> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-04-25

Pawan Jury BhilwaraRj

लोग ज्यादा किससे मर रहे हैं ? क्रोना से या लोकडाउन से ? कैसे जाने ? उपाय ?
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कृपया पीएम को निम्नलिखित ट्वीट करें :
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(1) लॉकडाउन पर रायशुमारी करने के लिए एक SMS सर्वर स्थापित करें - #OpenSmsVoteOnLockDown

(2) सभी मृतकों की पंजीकरण सूची एवं वोटर आई डी नंबर सार्वजनिक करें - #PublishVoterIdNameOfAllDead , #PublicDeathRegistry
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(3) क्रोना का टीका लेने के बाद मरे हुए लोगो की पंजीकरण सूची एवं वोटर आई डी नंबर सार्वजनिक करें - #PublishNamesOfAllWhoDiedAfterDose
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(i) यदि टीका लेने के बाद मरने वाले लोगो के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए जाते है तो यह जानकारी मिल सकेगी कि टीका लेने के बाद वायरस से मरने वालो की दर क्या है। और तब इन आंकड़ो के आधार पर व्यक्ति तय कर सकता है कि उसे टीका लेना है या नहीं।
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कृपया इस बात पर ध्यान दें कि -- क्रोना टीके के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता सरकार से यह आंकड़े सार्वजनिक करने का ट्विट करने से मना कर रहे है। उनका कहना है कि, उन्हें आंकड़ो की जरूरत नहीं है, और बस उनकी इस बात को मान लिया जाना चाहिए कि, क्रोना का टीका क्रोना से ज्यादा लोगो को मार रहा है !! और सभी को उनकी बात इसीलिए मान लेनी चाहिए क्योंकि उनकी बुद्धिमता का स्तर अन्य नागरिको (जिन्हें वे भेड़ बकरों की गिनती में रखते है) की तुलना में काफी उच्च है !!!
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(ii) यदि प्रधानमन्त्री लॉकडाउन पर रायशुमारी करने के लिए एक SMS सर्वर बना देते है तो प्रत्येक नागरिक Yes/No का SMS भेजकर यह बता सकेगा कि वह अपने जिले / राज्य / देश में लॉकडाउन चाहता है या नहीं चाहता है। इससे यह बात निकलकर सामने आएगी कि नागरिको का बहुमत लॉकडाउन चाहता है या नहीं।
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कृपया इस बात पर ध्यान दें कि -- क्रोना को फर्जी महामारी बताने का अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता सरकार से ऐसे SMS सर्वर की स्थापना करने की मांग करने का विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि, उन्हें इस बारे में शेष नागरिको (जिन्हें वे अजागरूक या सोया हुआ मानते है) की राय जानने की कोई आवश्यकता नहीं है, और पूरे देश के नागरिको एवं पीएम को उनकी बात बिना किसी ना नुकुर के मान लेनी चाहिए !!
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हमारे विचार में, कार्यकर्ताओं में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण की कमी होना और खुद के अलावा शेष नागरिको को "भेड़ बकरा" मानकर चलना एक बड़ी वजह है कि, हमें लॉकडाउन भुगतना पड़ा और आगे भी हमें लॉकडाउन फिर से झेलना पड़ेगा।
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लोकतांत्रिक दृष्टिकोण की कमी होने की वजह से ही ऐसे कार्यकर्ता बिश्‍वरूप रॉय जैसे छोटे गांधी जैसे लोगों का अनुसरण करते है। और विश्वरूप चौधरी जैसे लोग कभी भी कार्यकर्ताओं को यह सूचना नहीं देते कि, उन्हें किसी विषय पर पीएम से जनमत संग्रह / रायशुमारी करने की प्रक्रिया की मांग करनी चाहिए। यदि किसी विषय पर बहुमत व्यक्त हो जाता है, तो लोकमत पीएम पर अपना फैसला वापिस लेने का वांछित दबाव बना सकता है।
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किन्तु लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का विरोध करने वाले छोटे गांधी / छोटे अन्ना तर्क देते है कि - "क्रोना के कारण किसी की मृत्यु नहीं हुई, और नारियल पानी क्रोना के सभी मामलों को ठीक कर सकता है"
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और इनका मानना है कि, इनके इस दावे एवं इस तरह के सभी दावो को सच मान लिया जाना चाहिए। भारत में हम रिकालिस्ट्स एवं मात्र समूह है जो किसी विषय पर "पहले" नागरिको की रायशुमारी / जनमत संग्रह / वोट वापसी प्रक्रियाओ की मांग करते है और इसके साथ ही अमुक विषय पर अपना व्यक्तिगत स्टेंड सामने रखते है।
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इन गांधियों / अन्नाओ और हमारे बीच यह मुख्य अंतर है !!
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इस सम्बन्ध में वीडियो इस लिंक पर देखें - <https://www.youtube.com/watch?v=dbd6f5XuUmo>;
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