> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-08-02

Pawan Jury BhilwaraRj

FAQ on newindia. in
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व्यक्तियों के सुझाव आमंत्रित करने वाली प्रधानमन्त्री की अधिकृत वेबसाईट newindia को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :
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1) क्या कार्यकर्ताओ को newindia पर अपनी मांग रखनी चाहिए ?
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कार्यकर्ताओ को दो दिशाओं में काम करना होता है -- 1) नागरिको में अपनी मांग का प्रचार करना , और 2) मुख्य नीति नियंता यानि प्रधानमंत्री तक अपनी मांग पहुँचाना। प्रधानमंत्री से आपको अपनी बात कहनी है तो फिलहाल newindia ही एक मात्र सबसे सटीक , सबसे सस्ता और सबसे द्रुत अधिकृत विकल्प है। कोई भी व्यक्ति अपनी मांग का विस्तृत पीडीऍफ़ 5 मिनिट में पीएम तक पहुंचा सकता है। पीएम उस पर ध्यान दे या न दे यह अलग विषय है। किन्तु तब आप कह सकते है, आपने अपनी मांग पीएम को भेज दी है। इसीलिए जो भी कार्यकर्ता नागरिको में अपनी मांग उठा रहे है उन्हें सबसे पहले पीएम को इस बारे में सूचित करना चाहिए।
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2) हम ये मांग फेसबुक और ट्विटर के जरिये भी तो भेज सकते है ?
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फेसबुक / ट्विटर भारत सरकार नहीं चलाती है, न ही भारत सरकार ने यह कहा है कि व्यक्ति कोई सुझाव देना चाहे तो वे फेसबुक / ट्विटर पर भेजे। फेसबुक ट्विटर आदि नागरिको के "आपसी संवाद" के मंच है। इन मंचो पर पीएम भी एक नागरिक की हैसियत से है। पर newindia अधिकृत है। अत: आप पीएम को ट्विट भी करें , उनके फेसबुक पेज पर भी अपनी मांग लिखें , लेकिन यदि आप newindia पर अपनी मांग नहीं रखेंगे तो जब पीएम आपसे पूछ सकते है कि मैंने सुझाव भेजने के लिए newindia बनाया है , और आपने मुझे वहां पर अपनी मांग क्यों नहीं भेजी है। तो जब आपने मुझे कोई मांग ही नहीं भेजी तो मुझसे क्या उम्मीद कर रहे है।
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यदि आप कहेंगे कि मैंने आपके फेसबुक पेज पर यह मांग भेजी थी , तो वे आपसे कह सकते है -- "मैं जुकेरबर्ग नहीं हूँ" !! पीएम कहेंगे कि "newindia पर आये हुए सुझावो की स्क्रूटिनी के लिए मेरे पास सरकारी स्टाफ है , और वह वेबसाईट मेरे नियंत्रण में है। लेकिन फेसबुक मेरे अधीन नहीं आती, इसीलिए वह मेरे शासन का अंग नहीं है। जुकेरबर्ग कारोबारी आदमी है , कल यदि वह अपना कारोबार समेट कर चल देता है तो मैं उसे कैसे रोकूंगा। जिस तरह कोई मामला होता है तो आप थाने में जाकर मुकदमा दर्ज करवाते है किसी परचून कि दूकान पर नहीं , उसी तरह से सरकार ने जिस काम के लिए जो व्यवस्था बनायी है , कृपया उसका इस्तेमाल करेंगे तो आपको और मुझे दोनों को सुविधा रहेगी।"
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3) लेकिन newindia पर सरकार जब चाहे तब किसी भी प्रस्ताव को डिलीट भी तो कर सकती है ? इसका क्या उपाय है ?
