Pawan Jury BhilwaraRj
कोई भी प्रश्न करने पर संघ के कार्यकर्ता व्यक्ति पर शाखा में आने का दबाव क्यों बनाने लगते है ?
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आपने देखा होगा कि संघ के कार्यकर्ताओ की यह कॉमन प्रेक्टिस है कि जब भी उनसे किसी राजनैतिक , धार्मिक विषय पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा जाए और उनके पास कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब न हो तो वे हमेशा यह कहते नजर आते है कि -- आप शाखा में आइये !!
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इस पोस्ट में बताया गया है कि वे ऐसा क्यों कहते है।
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यदि कोई व्यक्ति यह बात जानता है कि वह ऐसी जानकारी देने वाला है जिसमे
1) विश्वसनीयता नहीं है , या / और
2) स्पष्टता नहीं है , या / और
3) जो तर्क पूर्ण नहीं है ,
तो इस प्रकार की भ्रमित करने वाली जानकारी देने वाला व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर सूचना नहीं देगा बल्कि व्यक्ति को खोबचे में ले जाकर सूचना देगा।
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यदि सूचना देना वाला व्यक्ति विभिन्न व्यक्तियों को एक ही प्रश्न के अलग अलग उत्तर और स्पष्टीकरण देना चाहता है तब भी वह खोबचे का इस्तेमाल करेगा , सार्वजनिक रूप से सूचना नहीं देगा।
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यदि सूचना देने वाला व्यक्ति जानता है कि उसके द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण झूठा है और ज्यादातर लोग इस पर भरोसा नहीं करेंगे तब भी सूचना देने वाला व्यक्ति सार्वजनिक मंच से बचेगा और आदमी को खोबचे में ले जाकर कन्विंस करने के कोशिश करेगा।
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दरअसल यह पूरा मामला कॉमन नोलेज न बनने देने का है। कॉमन नोलेज क्या है और यह कैसे काम करती है ?
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जब कोई सूचना इस तरह से दी जाती है कि सभी को यह सूचना एक साथ दी जाए और सूचना इस तरह से दी जाए कि सभी को यह भी मालूम हो जाए कि सभी को ठीक यही सूचना दी गयी है तो इस प्रकार दी गयी सूचना के बारे में कहा जा सकता है कि अमुक सूचना कॉमन नोलेज में आ गयी है। यह थोडा जटिल है, अत: इसे निचे दिए गए उदाहरण से समझिये।
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पहली स्थिती वह है --- जब संवाद ऐसे खोबचे में किया जाता है जहाँ सूचनाएं सिर्फ चयनित लोगो को ही दी जाती है , और चयनित व्यक्ति को ही भाग लेने का अवसर मिलता है। प्रत्यके व्यक्ति को इसमें भागीदारी का मौका नहीं मिलता। जैसे शाखा , या कोई बंद प्रकार की गुप्त मीटिंग , दो लोगो के बीच की टेलीफोन वार्ता आदि।
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दूसरी स्थिति वह है जब --- संवाद ऐसे मंच से किया जाता है जो सार्वजनिक है , और कोई भी व्यक्ति आकर सवाल जवाब पढ़ सकता है और खुद इसमें भाग भी ले सकता है। उदाहरण - फेसबुक , ट्विटर ( whatsapp इसमें शामिल नहीं है। क्योंकि whatsapp कॉमन नोलेज नहीं बनाता , सूचना को बाधित करने या चयनात्मक करने के लिए इसमें काफी विकल्प एवं रिस्ट्रिक्शन होते है।)
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फेसबुक पर पुछा गया प्रश्न - संघ राम मंदिर निर्माण क्यों नहीं करवा रहा है ?
संघी - आप शाखा में आइये।
अब जब आप शाखा में जायेंगे तो आपके सामने 10-12 संघ के कार्यकर्ता होंगे जिनका उद्देश्य आपको इस मुद्दे पर कन्विंस करना है कि संघ राम मंदिर निर्माण क्यों नहीं करवा रहा है, और वे सभी अलग अलग पैंतरे का इस्तेमाल करेंगे। चूंकि उनके पास इसका कोई सटीक जवाब नहीं है , अत: वे पहले इस बात को तौलेंगे कि किस तरह का जवाब आपको दिया जाना चाहिए कि आप चित हो जाए। उनके पास इस प्रश्न के लगभग दर्जन भर जवाब है , और वे व्यक्ति की मनोस्थिति , शिक्षा , विवेक , रुचि और भावनाओं का आकलन करके ऐसा जवाब पेश करेंगे जो प्रश्नकर्ता को सूट हो जाए। इस तरह सभी शाखाओं में आपको अलग अलग संघी से एक ही प्रश्न का अलग अलग जवाब सुनने को मिलेगा !!
शाखा में जाने के बाद -
शाखा में जाने के बाद किया गया प्रश्न : संघ राम मंदिर निर्माण क्यों नहीं करवा रहा है ?
संघीयों द्वारा जवाब :
01) राज्यसभा में बहुमत नहीं है।
02) मामला कोर्ट में है
03) कोंग्रेस इसमें अडंगा लगा रही है
04) देश में दंगे हो जायेंगे। ओवेसी और मुस्लिम देश जाम कर देंगे। क्या तुम चाहते हो कि मोदी साहेब के कार्यकाल में दंगे हो जाए !!
