> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-02-20

Pawan Jury BhilwaraRj

जनसँख्या नियंत्रण के लिए प्रस्तावित टू चाइल्ड लॉ
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( Two Child Law ; Proposal for Population Control )
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क़ानून का सार : यह प्रस्तावित क़ानून दो से अधिक संतान रखने वाले नागरिको पर कुछ दंडात्मक प्रावधान लगाता है। परन्तु जिन अभिभावकों के 1 या 2 या 3 पुत्रियाँ है किन्तु कोई भी पुत्र नहीं है, उन्हें इस क़ानून के अनुसार कुछ अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेंगे, एवं उन्हें किसी भी प्रकार के आर्थिक दंड का सामना भी नहीं करना होगा। जिनके 4 पुत्रियाँ है उनको प्राप्त होने वाले अतिरिक्त आर्थिक लाभ रोक दिए जायेंगे, किन्तु उन्हें भी किसी आर्थिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति के 2 पुत्र या एक पुत्री एक पुत्र है और फिर भी वे एक संतान और पैदा करते है तो उन्हें कुछ आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।
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तो इस तरह यह क़ानून पुत्रियों को कुछ अतिरिक्त छूट प्रदान करते है। इस कानून को धन विधेयक के रूप में लोकसभा से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके देश में लागू किया जा सकता है। इस क़ानून को राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। यह क़ानून ड्राफ्ट भारतीय संविधान के किसी भी मौजूदा प्रावधान का उलंघन नहीं करता, अत: इसके लिए किसी प्रकार के संवैधानिक संशोधन की भी ज़रूरत नहीं है। #TwoChildLaw
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे । पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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प्रधानमंत्री जी, कृपया टू चाइल्ड लॉ क़ानून गेजेट में छापें- #TwoChildLaw , #P20180436120.
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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[ टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। ]
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भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) यह कानून लागू होने के 1 साल बाद जिन नागरिको के संतानों की संख्या 2 से अधिक है तथा इसमें से 1 संतान का जन्म यह कानून लागू होने के 1 साल बाद हुआ है, उन्हें सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदानों एवं अन्य आर्थिक सहायताओ में 33% की कटौती कर दी जायेगी। और यदि उनकी संतानो की संख्या 3 से अधिक है, तथा एक संतान का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद हुआ है तो कटौती 66% होगी।
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(02) यह कानून लागू होने के एक साल बाद, जिनकी 4 से अधिक संताने है और 1 संतान का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद हुआ है तो उन्हें 2 साल तक के कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। जिनकी 5 से अधिक संताने है, और साथ में 2 संतानो का जन्म यह कानून लागू होने के एक साल बाद पैदा हुआ है तो उन्हें 2 और सालो के कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
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(03) जुर्माने और सजा का निर्णय जूरी मंडल करेगा। जूरी का चयन ज़िले / राज्य की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25-55 वर्ष के मध्य होगा, तथा जूरी मंडल में 12-1500 तक नागरिक हो सकेंगे।
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(04) यदि किसी दंपत्ति के दो बेटियां हैं तो इस कानून में सजा आदि तय करने के उद्देश्य से उन्हें एक संतान ही माना जायेगा। आदिवासियों में संतानो की मृत्यु दर अधिक है। अत: आदिवासियों को एक संतान "अधिक" रखने की अतिरिक्त छूट दी गयी है। यह छूट सिर्फ आदिवासियों को प्राप्त होगी, अनुसूचित जातियों या अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यको को यह विशेषाधिकार नहीं मिलेगा। जुड़वा, विकलांग संतानों और अन्य दुर्लभ जटिल मामलों के बारे में स्पष्टीकरण खंड 12 में दिया गया है।
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(05) प्रत्येक व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के लिए संतानों को अलग-अलग गिना जायेगा। तो उन मामलों में जब किसी को पूर्व विवाह से संताने थी या विवाह के अलावा संताने थी , संतान संख्या पति और पत्नी के लिए अलग अलग हो सकती है। किसी विवाद की स्थिति में वास्तविक जैविक पिता या माता को ही पिता या माता माना जाएगा। जूरी सदस्य किसी विवाद का निर्णय करने के लिए डीएनए टेस्ट के आदेश दे सकते है।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश
