्ति का शव परीवारजनो को न दिया जाय। और पोस्टमॉर्टेम भी नहीं होगा।
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(2) भारत के तुलना में अमेरिका में लॉक डाउन नहीं के बराबर था।
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(2.01) लॉक डाउन के सारे दिनों में शहर की मेट्रो चालू थी और शहर के अंदर की बस भी चालू थी। अमेरिका की मेट्रो ट्रेन मात्र 1 दिन के लिए बंद थी वह भी रखरखाव इत्यादि के लिए उस दिन भी शहर के अंदर की सारी बसें चालू थी।
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(2.02) शहर के अंदर की सारी बसें और ट्रेनें चालू थी पर बारम्बारता कम थी।
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(2.03) अमेरिका के अंदर की सारी फ्लाइट है चालू थी यानी आप हवाई जहाज से पूरे अमेरिका में कहीं भी आ जा सकते थे।
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(2.04) निजी कार पर कोई भी रोक-टोक नहीं थी पर उसमें 3 लोग से ज्यादा नहीं आ जा सकते थे पर अगर वह एक घर की कार है यानी उस में बैठने वाले सारे सदस्य एक ही परिवार के हैं तो अधिक लोग भी जा सकते थे।
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(2.05) आगे, अमेरिका में होटल्स खुले हुए थे। और सभी प्राइवेट टैक्सियां, साधारण टैक्सियां, उबेर इत्यादि, सभी दिन चालू थीं। जबकि भारत मे लगभग सभी होटल्स भी बंद थे और सभी टैक्सियां भी बंद थीं!!!
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(2.06) अमेरिका में mask पहनने की कोई जबरदस्ती नहीं थी जहां पर सोशल डिस्टेंसिंग रख पाना कठिन हो जाता है वहीं पर मास्क पहनने की जबरदस्ती की गई थी तात्पर्य किसी भी प्रकार के पार्क या सड़क पर चलने के लिए या गलियों में आपको mask की आवश्यकता नहीं थी।
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(2.07) अमेरिका में ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया गया था कि किसी भी प्रकार के आपको आपको अपने मोबाइल में इंस्टॉल करना है और उसी के द्वारा आप फ्लाइट या अन्य तरह की यात्रा कर सकते हैं। भारत में आरोग्य सेतु को आवश्यक सरकार कानूनी तौर से बना रही है।
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(2.08) आवश्यक सेवाएं जैसे खाना शराब दवाए गाड़ियों की मरम्मत और हर तरह की मरम्मत तो एक भी दिन के लिए बंद नहीं किया गया था आवश्यक दुकानों के बाहर शुरुआती दिनों में कुछ लाइने लगी थी पर धीरे-धीरे वह भी समाप्त हो गई। दुकानों के अंदर ज्यादा ग्राहकों को एक समय में आने से रोका गया था यह सत्य है।
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(2.09) होटलों से होम डिलीवरी 1 दिन के लिए भी बंद नहीं थी आप कभी भी होम डिलीवरी मंगा सकते थे। बहुत सारे होटल जो बंद थे उसका कारण यह था कि ग्राहकों की कमी जिसकी वजह से उन्हें बंद रखना पड़ रहा था।
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(2.10) जिस प्रकार भारत में सोनिया गांधी अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी और r.s.s. कांग्रेस के वर्करों ने यह कानून बनाया है कि ट्रेन और फ्लाइटों में अगर आप को यात्रा करनी है तो आपको आपके मोबाइल में कंपलसरी ऐप इंस्टॉल करना होगा उस प्रकार का कोई भी कानून अमेरिका में नहीं है।
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तात्पर्य भारत जैसा तालाबंदी यूएसए में भी नहीं थी। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए और उन्हें इस बात का विश्वास दिलाने के लिए कि अमेरिका में भी लॉक डाउन है यह सारी चीजें की गई पर धरातल पर अगर देखें तो अमेरिका में कोई भी तालाबंदी नहीं थी यानी लॉक डाउन नहीं था।
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पेड मीडियाकर्मियों और सोनिया-मोदी-केजरीवाल और इनके कार्यकर्ताओं ने अमेरिका और भारत के लॉकडाउन के अंतर के बारे ye जानकारियाँ छुपाएँ रखी।

विदेशी बिकी हुई निजी मीडिया का खबरे छुपाना समझ में आता है पर भारत सरकार द्वारा प्रायोजित दूरदर्शन ने भी इस प्रकार की कोई समाचार नहीं दिए। इस प्रकार यह समझा जा सकता है कि सारी पार्टियां सारी पार्टियां या संगठन आरएसएस आप अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी हर कोई एक समान विचार रखता है उनके में जनता के प्रति कोई आदर भाव उनके कष्ट के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है सारी पार्टियां एक तरह का ही व्यवहार कर रहे हैं।
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समाधान - राइट टू रिकॉल दूरदर्शन चेयरमैन।