> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-08-21

Pawan Jury BhilwaraRj

नोटा दबाने से बेहतर है कार्यकर्ताओ को ऐसी छोटी पार्टियों या निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देना चाहिए जिन्होंने समाधान के लिए कानूनी ड्राफ्ट्स का प्रस्ताव किया है।
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नोटा के वोटो को चुनाव आयोग कैसे देखता है ?
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मान लीजिये कि किसी निर्वाचन क्षेत्र में 100 मतदाता है। यदि 97 मतदाता नोटा दबाते है और उम्मीदवार X को 1 एवं Y को 2 वोट मिलते है तो उम्मीदवार Y विजयी घोषित किया जाएगा। क्योंकि चुनाव आयोग नोटा के वोटो को "निरस्त" वोटो में गिनता है।
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चुनाव आयोग का नोटा के पक्ष में यह तर्क है कि , नोटा के कारण राजनैतिक पार्टियों पर "अच्छे उम्मीदवार" उतारने का दबाव पड़ेगा। यह बिलकुल बेसिर पैर का तर्क है। क्योंकि चुनाव आयोग नोटा के वोटो को रद्द मानकर चलता है। तो जीत हार का फैसला इसी आधार पर होगा कि किस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिले है।
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तकनीकी रूप से नोटा दबाने वाला व्यक्ति यह कहता है कि मैं किसी को चुनना नहीं चाहता। लेकिन तथ्य यह है कि तब भी वे लोग चुन लिए जायेंगे जिन्हें आप चुने हुए नहीं देखना चाहते। नोटा इस परिस्थिति में कोई भी बदलाव लेकर नहीं आता। और न ही नोटा की संख्या बढ़ने से किसी राजनैतिक पार्टी को कोई फर्क आता है। दबाव बनना तो दूर की बात है।
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राईट टू रिकॉल इससे कहीं ज्यादा ताकतवर व्यवस्था है। राईट टू रिकॉल में मतदाताओ के पास यह विकल्प रहता है कि वह चुन कर आये बदतर व्यक्ति को किसी भी समय नौकरी से निकाल सकते है। पद चले जाने का यह भय जनप्रतिनिधि के व्यवहार में परिवर्तन लाता है और वह अपना काम काज सुधारने लगता है। मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह एक रहस्य भरा प्रश्न है कि नोटा का समर्थन करने वाले कार्यकर्ता जब यह मानते है कि सारे उम्मीदवार बुरे है अत: हम नोटा दबायेंगे तो वह कौनसी चीज है जो उन्हें राईट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन करने से रोकती है !! क्योंकि राईट टू रिकॉल क़ानून नोटा का प्रचार करने वाले इन मतदाताओं को यह अधिकार देता है कि वे उन बुरे उम्मीदवारों को नौकरी से निकाल कर किसी अच्छे उम्मीदवार को चुन सके। वो भी किसी भी समय। 5 साल इन्तजार किये बिना !!
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तो नोटा का समर्थन करने वाले कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि वे राईट टू रिकॉल कानूनों का समर्थन करें। क्योंकि सिर्फ राईट टू रिकॉल क़ानून ही इस सर्कस से छुटकारा दिला सकता है। यदि आपको कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो आप नोटा को वोट करें लेकिन साथ ही नागरिको में राईट टू रिकॉल कानूनों का भी प्रचार करें। क्योंकि नोटा बुरे उम्मीदवारों को आपका शासक बनने से रोकने में सक्षम नहीं है।
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मेरा मानना है कि नोटा के समर्थक कार्यकर्ताओ में से जो कार्यकर्ता चुनाव में खड़े हो सकते है उन्हें खुद चुनाव में खड़े होकर मतदाताओं को विकल्प देना चाहिए। यदि वे चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है तो उन्हें किसी ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार या छोटी पार्टी के उम्मीदवार को वोट करना चाहिये जिसने समाधान के लिए लिखित कानूनी ड्राफ्ट दिए है। इससे नए एवं अच्छे उम्मीदवारों को हौंसला बढेगा, और आने वाले चुनावों में ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
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बहरहाल , यदि आपके क्षेत्र में ऐसा कोई उम्मीदवार नहीं है जिसने समाधान के कानूनी ड्राफ्ट दिए है तो नोटा दबाना ही एकमात्र विकल्प हो सकता है। लेकिन इस बात पर ध्यान देना जरुरी है कि नोटा बुरे उम्मीदवार को चुनाव जीतने से नहीं रोकता और न ही अच्छे उम्मीदवार को बढ़ावा देता है। यदि आप अच्छे उम्मीदवारो को मैदान में लाना चाहते है तो या तो खुद चुनाव लड़े या फिर उन नन्हे उम्मीदवारों को वोट करे जो आपकी नजर में बड़ी पार्टियों की तुलना में कम बुरे है। और इस बात को समझ लेना सबसे जरुरी है कि हर स्थिति में राईट टू रिकॉल अंतिम इलाज है। क्योंकि राईट टू रिकॉल ही अच्छे उम्मीदवार को चुन लिए जाने के बाद बुरा बनने से रोकता है।
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मेरे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए इस लिंक पर जाए ---- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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