Pawan Jury BhilwaraRj
मैं पवन कुमार शर्मा भीलवाड़ा लोकसभा से प्रत्याशी हूँ। सरकारी स्कूलों को सुधार कर गणित-विज्ञान का स्तर बेहतर बनाना मेरे एजेंडे में शामिल है। निचे यह बताया गया है कि राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी कानून से शिक्षा में सुधार कैसे आएगा ?
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भारत में लगभग 700 जिला शिक्षा अधिकारी हैं । मान लीजिए कि इनमे से 10-15 शिक्षा अधिकारी भ्रष्ट नहीं है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना चाहते है। राइट टू रिकॉल -जिला शिक्षा अधिकारी प्रक्रिया में एक धारा 8 कहती है कि यदि कोई शिक्षा अधिकारी मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त होता है तो वह केवल एक ही जिले का शिक्षा अधिकारी हो सकता है। लेकिन यदि नागरिकों ने उसे जिला शिक्षा अधिकारी बनाया है तो वह राज्य में 5 जिलों और पूरे भारत में 10 जिलों का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है, और वह इन सभी जिलों का वेतन भी प्राप्त करेगा। अर्थात यदि कोई व्यक्ति 4 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी है और उसे नागरिकों ने नियुक्त किया है तो उसका वेतन 4 गुना होगा। सरकार को भी यह ज्यादा सस्ता पड़ेगा, क्योंकि सिर्फ वेतन ही चार गुना बढ़ेगा लेकिन चिकित्सा लाभ और आजीवन मिलने वाले लाभ 4 गुना नहीं बढ़ेंगे।
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तो मान लीजिए कि वर्तमान 700 जिला शिक्षा अधिकारियों में से 5-15 अधिकारी भ्रष्ट नहीं है। यदि एक बार रॉइट टू रिकॉल लागू हो जाता है तो उन्हें सीधी तरक्की और पदोन्नति का अवसर मिल जायेगा। वे अपने जिले के स्कूलों को ठीक करना शुरू कर देंगे। वे अपने कर्मचारियों को घूस लेने से रोकेंगे। इस बात का ध्यान रखेंगे कि ठेकेदार ब्लैकबोर्ड, कुर्सियां आदि की सप्लाई में घपला न करे, और शिक्षक स्कूल में हाजिर रहें, आदि। अब मान लीजिए कि मुख्यमंत्री भ्रष्ट है और इन सभी मामलों में मुख्यमंत्री इन अधिकारियों का तबादला कर देते है। तब लगभग इन 7-15 मामलों में से, कम से कम 2-3 मामलों में माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी कानून का उपयोग करके उस तबादला किए गए अधिकारी को वापस ले आएंगे।
इस तरह भारत के 700 जिलों में से 2-5 जिलों में शिक्षा की स्थिति में सुधार आएगा। तो शेष जिलों का क्या होगा ?
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मान लीजिए आप 'A' जिले में रहते है, तथा 'A' जिले का जिला शिक्षा अधिकारी भ्रष्ट और निकम्मा है। मान लीजिए पास में ही पांच अन्य जिले B, C, D, E और F है और केवल E जिले में ही अच्छा जिला शिक्षा अधिकारी है। तो जिला A के नागरिकों के पास विकल्प होगा कि वे अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को हटा सकते है और E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को दोहरा कार्यभार दे सकते है। इसी विकल्प और अधिकार के कारण कि "अब नागरिक राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी का उपयोग करके मुझे हटा सकते हैं और मेरे पद पर E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को ला सकते हैं", अन्य जिलो के जिला शिक्षा अधिकारीयों के मन में एक भय पैदा होगा।
अत: या तो वे अगले 2-3 महीनों में सुधर जाएंगे या तो नागरिक उन्हें राइट टू रिकॉल-जिला शिक्षा अधिकारी का प्रयोग करके हटा देंगे। इस तरह इस कानून के गैजेट में प्रकाशित होने के 8-10 महीनों में ही सभी 700 जिला शिक्षा अधिकारी या तो सुधर जाएंगे या निकाल दिए जाएंगे।
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10-20 महीनों के अंदर ही "जल्दी अमीर बनने" और "भाड़ में जाए जनता" की मानसिकता वाले अधिकारी प्रशासन से हटना शुरू होंगे और दुबारा इन प्रशासनिक पदों पर नहीं आ पाएंगे। इससे वास्तव में सेवा करने की इच्छा वाले लोगों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा और भ्रष्टाचारी लोग ईमानदार लोगो के काम में कम बाधा डाल सकेंगे। वर्तमान सिस्टम में एक कमी यह है कि यदि कोई ईमानदार व्यक्ति 2 लोगों का काम करता है तो भी उसे 2 व्यक्तियों के बराबर वेतन नहीं मिलता, जबकि व्यापार में ऐसा होना आम बात है। इस वजह से ईमानदार और मेहनती लोग सरकारी नौकरी में आने से कतराते है। पर राईट टू रिकॉल आने के बाद अधिकारीयों को एक से अधिक पद मिल सकता है तथा उसके अनुसार वे अधिक वेतन पा सकते है। इससे शासन में ईमानदार और समर्पित व्यक्तियों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा।