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(06) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी (NPCO = National Population Control Officer) को नियुक्त करेंगे जिसे भारत के नागरिक वोट वापसी प्रक्रियाओं का प्रयोग करके बदल सकेंगे। राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी स्टाफ के लिए केंद्र या राज्य सरकार से पदासीन कर्मचारियों को ले सकेगा, सरकारी विभागों में उपलब्ध आंकड़ो / सेवाओ का उपयोग कर सकेगा या वह अस्थायी आधार पर अधिक कर्मचारियों की भर्ती भी कर सकता है। कर्मचारियों और आंकड़ो / सेवाओ का उपयोग करके राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी भारत में सभी नागरिकों और उनके माता-पिता और संतानों की सूची तैयार करेगा।
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(07) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से NPCO बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर यह एफिडेविट स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(08) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
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कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर NPCO के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(8.1) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी।
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(8.2) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(8.3) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(09) भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती, जुर्माना और कारावास
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(9.1) यदि किसी व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के पास निर्धारित संतानों की संख्या से अधिक संताने है, तो खनिज रॉयल्टी भुगतान में कटौती, आर्थिक सहायता/अनुदान आदि में कटौती, जुर्माना और कारावास लागू हो सकते है। आदिवासियों के संतानों की संख्या अन्य के लिए निर्धारित संतानों की संख्या से एक संतान अधिक हो सकती है। सिर्फ आदिवासियों को ही यह छूट मिलेगी। अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यको को यह विशेषाधिकार नहीं मिलेगा।
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(9.2) यह कानून लागू होने के 1 साल बाद यदि किसी व्यक्ति के कोई संतान पैदा नहीं हुई है , तो सजा या भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती नहीं होगी। लेकिन भुगतान में वृद्धि हो सकती है।
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(9.3) इस खंड में D का अर्थ है सिर्फ एक पुत्री, और S का अर्थ है सिर्फ एक पुत्र। DD का अर्थ है दो पुत्रियाँ और DS का अर्थ है पहली संतान पुत्री और दूसरी संतान पुत्र है। DDS का अर्थ है पहली संतान पुत्री है, दूसरी पुत्री है और तीसरी पुत्र है। दूसरे शब्दों में, इस खंड में संतानों के पैदा होने का क्रम बताया गया है ना कि सिर्फ कुल संख्या। DSD का अर्थ होगा पहली संतान पुत्री, दूसरी पुत्र और तीसरी पुत्री है। और इसी तरह SDD, DSD अलग अलग क्रम को दर्शाता है।
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(9.3.1) निसंतान - यदि किसी व्यक्ति की आयु 18 से 23 वर्ष के मध्य है तब उसे प्राप्त होने वाली खनिज रॉयल्टी एवं सरकारी जमीनों के किराये से प्राप्त होने वाली राशि में 33% की अधिक वृद्धि हो जायेगी। 23 वर्ष की आयु के बाद निसंतान होने पर कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलेगा।
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(9.3.2) S - कोई सजा नहीं और ना ही खनिज रॉयल्टी का अतिरिक्त भुगतान।
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(9.3.3) D या DD या DDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी में 33% की अतिरिक्त वृद्धि।
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(9.3.4) DDDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी में 66% की अतिरिक्त वृद्धि।
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(9.3.5) SS, SD, DS, DDS, DDDS, DDDDS, DDDDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी का कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं।