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वो तो फेसबुक और ट्विटर भी डिलीट कर सकता है, और आप कुछ नहीं कर सकते। लेकिन यदि newindia पर सरकार आपका प्रस्ताव डिलीट कर देती है तो आप फेसबुक / ट्विटर / व्हाट्स एप आदि का इस्तेमाल करके नागरिको तक यह बात पहुंचा सकते है कि सरकार ने आपके प्रस्ताव को डिलीट किया है। अत: जब आप प्रस्ताव रखें तो उसका स्क्रीन शॉट ले ले। जब वह गायब हो जाता है तो आप newindia पर इस शिकायत का प्रस्ताव अपलोड कर सकते है , तथा साथ ही पीएमओ / वेबसाईट एडमिन आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते है। तब इस मामले की जाँच हो सकती है। जैसे कि जब पुलिस आपकी ऍफ़ आई आर दर्ज नहीं करती तो आप मीडिया में जाते है , या उच्च अधिकारी को शिकायत करते है। इससे सरकार पर दबाव बनेगा और वे लोगो के सामने एक्सपोज होंगे।
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तो जैसे मुकदमो के लिए हमारे पास थाने-अदालते है , विद्युत् के लिए बिजली विभाग है , पानी के लिए जल बोर्ड है , इलेक्शन के लिए चुनाव आयोग है, उसी तरह से पीएम को सुझाव भेजने के लिए सरकारी व्यवस्था अब newindia है।
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4) लेकिन newindia पर कोई भी व्यक्ति फर्जी आई डी बनाकर अपना प्रस्ताव अपलोड कर सकता है।
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इसमें कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। फेसबुक , ट्विटर आदि पर भी ऐसा ही है। यदि मांग ठीक है तो यह बात गौण हो जाती है कि यह प्रस्ताव किसने दिया है। तात्कालिक उपाय यह है कि जब आप newindia पर आई डी बनाए एवं अपना प्रस्ताव अपलोड करें तो डिस्क्रिपशन में अपना वोटर आई डी, आधार नम्बर या अपने फेसबुक प्रोफाइल का लिंक डाल सकते है , एवं newindia की आई डी पर अपना रियल फोटो भी लगा सकते है। तो इस तरह जो भी आपका प्रस्ताव देखेगा वह यह जान सकेगा कि आप वास्तविक व्यक्ति है या नहीं।
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और पीएम तो आपकी आई डी को वोटर नम्बर या आधार से वेरीफाई कर सकते है। यदि आप अपनी आई डी मोबाईल OTP से लॉग इन करेंगे तो पीएम को यह सूचना रहती है कि प्रस्तावक वास्तविक व्यक्ति है। उदाहरण के लिए मैंने जब newindia पर अपनी आई डी बनायी तो आधार लिंक्ड मोबाईल नम्बर से लॉग इन किया एवं अपना वास्तविक पता लिखा। तो पीएमओ को यह पता है कि यह प्रस्ताव करने वाला व्यक्ति वास्तविक है। और मेरा मानना है कि किसी भी प्रस्ताव की विश्वसनीयता खुद प्रस्ताव में निहित होती है , प्रस्ताव करने वाले में नहीं। एक वास्तविक और ऊँचा आदमी भी बकवास प्रस्ताव कर सकता है , और एक अनजान व्यक्ति भी अच्छे प्रस्ताव दे सकता है। यदि प्रस्ताव अच्छे और जन हित के है तो लोग उन्हें अपनाएंगे चाहे ये प्रस्ताव किसी भी माध्यम से उन्हें मिले वर्ना वे इन्हें खारिज कर देंगे।
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5) क्या newindia पर रखे गए किसी प्रस्ताव / मांग पर हमें वोट करना चाहिए ?
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यदि कोई कार्यकर्ता कोई मांग पीएम के सम्मुख newindia पर रखता है और आप उस मांग का समर्थन करते है तो आपको इस प्रस्ताव पर वोट करना चाहिए। वोट करने से आपका समर्थन पीएम के सम्मुख दर्ज हो जाएगा। यदि आपने आधार लिंक्ड मोबाईल से OTP द्वारा लॉग इन किया है तो पीएम को यह पता रहेगा कि आप वास्तविक वोटर है। नागरिको को यह सूचना देने के लिए कि आपने इस मांग का समर्थन किया है , आप अपने द्वारा किये गए वोट को अपनी फेसबुक वाल पर शेयर कर सकते है , और इसका स्क्रीन शॉट अपने फेसबुक एल्बम में रख सकते है। इस तरह पीएम एवं नागरिक दोनों को यह मालूम होगा कि आपने इस मांग का समर्थन पीएम के सामने किया है।
