Pawan Jury BhilwaraRj
वकील दो तरह के होते है :
1) एक वो जो पान के गल्ले पर भयंकर बहस करते है , सबूत दिखाते है , जबरदस्त दलीले देते लेकिन जज के सामने जाने पर कोने में चुपचाप खड़े हो जाते है।
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2) इस श्रेणी के वकील अपने तर्क अदालत में भी रखते है।
बाद में जब श्रेणी 1 के वकील केस हार जाते है तो उसी पान के गल्ले पर जाकर कहते है कि या तो जज बेवकूफ है या भ्रष्ट है और उसके साथ अन्याय किया गया है , आदि आदि !!
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छात्र भी दो तरीके के होते है :
1) ये घर पर तो खूब कोपियाँ भरते है , लेकिन परीक्षा कक्ष में उत्तर पुस्तिका सामने आने पर उसे घूरते रहते है , और उसे सफाचट छोड़ आते है।
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2) इस श्रेणी के छात्र घर पर कोपियाँ भरने के साथ साथ साथ उत्तर पुस्तिका में भी अपने उत्तर लिखकर आते है।
बाद में जब श्रेणी 1 के छात्र फेल हो जाते है तो पोपाट मचाते है कि मैंने साल भर बहुत मेहनत की है , मुझे सभी प्रश्नों के उत्तर पता थे लेकिन परीक्षक उल्लू था और मेरे साथ चीटिंग हुयी है।
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रोगी भी दो तरह के होते है :
1) जब इन्हें निमोनिया हो जाता है तो अपने सभी रिश्तेदारों और पडौसियो को तो बताते है , किन्तु इस बात का विशेष ध्यान रखते है कि इनके निमोनिया की भनक डॉक्टर न लगे। क्योंकि डॉक्टर की दवाई खाने से निमोनिया के ठीक होने का खतरा बढ़ जाएगा !!
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2) इस श्रेणी के रोगी अपने मर्ज के बारे में परिचितों के अलावा डॉक्टर को भी दिखाते है।
कार्यकर्ता भी दो तरीके के होते है :
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1) ये फेसबुक , व्हाट्स एप आदि पर 24*7 पूरा हल्ला मचाते है और पीएम को उलाहना देने के लिए दिन में दर्जन भर पोस्ट लिखते है कि पी एम यह नहीं कर रहा , वो नहीं कर रहा आदि आदि। लेकिन ये पीएम को कभी नहीं बताते कि उनकी मांग क्या है !! इनका मानना है कि पीएम को 24 घंटे उनकी फेसबुक आई डी पर निगाह रखनी चाहिए कि वे क्या मांग कर रहे है !! या फिर इनकी मान्यता होती है कि प्रधानमंत्री एक जिन्न है और उन्हें सब के मन की बात खुद से ही मालूम हो जाती है।
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2) ये कार्यकर्ता अपनी मांग फेसबुक , व्हाट्स एप लिखने के अलावा पीएम के सम्मुख भी रखते है।
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कहने का मतलब यह है कि यदि आप सरकार से कोई मांग कर रहे है तो कम से कम इसे सरकार के सामने तो रखना ही चाहिए। सरकार के सामने अपनी मांग रखे बिना पूरे भारत में इसके ढोल बजाने का कोई औचित्य नहीं है। अपनी मांग "सीधे" प्रधानमंत्री के सम्मुख रखने के दो तरीके है - a) ऑफ़ लाइन , b) ऑन लाइन। ऑनलाइन तरीको में @pmoindia पर ट्विट करना और पीएम की वेबसाईट newindia पर वोट करना आदि शामिल है। ऑफ़लाइन तरीको में सबसे प्रभावी और सस्ता तरीका है कि प्रधानमंत्री कार्यालय पर पोस्टकार्ड भेजा जाए।
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1) पी एम को पोस्टकार्ड क्यों भेजना चाहिए ?
क्योंकि पोस्टकार्ड भेजना देश के 90 करोड़ नागरिको के दायरे में है। जो लोग इंटरनेट पर नहीं है , जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है , जो दूर दराज इलाको में रहते है , और जो बेहद गरीब है वे भी सिर्फ एक रूपये शुल्क में आप अपनी मांग सीधे पीएम के सम्मुख पहुंचा सकते है।
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2) क्या प्रधानमंत्री इस पर कार्यवाही करेंगे ?
वो पीएम तय करेंगे कि उन्हें आपकी मांग पर विचार करना है या नहीं। लेकिन जब तक आप उन तक अपनी मांग ही नहीं पहुंचाएंगे तब तक आप यह नहीं कह सकते कि पीएम आपकी मांग पूरी नहीं कर रहे है।
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3) मेरी मांग लम्बी है। पोस्ट कार्ड पर नहीं आयेगी।
आप अपनी विस्तृत मांग का पीडीऍफ़ पीएम की वेबसाइट newindia पर रख सकते है , और इसका लिंक पोस्टकार्ड में डाल सकते है।
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4) किसी को पता कैसे लगेगा कि मैंने पीएम को पोस्टकार्ड भेजा है ?
आप पोस्टकार्ड का फोटो खींच कर फेसबुक एल्बम में डाल सकते है। इससे सभी यह देख सकेंगे कि आपने पोस्टकार्ड भेजा है।
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5) फेसबुक में एल्बम बना कर ही क्यों डालना है ?
क्योंकि वक्त के साथ साथ आप फेसबुक पर अन्य पोस्ट भी डालते जायेंगे और पोस्टकार्ड का आपका यह पोस्ट नीचे जाता जाएगा और 2-3 महीने बाद यह गुम जाएगा। तब कोई नया यूजर आपके ये पोस्टकार्ड नहीं देख पायेगा। जब वह इन्हें देख पायेगा तब ही वह भी पोस्टकार्ड भेजने के महत्त्व को समझेगा और पीएम को पोस्टकार्ड भेजेगा।
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सभी कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि अपनी फेसबुक पर , " (A093) सबूत : मैंने प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजकर इन कानूनों की मांग की है " नाम से एक एल्बम बनाए और उसके डिस्क्रिप्शन में इस विवरण को कॉपी करके रखे। यह कुछ सबसे जरुरी एल्बम में से एक है जो प्रत्येक कार्यकर्ता को बनाना चाहिए।
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इसी एल्बम में मैं इस बारे में अन्य विवरण भी रखूँगा कि क्यों हमें पीएम तक अपनी मांग "सीधे" पहुंचानी चाहिए और क्यों पीएम को पोस्टकार्ड भेजकर अपनी मांग रखना सबसे प्रभावी और सबसे महत्त्वपूर्ण गतिविधि है।
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