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(9.3.6) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.5) के बाद - खनिज रॉयल्टी में 33% कटौती 10 साल के लिए , ना कारावास और ना जुर्माना।
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(9.3.7) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.6) के बाद - खनिज रॉयल्टी में 66% कटौती 10 साल के लिए , 20 वर्ष के लिए मताधिकार का निलम्बन, ना कारावास और ना जुर्माना। ( मताधिकार निलम्बन एवं इसकी अवधि का फैसला जूरी मंडल द्वारा किया जाएगा। )
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(9.3.8) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.7) के बाद - खंड (9.3.7) की सजा और साथ में 10 साल के लिए आय का 10% जुर्माना ( न्यूनतम रु 1000 प्रति महिना और अधिकतम रु 10000 प्रति माह ), ना कारावास।
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(9.3.9) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.8) के बाद - खंड (9.3.8) की सजा और साथ में 2 साल तक का कारावास।
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(9.3.10) प्रत्येक संतान के लिए खंड (9.3.9) के बाद - खंड (9.3.9) की सजा और साथ में प्रति संतान के लिए 2 अधिक साल के लिए कारावास और बाध्यकारी नसबंदी।
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[ टिप्पणी : बिंदु 7 में दिए गए मताधिकार के निलम्बन एवं इसकी अवधि का फैसला नागरिको की जूरी करेगी। जूरी चाहे तो निलंबन के बाद भी यह अवधि घटा सकती है, या मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आदेश जारी कर सकती है। यदि इस क़ानून के तहत मताधिकार से वंचित किया गया कोई नागरिक चुनाव लड़ना चाहता है तो जूरी सदस्य चुनाव लड़ने की अवधि के लिए अमुक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के आदेश जारी कर सकती है, या उसे चुनाव लड़ने की अनुमति दे सकती है, ताकि व्यक्ति चुनाव लड़ने से वंचित न रहे। ]
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(9.4) यह कानून लागू होने के 5 साल बाद, अधिक संतान उत्पत्ति पर होने वाली सजा इस प्रकार है :
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(9.4.1) खंड (9.3.1) से (9.3.5) तक के मामलों में संतान संख्या के लिए - कोई सजा नहीं।
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(9.4.2) खंड (9.3.6) में संतान संख्या के लिए, खंड (9.3.7) में दी गयी सजा मिलेगी, और खंड (9.3.7) में संतान संख्या के लिए, खंड (9.3.8) में दी गयी सजा मिलेगी, और सभी खंडो के लिए इसी प्रकार से सजा मिलेगी। दूसरे शब्दों में, खंड (9.3.5) के बाद सभी खंडो के लिए सजा "एक स्तर आगे" हो जाएगी।
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(10) जुर्माना संग्रहित करने में नियम - जुर्माना प्रत्येक माता-पिता पर 1000 रू प्रति महीना न्यूनतम तथा 10,000 रू प्रति महीना अधिकतम होगा। लेकिन संग्रहित जुर्माना मासिक आय के 10% से अधिक नहीं होगा। यदि व्यक्ति की आय 10,000 रू से कम है तब उसकी आय का 10% जुर्माना ही लिया जायेगा, और शेष राशि लंबित जुर्माना के रूप में रखी जाएगी। लंबित जुर्माने पर प्रचलित दर के अनुसार ब्याज देय होगा। लंबित जुर्माना के मामले में, अवधि 10 साल के बाद भी बढाई जा सकती है, जब तक कि सारा लंबित जुर्माना ब्याज सहित संग्रहित नहीं हो जाता। अमुक व्यक्ति चाहे तो लंबित जुर्माना शीघ्र अति शीघ्र अदा कर सकता है।
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[ टिप्पणी : खनिज रॉयल्टी : खनिज रॉयल्टी एवं सरकारी जमीनों से प्राप्त होने वाले प्रावधान तब लागू होंगे जब प्रधानमंत्री प्रस्तावित धन वापसी पासबुक का क़ानून गेजेट में छापकर भारत के सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों को भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित कर देते है। जब तक धन वापसी पासबुक गेजेट में नहीं आता, तब तक उन सभी आर्थिक अनुदानों, सब्सिडी आदि में कटौती होगी जो आर्थिक अनुदान नागरिको को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा दिए जा रहे है। ]