05) हिन्दू ही इसका विरोध कर रहे है। हिन्दुओ में एकता नहीं है , इसीलिए नहीं बन रहा।
06) संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। इसके लिए बहुमत नहीं है।
07) अभी विकास जरुरी है। मंदिर बनने से मोदी साहेब के सेकुलर वोट कट जायेंगे। क्या तुम चाहते हो मोदी साहेब के वोट कट जाए !!
08) संघ तो बोल रहा है कि अध्यादेश लाओ। पर मोदी साहेब बोल रहे है अभी रुको !!
09) बीजेपी के ही कुछ सांसद इसका विरोध कर रहे है। तो बिल गिर जाएगा। क्या तुम चाहते हो कि मोदी सरकार गिर जाये !!
10) अरुण जेटली , सुषमा स्वराज , गडकरी और आडवाणी की लोबी के सांसद मंदिर का अध्यादेश नही लाने दे रहे।
11) मंदिर की गुप्त तैयारी चल रही है। पत्थरों की कटवाई हो गयी है। गुम्बज का डिजाइन भी बन गया है। जल्दी ही बन जाएगा।
12) मोदी साहेब ने सुप्रीम कोर्ट जज से बात कर ली है। कोर्ट से ही बनवा देंगे। सरकार को कूदने की जरूरत न है।
13) एक मंदिर के चक्कर में क्या तुम राहुल गांधी को वोट दोगे !!
यदि संघीयों द्वारा यह जवाब फेसबुक पर दिया गया तो कोई न कोई व्यक्ति आकर यह बात बोल देगा कि मंदिर बनाने के लिए राज्यसभा में बहुमत की जरूरत ही नहीं है !!! और संघी सबके सामने एक्सपोज हो जाएगा। या कोई न कोई आकर बोल देगा कि कोर्ट से ही मंदिर बनाना था तो पहले तुमने मंदिर बनाने की सोगने क्यों खायी। कोर्ट को सोगंध खाने देते और उन्हें ही वोट लेने देते। अब हेंड टू हेंड तो वह स्टेंड बदल नहीं सकता !! इसीलिए वह यह जवाब खोबचे में देना पसंद करेगा। क्योंकि वह जानता है कि उसका जवाब भ्रमित करने वाला है और तर्क पूर्ण नहीं है !! तो वह शाखा में बुलाने के बाद यह देखते है कि प्रश्नकर्ता को मुद्दे की कितनी जानकारी है और किस जवाब से इसे बुत्ता दिया जा सकता है। और मान लीजिये कि संघी प्रश्नकर्ता को चरका न भी दे पाते है तो कम से कम वे सबके सामने एक्सपोज होने से तो बच ही जायेंगे। यदि प्रश्नकर्ता ने सार्वजनिक मंच पर संघी को एक्सपोज कर दिया तो वे अपनी फ्रेंड लिस्ट में सबके सामने एक्सपोज हो जायेंगे। इसीलिए वे हमेशा आपको खोबचे में यानी शाखा में बुलाकर जवाब देना पसंद करते है।
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एक सामान्य सिद्धांत यह है कि सार्वजनिक मामलों पर रुख सार्वजनिक रूप से ही व्यक्त किया जाना चाहिए। संघ के कार्यकर्ता मंदिर पर वोट इकट्ठे करने के लिए तो समस्त हिन्दुओ का इस्तेमाल करते है , किन्तु जब इस मुद्दे पर प्रश्न पुछा जाता है तो कहते है कि शाखा में आना , अकेले में बताएँगे !!
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संघी इसी तरीके का इस्तेमाल सभी मुद्दों जैसे बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ना , टू चाइल्ड लॉ लाना , आरक्षण आदि पर करते है। इनमे से किसी भी मुद्दे पर आप उनसे प्रश्न करिए , वे कहेंगे कि शाखा में आइये। फिर सभी शाखाओं में अलग अलग व्यक्तियों को वे अलग अलग जवाब देते है , और इस बात का कभी भी पता नहीं चलता कि उन्होंने किस व्यक्ति को क्या जवाब दिया है।
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मेरी जानकारी में कॉमन नोलेज राजनैतिक , सामाजिक और धार्मिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण सिद्धांत है। यदि किसी समाज में ऐसी प्रक्रियाएं होगी जिससे नागरिको के बीच कोमन नोलेज बढती है तो वहां गद्दारों , षड्यंत्रकारियो , झूठो , दगाबाजो , चापलूसों और बेईमानो की संख्या घटती चली जाती है। यदि कोमन नोलेज में कमी आती है तो षड्यंत्रकारी लोग विभिन्न व्यक्तियों को लम्बे समय तक भ्रमित करने में कामयाब हो जाते है।
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राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम एवं जनमत संग्रह की प्रक्रियाएं प्रशासन में सिर्फ इसीलिए सुधार लाती है क्योंकि ये सभी क़ानून नागरिको की कॉमन नोलेज बढाते है। यदि किसी समाज या देश में ऐसी कोई प्रक्रिया लागू है जो जूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल से भी ज्यादा तेजी और प्रभावशाली तरीके से कॉमन नोलेज बनाती है तो वह देश उस देश से भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा जिस देश में राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम लागू है। किन्तु अब तक ऐसी कोई प्रक्रिया प्रक्रिया ज्ञात नहीं है जो राईट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम से भी अधिक तेजी से कॉमन नोलेज बढ़ाती हो।
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कॉमन नोलेज के बारे में अन्य विवरण के लिए इस एल्बम को फोलो करें और इस एल्बम के अन्य पोस्ट देखें।
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