Pawan Jury BhilwaraRj
मैं पवन कुमार शर्मा भीलवाड़ा लोकसभा से प्रत्याशी हूँ, और मुख्य प्रस्ताव में राईट टू रिकॉल पीएम भी शामिल है। मैंने इसके लिए जिस क़ानून ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया है उसका सारांश नीचे दिया गया है। यदि आपको लगता है कि इस कानून के आने से व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आएगा तो राईट टू रिकॉल पीएम क़ानून का समर्थन करें :
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(1) उम्मीदवारी - 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति जो सांसद का चुनाव लड़ने की योग्यता रखता है वह किसी भी दिन कलेक्ट्री में PM बनने के लिए अपना आवेदन जमा कर सकता है। जिस दिन आवेदन जमा होगा उसी दिन से अमुक व्यक्ति उम्मीदवार मान लिया जाएगा।
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विशेषता : आज भारत में यह व्यवस्था है कि वोटिंग के सिर्फ 15 दिन पहले ही चुनाव आयोग द्वारा उम्मीदवार घोषित किया जाता है। बड़ी पार्टियों के पास पूरे देश में लाखों कार्यर्कार्ताओ का नेटवर्क होने और पेड मीडिया एक्सेस होने के कारण वे सभी मतदाताओं तक पहुँच जाते है, किन्तु छोटा उम्मीदवार 1% मतदाताओं तक भी नहीं पहुँच पाता। इससे जिसके पास प्रचार मशीनरी पर पैसा फूंकने की क्षमता है वही व्यक्ति फायदे में रहता है। इस प्रस्ताव में कोई भी व्यक्ति चुनाव के 5 वर्ष पहले भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत कर सकेगा, और वह अपने सीमित संसाधनों से प्रचार करता रह सकता है। इससे छोटे किन्तु अच्छे उम्मीदवार बढ़त बनाना शुरू कर देंगे।
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(2) उम्मीदवार को स्वीकृत करना - भारत का कोई भी मतदाता अपनी पसंद के अधिकतम 5 उम्मीदवारो को PM के लिए स्वीकृत कर सकता है।
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विशेषता : एक मतदाता इसमें 5 अनुमोदन दे सकता है। इस प्रकार की वरीय मतदान प्रणाली के कारण नकारात्मक मतदान में कमी आ जाती है। मान लीजिये कि आप मोदी साहेब को पीएम बनाना चाहते है तो पहली पसंद के रूप में उन्हें अनुमोदित करेंगे और फिर किसी छोटे या अच्छे उम्मीदवार को भी अनुमोदित कर सकेंगे। इस प्रक्रिया में जातिय आधार पर लड़ने वाले उम्मीदवार पिछड़ जाते है।
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(3) स्वीकृति दर्ज करना - मतदाता किसी भी दिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकृत कर सकते है या किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में दी गयी स्वीकृति रद्द कर सकते है।
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विशेषता : यह धारा राईट टू रिकॉल की रचना करती है। यदि आप पाते है कि पीएम ने किसी मामले में गलत फैसला लिया है तो आप उसका अनुमोदन रद्द करके किसी दुसरे व्यक्ति को दे सकते है। किन्तु इस बात पर विशेष ध्यान दें कि केवल आपके अनुमोदन रद्द करने से पीएम का रिकॉल नहीं होगा। रिकॉल होने के लिए यह जरुरी है कि करोड़ो लोग अपना अनुमोदन बदलें।
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(4) स्वीकृति दर्ज करने के तरीके - मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ / नहीं दर्ज कर सकते है , या मोबाईल एप द्वारा या अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से SMS करके या ATM से भी अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकते है।
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विशेषता : यह प्रक्रिया खर्चा बचाती है। और आपको किसी भी दिन अपना अनुमोदन दर्ज करने या रद्द करने की सुविधा देती है। मतलब अनुमोदन की प्रक्रिया 24*7 घंटें शुरू रहती है।
