Pawan Jury BhilwaraRj
मैंने राईट टू रिकॉल के जो क़ानून प्रस्तावित किये है , उनकी मुख्य विशेषताएं :
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1) पॉजिटिव रिकॉल - जब किसी अधिकारी / नेता को रिकॉल किया जाएगा तो उसे किसी दूसरे नेता / अधिकारी द्वारा बदला जाएगा। यह पॉजिटिव रिकॉल है। इसमें किसी अधिकारी को सिर्फ हटाया नहीं जाता , बल्कि उसे किसी अन्य अधिकारी द्वारा बदला जाता है। मतलब, यदि नागरिक A को हटाना चाहते है तो उन्हें पहले B या C या D या किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बहुमत प्रदर्शित करना होगा। सिर्फ तब ही A को हटाया जा सकेगा। जब तक नागरिक किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बहुमत प्रदर्शित करने में असफल रहते है , तब तक A की नौकरी चालू रहेगी।
उदाहरण - मान लीजिये राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री का क़ानून आने के बाद मोदी साहेब को 33 करोड़ , राहुल गांधी को 8 करोड़ , केजरीवाल को 2 करोड़ , राजनाथ सिंह को 4 करोड़ , सुब्रह्मनियम स्वामी को 1 करोड़ और नितीश कुमार को 3 करोड़ वोट मिलते है, तो मोदी साहेब प्रधानमंत्री होंगे। किन्तु मोदी साहेब को तब तक प्रधानमंत्री की नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा , जब तक कि इनमे से किसी एक प्रत्याशी के वोटो की संख्या मोदी साहेब के वोटो से 1 करोड़ ज्यादा यानी कम से कम 34 करोड़ न हो जाए। पॉजिटिव रिकॉल होने से प्रशासन में स्थिरता बनी रहती है। जबकि नेगेटिव रिकॉल से अस्थिरता आ सकती है.
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2) अनुमोदन करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी - मैंने राइट टू रिकॉल की जो प्रक्रिया दी है , उसमे अनुमोदन दर्ज करवाने की सुविधा 365 दिन और 24 घंटे चालू रहेगी। मतलब कोई भी नागरिक किसी भी दिन किसी उम्मीदवार के पक्ष में अपना अनुमोदन दे सकता है , और रद्द भी कर सकता है। उदाहरण के लिए मान लीजिये कि आपने पीएम के लिए केजरीवाल को वोट किया है , किन्तु आपको लगता है कि मोदी साहेब प्रधानमंत्री के रूप में अच्छा काम कर रहे है , तो आप किसी भी दिन केजरीवाल को दिया गया अपना अनुमोदन रद्द करके मोदी साहेब को दे सकते है , और यदि आप मोदी साहेब को हटाना चाहते है तो किसी भी दिन मोदी साहेब को दिया गया अपना अनुमोदन रद्द करके किसी दूसरे प्रत्याशी को दे सकते है।
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यदि आप अपना अनुमोदन 5 वर्ष से पहले बदलना चाहते है तो आपको पटवारी कार्यालय में जाकर 3 रूपये देकर अपना अनुमोदन बदलवाना होगा। बाद में पीएम मोबाइल फोन द्वारा भी अनुमोदन दर्ज करवाने का सिस्टम बना सकते है। इस प्रावधान के कारण वोट लेने के लिए मतदाता को धमकाना , उनके पांवो में लौटना और उन्हें पैसा देकर उनका मत प्रभावित करने की परिपाटी एकदम से ख़त्म हो जायेगी। क्योंकि अब मतदाता किसी भी दिन अपना अनुमोदन बदल सकता है। इस तरह राईट टू रिकॉल आने से रोज चुनाव नहीं होंगे, लेकिन अनुमोदन दर्ज करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। जिसे अपना अनुमोदन दर्ज करना है , वे जब चाहे अपना अनुमोदन दर्ज करवा सकते है।
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पवन कुमार शर्मा - राईट टू रिकॉल कानूनों के लिए भीलवाड़ा विधानसभा से प्रत्याशी
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm क्रम - 15
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