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(11) अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष प्रावधान : धारा (10) के प्रावधान लागू करते समय जिस एक संतान ( पुत्र या पुत्री ) की छूट दी जायेगी उसका चयन एवं संतानों की गणना इस तरीके से की जायेगी जिससे जुर्माने की राशि में अधिकतम कटौती हो। लेकिन अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति जिन्होंने सरकारी नौकरी या निजी नौकरी या सरकारी या निजी कॉलेज में दाखिला लेने के लिए आरक्षण का लाभ लिया है, इस विशेषाधिकार से वंचित रहेंगे। और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति जिनकी संपत्ति रु 1 करोड़ से अधिक या सालाना आय 5 लाख रू है उन्हें भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। ये छूटें सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लिए है।
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(12) कुछ जटिल और विशेष परिस्थितियां :
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(12.1) इस कानून के पारित होने से पूर्व ( या पारित होने के 1 वर्ष के अन्दर ) जन्मी संतानों के कारण कोई भी जुर्माना या सजा नहीं होगी।
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(12.2) यदि अंत में जन्मी संताने जुडवा हैं तो उनको एक संतान ही गिना जाएगा। लेकिन यदि जुडवा संतानों के बाद कोई संतान जन्म लेती है तो जुडवा बच्चों को दो अलग संतानों के रूप में गिना जाएगा।
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(12.3) गोद ली गयी संतानों को गिना नहीं जाएगा।
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(12.4) दिव्यांग संतानों को गिना जाएगा। माता-पिता को दिव्यांग संतानों के लिए 66% अधिक खनिज रोयल्टी दी जाएगी।
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(12.5) यदि जन्मित संतान पुत्र या पुत्री नहीं है तो ऊपर लिखे नियमो को लागू करते समय उस संतान को पुत्री के रूप में गिना जाएगा।
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(13) जुर्माने एवं सजा निर्धारण के लिए जूरी ट्रायल :
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(13.1) जब भी कभी राष्ट्रीय जनसख्या नियंत्रण अधिकारी ( या उनके कर्मचारी ) किसी नागरिक को खनिज रॉयल्टी एवं सब्सिडी आदि के रूप में मिलने वाली धन राशि को कम करने का निर्णय करेंगे या किसी तरह की सजा देना या जुर्माना लगाना चाहेंगे तो मामले के विचार के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी 25 से 55 तक की उम्र के नागरिकों को रैंडमली चुनेंगे और एक जूरी मंडल का गठन करेंगे। और जब भी कोई नागरिक किसी राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के कर्मचारिओं के विरुद्ध कोई शिकायत दर्ज कराना चाहेंगे तब भी राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी वेसे ही एक जूरी मंडल का गठन करेंगे।
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(13.2) राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी जूरी के संचालन के लिए निम्नलिखित अधिकारीयों की नियुक्ति करेगा :
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(13.2.1) प्रत्येक जिले के लिए एक जिला जूरी प्रशासक ,
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(13.2.2) प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य जूरी प्रशासक,
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(13.2.3) राष्ट्रीय स्तर पर एक राष्ट्रिय जूरी प्रशासक।
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टिप्पणी : जिला, राज्य एवं राष्ट्रिय जूरी प्रशासक जूरी मंडल के दायरे में होंगे। यदि इन अधिकारियों एवं इनके किसी स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो सुनवाई जूरी द्वारा की जायेगी।
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(14) अधिक संतानों एवं अधिकारियों के प्रति शिकायतो का जूरी द्वारा निपटान :
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(14.1) अधिक संतान धारण करने वाले आरोपी नागरिक और राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के बीच मामला उस जिला न्यायालय में दर्ज किया जाएगा जिस जिले का आरोपी निवासी है। यदि जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के विरुद्ध कोई शिकायत है तो उस जिले के न्यायालय में मामले को दर्ज किया जाएगा जिस जिले में अधिकारी नियुक्त हैं। यदि कोई नागरिक या राष्ट्रिय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी मामले को उसी राज्य के किसी दुसरे जिले में स्थानांतरण करना चाहते हैं तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य उच्च न्यायालय की अनुमति से ऐसा कर सकते हैं। और इनमे से कोई भी पक्ष यदि मामले को राज्य से बाहर अन्य किसी राज्य के किसी जिले में स्थानान्तरित करना चाहते हैं तो वे राष्ट्रिय जूरी प्रशासक या सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति से ऐसा कर सकते हैं।