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वैसे भी आज भारत में वोट करने के लिए आपके पास सिर्फ दो ही अधिकृत तरीके है -- a) मतदान b) newindia , मतदान तो आप 5 वर्ष में एक बार ही कर सकते है , किन्तु इस बीच यदि आप पीएम से कोई मांग करना चाहते है और आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते है तो newindia ही एक मात्र विकल्प है। ईसीलिये यदि आप newindia पर रखे गये किसी प्रस्ताव से सहमत है तो इस पर वोट करें।
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6) क्या newindia पर वोटिंग की कोई वेल्यु है ?
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नहीं। newindia पर की गयी वोटिंग की कोई कानूनी वैल्यू नहीं है। वजह यह है कि newindia पर कोई भी व्यक्ति हजारो फर्जी इमेल द्वारा किसी प्रस्ताव पर हजारो वोट डाल सकता है। ऐसी फर्जी वोटिंग को रोकने की newindia पर कोई व्यवस्था नहीं है। किन्तु newindia पर रखे गए प्रस्ताव पर वोटिंग करने के 4 लाभ है --
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a) प्रधानमंत्री यह जान सकते है कि कितने वोट वास्तविक है , और कितने फर्जी है।
b) वोट करने वाला यह जानता है कि उसने पीएम द्वारा उपलब्ध कराई गयी व्यवस्था पर किसी मांग का समर्थन कर दिया है। और यदि उसने मोबाईल OTP से लॉग इन किया है तो वह यह भी जानता है कि पीएम को पता है कि मैं वास्तविक वोटर हूँ।
c) व्यक्ति अपने वोट का स्क्रीन शॉट अपने फेसबुक प्रोफाइल / ट्विटर पर रख सकता है। जिससे वह यह बात साबित कर सकता है कि उसने अमुक प्रस्ताव को समर्थन दिया है।
d) वोट करने वाला व्यक्ति किसी अपने परिचित अन्य व्यक्ति के सामने यह साबित कर सकता है कि उसने पीएम के सम्मुख अमुक मांग का समर्थन किया है।
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मेरा मानना है कि , यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक newindia का इस्तेमाल करना शुरू करेंगे तो पीएम पर यह दबाव बनेगा कि वे इसमें आवश्यक सुधार लेकर आये। उदाहरण के लिए पीएम यह नियम बना सकते है कि newindia पर प्राथमिक लॉग इन सिर्फ आधार लिंक्ड मोबाईल से ही की जा सकेगी। इससे फर्जी वोटिंग या फर्जी आई डी की समस्या एक ही दिन में ख़त्म हो जायेगी। या पीएम मौजूदा यूजर्स को मेल भेजकर अपनी आई डी को आधार से लिंक करने को कह सकते है। या ऐसा आदेश निकाल सकते है कि कोई भी व्यक्ति पटवारी कार्यालय में जाकर अपना प्रस्ताव newindia पर अपलोड करवा सके। इस तरह इस वेबसाईट को कुछ ही हफ्तों में सुधार कर बहुत ही उपयोगी बनाया जा सकता है। किन्तु यह दबाव बनाने के लिए यह आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा यूजर्स newindia का इस्तेमाल करना शुरू करें।
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7) newindia का इस्तेमाल करके बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक और प्रधानमन्त्री गलत कानूनों को देश में लागू करवा सकते है और इसका ठीकरा जनता पर फोड़ सकते है।