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राईट टू रिकॉल पुलिस अधिकारी का ड्राफ्ट भी ठीक इसी तरह काम करेगा और राईट टू रिकॉल पुलिस अधिकारी क़ानून के लागू होने के बाद कुछ 6 महीने के भीतर ही पुलिस के भ्रष्टाचार में 80% तक की गिरावट आ जायेगी। या तो भ्रष्ट और निकम्मे पुलिस प्रमुख नौकरी से निकाल दिए जायेंगे या फिर वे सुधर जायेंगे। वैसे व्यवहारिक अनुभव यही है कि नागरिको को 1-2 अधिकारीयों को ही निकालने की जरूरत पड़ती है , और शेष अधिकारी नौकरी खोने के डर से तुरंत सुधरना शुरू कर देते है। इस तरह राईट टू रिकॉल ऐसा क़ानून है जो नेताओं एवं अधिकरियो के व्यवहार में परिवर्तन ले आता है।
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राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी ( Rtr-DEO ) क़ानून ड्राफ्ट की कुंजी :
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(1) उम्मीदवारी - जो व्यक्ति सांसद का चुनाव लड़ने की योग्यता रखता है वह किसी भी दिन कलेक्ट्री में DEO बनने के लिए अपना आवेदन जमा कर सकता है। जिस दिन आवेदन जमा होगा उसी दिन से अमुक व्यक्ति उम्मीदवार मान लिया जाएगा।
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(2) उम्मीदवार को स्वीकृत करना - DEO को सिर्फ जिले के अभिभावक ही स्वीकृत कर सकेंगे। प्रत्येक जिले में अभिभावकों की अलग से वोटर लिस्ट होगी। जिन दम्पतियों की किसी संतान की आयु 0-18 वर्ष के बीच होगी उन्हें ही अभिभावक माना जायेगा।
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(3) स्वीकृति दर्ज करना - अभिभावक किसी भी दिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकृत कर सकते है या किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में दी गयी स्वीकृति रद्द कर सकते है।
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(4) स्वीकृति दर्ज करने के तरीके - अभिभावक पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ / नहीं दर्ज कर सकते है , या मोबाईल एप द्वारा या अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से SMS करके या ATM से भी अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है।
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(5) स्वीकृतियों का प्रदर्शन - प्रत्येक अभिभावक द्वारा दर्ज हाँ / नहीं को अभिभावक की मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा स्वीकृत उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(6) DEO की नियुक्ति - यदि किसी उम्मीदवार की स्वीकृतियों की संख्या कार्यरत DEO से अधिक हो जाती है तो मुख्यमंत्री ऐसे उम्मीदवार को नया DEO नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की आवयश्कता नही है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम माना होगा।
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7) अभिभावकों की स्वीकृतियो से नियुक्त DEO अधिकतम 7 जिलो का DEO बन सकता है। जितने जिलो का वह कार्यभार संभालेगा उसे उतना ही अधिक वेतन मिलेगा।
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सार - इस प्रक्रिया के आने से अभिभावक सीएम को बता सकेंगे कि वे अमुक भ्रष्ट DEO को हटाकर अमुक को व्यक्ति को DEO बनाना चाहते है। नियुक्ति तब भी सीएम ही करेंगे। सीएम चाहे तो अभिभावकों की राय को तवज्जो दे सकते है या नहीं भी दे सकते है। इस प्रक्रिया के आने से मेहनती एवं ईमानदार DEO के पास तरक्की करने के अवसर खुल जायेंगे। जो DEO अच्छा काम नहीं करेगा अभिभावक उसे नौकरी से निकाल सकेंगे।
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नाम : पवन कुमार शर्मा
पार्टी : राईट टू रिकॉल पार्टी
चुनाव चिन्ह : प्रेशर कुकर
ईवीएम पर मेरा नंबर : 4
मतदान की तारीख : 29 अप्रेल
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