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(14.2) जिले में दर्ज हुए किसी भी मामले के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले के विज्ञान, इन्जिनीयरिंग, गणित, चिकित्सा शास्त्र के स्नातकों की सूचि में से 25 से 55 वर्ष की आयु के 3 से 10 स्नातक चुनेगें जो की इस मामले में सहायता करने के इच्छुक हो। जूरी सदस्य चाहे तो इस पैनल से अमुक मामले में आवश्यक सलाह ले सकते है ।
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(14.3) जिला जूरी प्रशासक भारत की मतदाता सूची में से रैंडमली 25 से 55 वर्ष के नागरिकों को चुनेंगे। जूरी मंडल के लिए वे नागरिक पात्र होंगे जो पिछले 10 वर्षों के दौरान किसी जूरी मंडल में ज्यूरी सदस्य न बने हो तथा उनके ऊपर कोई आरोप सिद्ध न हुआ हो। व्यक्ति की उम्र वही मानी जायेगी जो वोटर लिस्ट में है।
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(14.4) जूरी का गठन एवं जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :
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(14.4.1) किसी अधिकारी के विरुद्ध हुई शिकायत के मामले में जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 और अधिकतम 1500 होगी। आरोपी अधिकारी के पद की वरिष्ठता के अनुसार श्रेणी-4, श्रेणी-3, श्रेणी-2 और श्रेणी-1 के लिए जूरी सदस्य संख्या 12, 50, 200 या 500 हो सकती है। यदि अधिकारी बहुत ही वरिष्ठ हैं तो सदस्यों की संख्या 500 से अधिक हो कर अधिकतम 1500 तक हो सकेगी।
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(14.4.2) अधिक संतानों के कारण नागरिक पर दर्ज मामले के लिए नागरिक की वार्षिक आय और संपत्ति के पांचवे हिस्से में से जो अधिक है, वो राशि यदि 5 लाख से अधिक है तो जूरी सदस्यों की संख्या 12 होगी और इस राशि में प्रत्येक 5 लाख की वृद्धि के साथ जूरी मंडल में 1 सदस्य बढाया जाएगा। वार्षिक आय की गणना के लिए नागरिक की पिछले 3 वर्षों की वार्षिक आय के औसत को वार्षिक आय माना जाएगा।
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(14.4.3) जूरी सदस्यों की अधिकतम संख्या 1500 होगी।
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(14.4.4) प्रत्येक मुकदमे की सुनवाई के लिए अलग से जूरी होगी और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
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(14.4.5) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(14.4.6) यदि किसी चिकित्सक को जूरी ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो वह जूरी में न आने के लिए सूचना दे सकता है। जूरी सदस्य डॉक्टर पर जूरी ड्यूटी न करने के एवज में कोई आर्थिक दंड नहीं लगायेंगे।
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(14.4.7) यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन से काट सकता है।
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(14.4.8) जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा वांछित जूरी संख्या से दुगनी संख्या में नागरिकों को चुनकर उन्हें बुलावा भेजेगा। उनमे से किसी भी पक्षकार के रिश्तेदार, पडोसी, सहकर्मी आदि को जूरी सदस्यों में शामिल नहीं किया जाएगा।
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(14.5) जूरी सदस्यो को चुनने का क्षेत्र : जूरी सदस्य उन जिलों से चुने जाएंगे जहां के न्यायालय वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उस जिला न्यायालय से जुड़े हों जहां मुकदमे की सुनवाई चलेगी। यदि कोई भी जिला न्यायालय उस जिले के न्यायालय से वीडियो कांफ्रेंस द्वारा नही जुडा हुआ है जहां सुनवाई चल रही है, तो सारे जूरी सदस्य उस जिले से ही चुने जाएंगे। सुनवाई उस भाषा में होगी जिस भाषा को ज्यूरी सदस्य भली भाँती समझते है।
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(14.6) सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू होगी और सांय 4 बजे तक चलेगी, और मामले का निस्तारण होने तक सुनवाई निरंतर चलेगी। जब 65% से ज्यादा जूरी सदस्य कहेंगे कि वे काफी सुन चुके हैं, तब सुनवाई समाप्त होगी।
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(15) जुर्माने और निर्दोषता का निर्णयन :
