> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-08-28

Pawan Jury BhilwaraRj

मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत का कहना है -- बैलेट पर लौटना मतलब बूथ केप्चरिंग !!
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यदि देश के नागरिको के पास चुनाव आयुक्त को लात मारकर नौकरी से निकालने का अधिकार मतलब राईट टू रिकॉल होता तो रावत नागरिको को इस तरह मूर्ख बनाने का प्रयास न करते।
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दरअसल रावत यह बात छुपा रहे है कि -- बैलेट बॉक्स का एक बूथ लूटना आसान है , किन्तु इससे "बड़े पैमाने" पर धांधली नहीं की जा सकती। जबकि ईवीएम से "बहुत बड़े पैमाने" पर चुपचाप धांधली की जा सकती है।

१. जब बेलेट बॉक्स ( बूथ ) लूटे जाते है तो यह छुपता नही है । घटना सामने आती है , और अमुक बूथ के चुनाव रद्द कर दिए जाते है । जबकि ईवीएम हेक की जाती है तो कभी भी मालूम नही हो सकता कि मत बदल दिए गए है ।
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२. तकनीकी के कारण बूथ केपचरिंग अब आसान नही रह गयी है । तब की बात और थी । संवेदन शील बूथो पर CCTV लगा देने से बूथ केपचरिंग की सम्भावना नगण्य हो जाती है । जबकि ईवीएम मेनपुलेशन को रोकने का कोई उपाय नही है । और मेनिपुलेशन को कभी साबित भी नही किया जा सकता !!
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३) एक बूथ लूटने के लिए १५-२० हथियार बंद गुंडो की ज़रूरत होती है । यदि १००० बूथ लूटने हो तो १५-२० हज़ार गुंडो की ज़रूरत होगी । जो कि अव्यवहारिक है । जबकि २० तकनीकी एक्सपर्ट मिलकर हज़ारों बूथ की ई वी एम् को मेनिपुलेट कर सकते है । और समस्या यह है कि जनता को कभी भी मालूम नही हो सकता कि ईवीएम के साथ छेड़खानी कर दी गयी है ।
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इस तरह ईवीएम में “बड़े पैमाने” पर चुपचाप वोट बदले जा सकते है , बेलेट बॉक्स में नही । "बड़े पैमाने" पर छेड़खानी मह्त्त्व्पूर्ण विषय है । छेड़खानी नही ।
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