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(5) PM की नियुक्ति - यदि किसी उम्मीदवार की स्वीकृतियों की संख्या कार्यरत PM से 1 करोड़ अधिक हो जाती है तो PM त्याग पत्र दे सकते है , या सांसद अमुक उम्मीदवार को नया PM नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की आवयश्कता नही है। इस सम्बन्ध में सांसदों का निर्णय अंतिम होगा।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि पीएम बनने के 2 साल बाद तक मोदी साहेब के अनुमोदन 43 करोड़ है। किन्तु जब तक किसी अन्य उम्मीदवार को 44 करोड़ अनुमोदन नहीं मिल जाते तब तक यह धारा सक्रीय नहीं होगी।
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अब मान लीजिये कि एक के बाद एक गलत फैसलों के कारण 3 साल बाद मोदी साहेब के अनुमोदन गिर कर 30 करोड़ हो जाते है। किन्तु यदि तब भी राहुल गांधी के अनुमोदनो की संख्या 18 करोड़, केजरीवाल जी के अनुमोदनो की संख्या 4 करोड़। माया-मुलायम-नितीश की 2 करोड़ और योगी आदित्यनाथ के अनुमोदनो की संख्या 10 करोड़ है, तब भी यह धारा सक्रिय नहीं होगी, और मोदी साहेब पीएम बने रहेंगे।
अब मान लीजिये कि, अगले 6 महीने में योगी आदित्यनाथ यूपी में अच्छा काम करते है और इसी दौरान मोदी साहेब अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे है, और इस वजह से बीजेपी=संघ के सपोर्टर मोदी साहेब के अनुमोदन रद्द करके योगी जी देना शुरू करते है, और योगी जी के अनुमोदन बढकर 25 करोड़ व मोदी साहेब के अनुमोदन 24 करोड़ रह जाते है तो यह धारा सक्रीय हो जायेगी।
किन्तु अब भी यदि सांसद मोदी साहेब को ही पीएम बनाए रखना चाहते है तो मोदी साहेब ही पीएम बने रहेंगे। क्योंकि हमारे संविधान के अनुसार पीएम को चुनने और निष्कासित करने का अधिकार सांसदों को है, अत: हमने संविधान के अनुकूल ही यह अंतिम अधिकार सांसदों के पास ही रखा है।
तो सांसद चाहे तो योगी जी पीएम बना देंगे और फिर योगी जी अपनी कैबिनेट बनायेंगे। यदि सांसद चाहते है कि मोदी साहेब पीएम बने रहे तो मोदी साहेब ही पीएम बने रहेंगे।
विशेषता : इस ड्राफ्ट को लागू करने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है, सिर्फ गेजेट में निकालने से यह लागू हो जाएगा। इसे लोकसभा या राज्यसभा से भी पास करने की जरूरत नहीं है। इससे अस्थिरता इसीलिए नहीं आएगी क्योंकि पूरी सरकार को डिस्टर्ब नहीं किया गया है, सिर्फ पीएम बदला जा रहा है। और बदलने की शक्ति भी सांसदों के पास ही है। बस हमने इसमें जनता के अनुमोदन के सार्वजनिक प्रदर्शन को और जोड़ दिया है। इसमें वोटिंग नहीं है, बल्कि अनुमोदन है। अत: चुनाव आयोग का इसमें कोई दखल या लेना देना नहीं है।
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भारत में राईट टू रिकॉल कानून पीएम का क़ानून आने से देश में क्या परिवर्तन आएगा ?
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हमारे विचार में पीएम पर रिकॉल लाये बिना हम प्रधानमंत्री को जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, एमआरसीएम, वोइक, राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी आदि क़ानून गेजेट में छापने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। और बिना इन कानूनों के भारत की सेना को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता।
और यदि हम सेना को आत्मनिर्भर बनाने में असफल हो जाते है तो यह तय है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों एवं राष्ट्रिय सम्पत्तियों का अधिग्रहण करके भारत को आर्थिक-सामरिक-धार्मिक रूप से गुलाम बना देगी !! राईट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स लाये बिना इसे किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता !!!
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नाम : पवन कुमार शर्मा
पार्टी : राईट टू रिकॉल पार्टी
चुनाव चिन्ह : प्रेशर कुकर
ईवीएम पर मेरा नंबर : 4
मतदान की तारीख : 29 अप्रेल
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