> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-03-08

Pawan Jury BhilwaraRj

क्या सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह कहलाता है?
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देशद्रोह का आरोप धारा 124 A के तहत दर्ज किया जाता है। यह धारा कहती है कि -
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"बोले या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रस्तुति द्वारा, जो कोई भी भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमान पैदा करेगा या पैदा करने का प्रयत्न करेगा, असंतोष (Disaffection) उत्पन्न करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, उसे आजीवन कारावास या तीन वर्ष तक की कैद और ज़ुर्माना अथवा सभी से दंडित किया जाएगा।"
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तो यदि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ अवमान या घृणा फैलाता है तो उपरोक्त धारा के अनुसार अमुक व्यक्ति पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। धारा में सरकार शब्द का प्रयोग हुआ है, न कि देश का। मतलब इस धारा के अनुसार यदि आप सरकार के प्रति अवमान उत्पन्न करते हो तो आप पर देशद्रोह का आरोप बनता है !!
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लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि, आपका कथ्य सरकार के प्रति घृणा फैलाता है या नहीं, इसका फैसला भ्रष्ट जज करते है। यदि जज के सामने आप पैसा फेंक दोगे तो जज आपके कथ्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खांचे में डाल कर बाइज्जत बरी कर देगा, और यदि केस दर्ज करवाने वाले ने जज के सामने पैसा फेंक दिया तो जज आपको अन्दर डाल देगा !!
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दुसरे शब्दों में, घूम फिर कर गेंद भ्रष्ट जजो के पाले में रहती है। और जज ही यह तय करता है कि, कथ्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताना है या देशद्रोह !!
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1870 में गोरो ने आन्दोलन कारियों को दबाने के लिए यह क़ानून बनाया था। आजादी के बाद भी जवाहरलाल और उनके सभी साथी सांसदों को यह धारा “बड़े काम” की लगी, अत: उन्होंने इसे जारी रखा। पिछले 70 वर्षो से इस धारा का एक ट्रेंड सेट हो गया है – जो भी पार्टी विपक्ष में रहती है वह इस कानून को निरस्त करने की मांग करती है, और सत्ता में आने के साथ ही इस धारा की समर्थक हो जाती है।
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जब कोंग्रेस सत्ता में थी तो बीजेपी इस धारा के खिलाफ थी, लेकिन जब से कोंग्रेस विपक्ष में आई ही कोंग्रेस के सांसद इस धारा का विरोध करने लग गए है, और बीजेपी के सभी नेता इस धारा के समर्थन में आ गए है। आगे जब कभी बीजेपी सत्ता से बाहर हो जायेगी तो आप बीजेपी के नेताओं को फिर से इस धारा का विरोध करते देखने लगेंगे।
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Sedition Law A Colonial Hangover, Scrap It: Kapil Sibal
Senior Congress leader Kapil Sibal today demanded that the sedition law be scrapped as those in power are "manipulating" it ---<https://www.ndtv.com/india-news/sedition-law-a-colonial-hangover-scrap-it-congress-leader-kapil-sibal-1978609>;
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असल में, सत्ताधीशो के लिए यह धारा बहुत काम की है। इस धारा की इबारत ही ऐसी है कि राजनीती पर लिखने / बोलने वाले लगभग सभी नागरिको को इस धारा का उलंघन करना पड़ता है। इस तरह ज्यादातर लोग इस धारा के तहत दोषी हो जाते है। सरकार आमतौर पर किसी पर कोई कार्यवाही नहीं करती, और उन्हें क़ानून तोड़ने देती है।

लेकिन जब सरकार को किसी व्यक्ति को उठाकर अंदर डालना होता है, तो उसे इस धारा का इस्तेमाल किया जाता है। अंतिम भूमिका फिर भी जज की ही रहती है। यदि जज चाहेगा तो आदमी छूट जाएगा, वर्ना जेल जाएगा। इस तरह यह धारा जजों की शक्ति बेहद बढ़ा देती है।
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समाधान : समाधान जूरी कोर्ट है। यदि जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छाप दिया जाता है तो धारा 124A के मुकदमो की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी, और तब 15 से 1500 नागरिको का जूरी मंडल बहुमत द्वारा तय करेगा कि अमुक कथ्य देशद्रोह यानी 124A के दायरे में आता है या नहीं।
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