> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-01-02

Pawan Jury BhilwaraRj

क्या भारत में सैन्य विद्रोह द्वारा तख्ता पलट हो सकता है ?
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बिलकुल हो सकता है। पुलिस के अलावा भारत के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के पास या नागरिको के पास सेना को रोकने के लिए हथियार नहीं है !!
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वास्तविक अर्थो में भारत में सबसे ताकतवर संस्था सेना है। सेना के पास हथियार है , हथियार चलाने का प्रशिक्षण है, आदेशो का पालन करवाने और आदेश देने के लिए पद सोपान प्रक्रिया है और वांछित अनुशासन है। दुसरे नंबर पर सबसे शक्तिशाली संस्था पुलिस है। किन्तु भारत की पुलिस के पास सेना की तुलना में नगण्य हथियार है , अत: यदि सेना टेक ओवर करती है , और पुलिस सेना का विरोध करती है तो पुलिस सेना के सामने कुछ घंटें भी नहीं टिकेगी।
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भारत की सेना जनरल के कंट्रोल में है ,और जनरल पीएम से आदेश लेता है। यदि सेना के कनिष्ठ अधिकारी यह मानने लगते है कि भारत का प्रधानमन्त्री भ्रष्ट या निकम्मा है और देश को गड्ढे में धकेल रहा है , या फिर उन्हें यह लगने लगता है कि पीएम को हटा दिया जाना चाहिए , और यदि ऐसे में जनरल अपने कुछ वरिष्ठ अधिकारियो के साथ मिलकर तख्ता पलट की योजना बनाता है तो जनरल भारत में तख्ता पलट करने में सफल हो सकता है। या मान लो कि जनरल का मूड बन जाता है और यदि जनरल अपने अधीनस्थ अधिकारियो के साथ तख्ता पलट की कोशिश करता है तो उसे रोकने वाला कोई नहीं है है !!
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ऐसी स्थिति में सेना को सिर्फ भारत के नागरिक ही रोक सकते है, किन्तु भारत के नागरिक हथियार विहीन है , अत: यदि भारत की सेना विद्रोह कर देती है , तो भारत के नागरिको को फौजी शासन स्वीकार करना होगा। यदि नागरिक सेना के खिलाफ छुट पुट प्रदर्शन करते है तो सेना फायरिंग खोल कर उन्हें आसानी से दबा सकती है। 100-200 नागरिको के गोलियां लगने के बाद नागरिक समझ लेंगे कि प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं है। और तब सेना खुद को राष्ट्रवादी और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी बता कर मामला रफा दफा कर सकता है।
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भारत में निरंतर चुनाव होने , जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। क्योंकि जनरल को यह संदेह रहता है कि तख्ता पलट में कनिष्ठ अधिकारी एवं सैनिक जनरल का साथ देंगे या नही। किन्तु यदि कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहते है तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर , बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करवाकर , असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल आसानी से तख्ता पलट कर सकेगा।
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जिस देश में राजनेता बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण से बाहर होने लगते है और वे नेताओं को काबू नहीं कर पाते तो ऐसे हालात में विदेशी ताकतें ( विशेष तौर पर अमेरिका ) देश को कंट्रोल में लेने के लिए सेना का इस्तेमाल करती है। भारत में फिलहाल ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं है क्योंकि भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों के सभी नेता पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथो बिके हुए है अत: उन्हें अपना एजेंडा भारत में लागू करने के लिए सेना की जरूरत नहीं है।
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हालांकि भारत में दो बार ऐसे हालात बने थे जब सेना द्वारा तख्ता पलट की कमजोर सम्भावना होने के संकेत मिलते है।
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1) जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन शुरू किया , बैंको का राष्ट्रीयकरण कर दिया , पाकिस्तान के दो टुकड़े किये और अमेरिका के आगे झुकने से इनकार कर दिया तो अमेरिका ने पहले उन्हें भ्रष्ट जजों ( इलाहाबाद का हाई कोर्ट जज जगमोहन लाल सिन्हा ) के माध्यम से गिराने की कोशिश की। जब इंदिरा जी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर ताले लगवा दिए तो उन्होंने इंदिरा जी का तख्ता पलटने के लिए सेना को एप्रोच करना शुरू किया था। तब जेपी ने दो बार सार्वजनिक रूप से ऐसी अपील की थी कि यदि इंदिरा गांधी सेना को कोई गलत आदेश देती है तो सेना को उसका पालन करने से मना कर देना चाहिए। और जब पानी सर से ऊपर निकल गया तो इंदिरा जी ने आपातकाल लगाकर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया था।