कृपया अपनी बात को स्पष्ट कीजिये कि वे ऐसा कैसे करेंगे।
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8) वे अपने संसाधनों एवं आई टी सेल का इस्तेमाल करके करोड़ो फर्जी आई डी बनाकर किसी बुरे क़ानून पर करोड़ो फर्जी समर्थन दिखा देंगे और फिर पीएम कहेंगे कि मैंने यह क़ानून जनता के समर्थन से लागू किया है।

जितने भी लोग newindia के बारे में जानते है वे यह भी जानते है कि newindia पर फर्जी वोटिंग की जा सकती है। पीएम से लेकर नागरिको तक सबको इस बात का पता है। यह खुली हुयी बात है। अत: पीएम यह नहीं कह सकते कि मैंने अमुक क़ानून newindia पर आये समर्थन के आधार पर लागू किया है। और यदि फिर भी वे यह बात कहते है तो देश के नागरिक उनसे यह बात पूछेंगे कि फर्जी वोटिंग को बढ़ावा देने वाली साईट पर आप कोई क़ानून कैसे बना सकते है ? इस तरह पीएम newindia का सहारा लेकर कोई क़ानून नहीं बना सकते। किन्तु यदि वे ऐसा करते है तो उन पर यह दबाव बन जाएगा कि वे newindia में फर्जी वोटिंग रोकने का सुधार लेकर आये।
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9) जब newindia पर फर्जी वोटिंग हो सकती है और इस पर कोई कितना भी वोट करे उससे कोई प्रस्ताव पास नहीं होता तो हम क्यों newindia पर अपनी मांगे रखे और क्यों इस पर वोट करे ?

दो कारण है --

a) क्योंकि पीएम का कहना है कि यदि आपके पास कोई सुझाव है तो मुझे newindia पर भेजिए। तो यदि आप इंटरनेट इस्तेमाल करते है और फेसबुक / ट्विटर / व्हाट्स एप पर अपनी मांगे रख रहे है किन्तु आप newindia पर इसे रखने से इंकार करते है तो आपकी दशा उस वकील जैसी है जो पान के गल्ले और चाय कि थडी पर बड़े जोश में दलीले देता है , किन्तु जज के सामने आते ही खामोश हो जाता है।

b) जैसे जैसे newindia पर प्रस्ताव बढ़ेंगे और वोट करने वालो की संख्या में इजाफा होगा वैसे वैसे पीएम पर इसे सुधारने का दबाव बढेगा। इस तरह सिर्फ इसी तरीके से newindia को सुधारा जा सकता है। जितने ज्यादा यूजर newindia पर जायेंगे उतने ज्यादा नागरिको को यह मालूम होगा कि डिजिटल इण्डिया लांच करने वाले पीएम ने देश के नागरिको को सुझाव रखने के लिए एक दो कौड़ी की घटिया इंटरफेस वाली और फर्जी वोटिंग को बढ़ावा देने वाली साईट बनाकर दी है। यूजर बढ़ने के साथ ही सरकार एक्सपोज होगी और उन्हें फर्जी वोटिंग को रोकने का नियम लाना होगा। वर्ना यही सब इंटरनेट यूजर पीएम की ट्विटर वाल पर जाकर लिखेंगे कि भारत सरकार न्यू इण्डिया पर फर्जी वोटिंग को बढ़ावा क्यों दे रही है ? इस तरह पीएम पूरे जगत के सामने एक्सपोज होने लगेंगे।

और जब पीएम बाध्य होकर newindia के यूजर्स को वेरीफाई करने का नियम लायेंगे तो आज जो नागरिक वोट कर रहे है , वे सभी वेरीफाईड हो जायेंगे। इस तरह यदि आज आपने कोई वोट किया है तो वह आगे चलकर वेरीफाईड होकर वास्तविक वोट की गिनती में आ जाएगा। तो उन प्रस्तावों को तब बढ़त मिल जायेगी जो प्रस्ताव पुराने है और जिन पर वास्तविक नागरिको ने ज्यादा वोट किया है।

उदाहरण के लिए आपने मोबाइल नम्बर लिया तब यह आधार से लिंक नहीं था , किन्तु बाद में इसे सरकार ने आधार से लिंक्ड कर दिया। बस यूजर बढ़ने से इसी तरह से वेरिफिकेशन आने की सम्भावना बढती जायेगी। newindia पर वोट करने के लिए आपको फेसबुक पोस्ट के like कि तरह सिर्फ "vote" पर क्लिक करना होता है, और 2 सेकंड में आपका वोट दर्ज हो जाता है। तो जिस तरह आप फेसबुक / ट्विटर पर दिन भर में दर्जनों क्लिक करते है उसी तरह से एक क्लिक newindia पर रखे गए उन प्रस्तावों पर भी कर दे जिनका आप समर्थन करते है।
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