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(15.1) किसी अधिकारी के विरुद्ध दर्ज शिकायत के मामले के लिए : यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य ये घोषणा करते हैं कि आरोपी अधिकारी को निलंबित कर देना चाहिए तो राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी उनको निलंबित कर सकते हैं या ऐसा नहीं भी कर सकते हैं। यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य किसी जुर्माने की राशि पर सहमत हो जाते हैं तो राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी आरोपी अधिकारी से जुर्माना ले सकते हैं या नहीं भी ले सकते हैं। यदि शिकायत कर्ता को ये लगता है कि राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय को लागू नही किया है तो वो भारत के नागरिकों से ये आग्रह कर सकते है कि वे वोट वापसी की धाराओं का प्रयोग करके राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी को नौकरी से निकालने की अनुमति दें।
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(15.2) अधिक संतान होने के कारण हुए मामले के लिए : आरोपी नागरिक को देय सरकारी अनुदानों में कटौती, जुर्माने और कारावास आदि पर 75% जूरी सदस्यों द्वारा लिए गये निर्णय को अंतिम निर्णय माना जाएगा। जिला जूरी मंडल के निर्णय के विरुद्ध राज्य उच्च न्यायालय के जज या जूरी मंडल के समक्ष और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के जज या जूरी मंडल के समक्ष अपील की जा सकेगी।
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(16) जनता की आवाज :
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(16.1) यदि कोई मतदाता इस कानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है या किसी मांग, सुझाव आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट जमा करेगा और इसे मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ राष्ट्रीय जनसँख्या अधिकारी एवं प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके इस तरह रखेगा कि कोई भी व्यक्ति इसे बिना लॉग इन के देख सके।
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(16.2) यदि कोई मतदाता धारा (16.1) के तहत प्रस्तुत किये गए किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और मतदाता की हाँ/ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो इस कानून की धारा (16.1) के तहत कोई भी नागरिक एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के प्रयास किये है। कार्यकर्ता के जीवित नही होने पर प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री या राष्ट्रिय जनसँख्या अधिकारी इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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----------------कानून ड्राफ्ट का समापन----------
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इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या बदलाव आएगा ?
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(i) भारत में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का एक बड़ा कारण धार्मिक जनसँख्या के अनुपात का लगातार बिगड़ना है। यदि भारत में यह क़ानून कई दशक पहले आ जाता धार्मिक जनसँख्या के इस असंतुलन को रोका जा सकता था। किन्तु भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी एवं संगठन ने भारत में जनसँख्या नियंत्रण का क़ानून ड्राफ्ट सामने रखने तक की जहमत नहीं उठायी। क़ानून पास करना तो आगे की बात है। जनसँख्या नियंत्रण पर यह भारत का पहला एवं एक मात्र क़ानून ड्राफ्ट है। इस कानून के आने से भारत जनसँख्या नियंत्रण शुरू होगा और इस वजह से साम्प्रदायिक तनाव में भी कमी आएगी।
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(ii) हमारे समाज में बहुधा पुत्र प्राप्ति के लिए स्वाभाविक झुकाव देखने में आता है। अत: इस क़ानून को इस तरह लिखा गया है कि यदि किसी दम्पत्ति की प्रथम 4 संताने पुत्रियाँ है तो उसे सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदान में अतिरिक्त वृद्धि होगी, और 5 पुत्रियाँ होने तक भी उसे किसी आर्थिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस तरह इस क़ानून के आने के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या के मामलो में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : “प्रधानमंत्री जी, कृपया टू चाइल्ड लॉ क़ानून गेजेट में छापें- #TwoChildLaw , #TCL , #P20180436120
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Pmoindia , कृपया टू चाइल्ड लॉ गेजेट में छापें - #TwoChildLaw , #TCL , #P20180436120
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (16) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही पेड मीडिया की।
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