Pawan Jury BhilwaraRj
आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण ; तकनीकी रूप से इसमें से सामान्य वर्ग के हिन्दुओ को सिर्फ 3.5% आरक्षण मिलेगा !! और पेड मीडिया यह रिपोर्ट नहीं कर रहा है कि शेष आरक्षण किसे जा रहा है !!!
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2011 के सेंसस के अनुसार देश में 83% हिन्दू , 14.5% मुस्लिम और 2.5% ईसाई है। ( 83% में जैन , बौद्ध , और सिक्ख भी शामिल है )
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83% हिन्दुओ में से 51% ओ बी सी , 15% एस सी और 8% एस टी है।
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51+15+8 = 74% को पहले ही आरक्षण दिया जा चुका है, अत: इन्हें इसमें कोटा नहीं मिलेगा।
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तो 26% ( 100% - 74% = 26% ) आबादी आर्थिक आधार पर दिए गए इस आरक्षण के दायरे में आएगी।
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जिस 26% आबादी को 10% आरक्षण मिलेगा उसमे से 14.5 % आबादी यानी कि 55% आबादी मुस्लिम है, और 2.5% यानी 10% आबादी इसाई है !!
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8 लाख से कम आय वाला और 5 बीघा से कम कृषि भूमि धारण करने वाला व्यक्ति ही इस आरक्षण का पात्र होगा। सामान्य वर्ग में से भी एक बड़े वर्ग के पास ( ब्राह्मण , ठाकुर और महाजन ) भूमि होने और समृद्ध होने के कारण उनमे से ज्यादतर इस दायरे से बाहर रहेंगे जबकि मुस्लिम समुदाय का ज्यादातर वर्ग भूमि हीन और निम्न वर्गीय होने के कारण उनमे से ज्यादातर इस दायरे में आ जायेंगे !!
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मुस्लिम समुदाय को मुख्य धारा में लाने के लिए सरकार को उनकी शिक्षा का अच्छा प्रबंधन करना चाहिए , तकनिकी योग्यता बढाने वाली शिक्षा को सुलभ बनाना चाहिए और इस तरह के क़ानून छापने चाहिए जिससे सभी को निजी क्षेत्र में कारोबार करने के बराबर अवसर मिले। किसी तबके को उठाने के लिए सरकारी नौकरियों की रेवड़ी बांटने से किसी भी वर्ग का सर्वांगीण विकास नहीं किया जा सकता।
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बहरहाल न तो मैं आर्थिक आधार पर दिए गए इस आरक्षण का समर्थन करता हूँ न ही विरोध करता हूँ। मेरी तरफ से देश की सभी जातियों को उनके आबादी के अनुपात में 100% आरक्षण भी दे दिया जाये तो भी मुझे कोई ऐतराज नहीं है। मोदी साहेब ने 50% की सीमा तोड़ कर ऐतिहासिक कदम उठाया है और अब यह गाडी वैसे भी रुकने वाली नहीं है। कुछ ही सालो में ये लोग आरक्षण का दायरा 100% तक पहुंचा देंगे। चाहे पीएम मोदी साहेब बने या राहुल या केजरीवाल !! और अभी तो जातीय जनगणना के आंकड़े आने बाकी है। ये आंकड़े सामने आते ही पैन्डोरा बॉक्स खुल जाएगा।
बेरोजगारी की समस्या हल करने के लिए हमें ऐसे क़ानून चाहिए जिससे स्थानीय निर्माण इकाइयों में इजाफा हो और स्वरोजगार बढे। वेल्थ टेक्स , एम आर सी एम , राईट टू रिकॉल एवं जूरी सिस्टम को लागू करके भारत में बड़े पैमाने पर नौकरिया पैदा की जा सकती है। किन्तु सरकार इन कानूनों को छापने के लिए राजी नहीं है। इसकी जगह उनके पास जीएसटी , नोट बंदी और विदेशी निवेश है जिसके कारण बड़े पैमाने पर नौकरिया ख़त्म हो रही है। तो अब वे बैल को दुहने की कोशिश कर रहे है। पूरे देश की बेरोजगारी ख़त्म करने के लिए उनके पास सबसे अच्छा तरीका यही नजर आता है कि आरक्षण को बढाया जाए। ये बात अलग है कि लगातार सरकारी क्षेत्र की सेवाओं का निजिकारण किया जा रहा है , अत: सरकार के पास नौकरिया तो बची ही नहीं है। सिर्फ आरक्षण ही बचा है। यह कुहनी के गुड चिपकाने वाली बात है।
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आरक्षण की समस्या को कम करने के लिए मैंने राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , नारको टेस्ट इन पब्लिक समेत कई क़ानून प्रस्तावित किये है। इन कानूनों के आने से सरकारी विभागों से भ्रष्टाचार लगभग गायब हो जायेगा और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में भी लगभग 60% से 75% की कटौती हो जायेगी। मतलब तब काम भी करना पड़ेगा और पैसे भी उसी हिसाब से मिलेंगे। इससे आरक्षण के लिए सडको पर उतरने वालो संख्या अपने आप ही कम हो जायेगी।
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राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम के अलावा दलितों एवं अन्य सभी वर्गों की सहमती से आरक्षण की समस्या को कम करने के लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए यह सूची देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1954286854689541>
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