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2) जब देश मनमोहन सिंह से उकताया हुआ था तब , 2012 में जनरल वी के सिंह के कार्यकाल के दौरान हिसार में तैनात "33 आर्म्ड रेजिमेंट" एवं आगरा की "50 पैरा ब्रिगेड" ने दिल्ली की और कूच किया था। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे रिपोर्ट किया था. घटना उस दिन से एक दिन पहले की है जब वी के सिंह को अपने जन्म प्रमाण पत्र से सम्बन्धित मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था। सरकार को, रक्षा मंत्रालय को और गृह मंत्री को इस मोबिलाईजेशन की कोई जानकारी नहीं थी। लगभग 18 घंटे तक सरकार असमंजस में बनी रही। प्रोटोकोल के अनुसार बिना रक्षा मंत्री की अनुमति के सेना की कोई भी टुकड़ी दिल्ली की और नहीं बढ़ सकती। बाद में सेना ने स्पष्टीकरण दिया कि यह एक रूटीन एवं औचक प्रोसीजर था। सरकार ने यह बात मानी कि उन्हें नोटिफाईड नहीं किया गया था , किन्तु सरकार ने किसी भी प्रकार के कू ( coup ) की सम्भावना को सिरे से नकारा। लिंक - Army moved two units towards Delhi : <https://goo.gl/rszddU>;
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लोकतंत्र की जननी हथियारबंद नागरिक समाज है। जिस देश के नागरिको की शक्ति उस देश की सेना से अधिक बढ़ जाती है , वहां किसी भी स्थिति में लोकतंत्र का निलम्बन नहीं किया जा सकता। भारत के नागरिक हथियार विहीन है , और यदि सेना विद्रोह कर देती है तो नागरिको के पास उन्हें रोकने के लिए चाकू और नेल क़टर ही है। ब्रिटिश ने सिर्फ 1 लाख बन्दुक धारियों के माध्यम से भारत के 40 करोड़ नागरिको को 200 सालो तक अपने कंट्रोल में रखा। भारत में 17 लाख की सेना है और सभी हथियारों से लेस है। तो मुकाबले की बात तो भूल ही जाइए। अत: भारत में यदि सेना तख्ता पलट नहीं कर रही है , तो यह केवल चांस की बात है। यदि सेना तख्ता पलट कर देती है तो हम नागरिक "लोकतंत्र वापिस लाओ" के नारे लगाने के सिवा कुछ नहीं कर सकते।
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क्या अमेरिका में सेना द्वारा तख्ता पलट किया जा सकता है ?
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अमेरिका में 40 करोड़ की आबादी है , और उसमे से 36 करोड़ के पास बंदूके है !!! मतलब अमेरिका के नागरिको की शक्ति वहां से सेना से भी ज्यादा है। यदि अमेरिका की सेना तख्ता पलट करने का प्रयास करती है तो वह टेक ओवर नहीं कर पाएगी , क्योंकि वहां के नागरिक अगले 24 घंटो में सेना को कंट्रोल करके फिर से लोकतंत्र की स्थापना कर देंगे। इसके अलावा अमेरिका के नागरिको के पास जूरी सिस्टम के रूप में अपनी खुद की न्याय प्रणाली भी है, अत: वे जजों और अदालतों के भरोसे नहीं बैठे है।
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यदि भारत को हर हाल में हमेशा के लिए लोकतंत्र जिन्दा रखना है तो "हथियारबंद नागरिक समाज" की रचना के सिवाय कोई मार्ग नहीं है। क्योंकि खतरा सिर्फ खुद की सेना से ही नहीं है। यदि हमारा युद्ध चीन से हो जाता है और अमेरिका हमें हथियार देने से मना कर देता है तो चीन की सेना हमारे शहरो में घुस आएगी और तब भारत में तख्ता पलट चीन की सेना द्वारा होगा। ऐसी स्थिति में फिर से हमें सिर्फ *हथियारबंद नागरिक समाज* ही बचा सकता है। ब्रिटिश हमें इसीलिए टेक ओवर कर पाए थे क्योंकि भारतीयो के आम नागरिको के पास हथियार नहीं थे। कुल मिलाकर "हथियारबंद नागरिक समाज" की रचना करना ही एक मात्र रास्ता है जिससे देश की आजादी एवं लोकतंत्र को हमेशा के लिए अक्षुणन रखा जा सकता है। अन्य कोई उपाय नहीं।
भारत में हथियार बंद नागरिक समाज की रचना के प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ देखें -<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/549842378527294>;
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#WeaponizationOfCommons , #Coup , #IndianArmyCoup
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