> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-06-28

Pawan Jury BhilwaraRj

यदि देवी इंदिरा गांधी जजों को कंट्रोल करने में सफल हो जाती तो उन्हें इमर्जेंसी का फ़ैसला नही लेना पड़ता ।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट के भ्रष्ट जज जगमोहन लाल सिन्हा ने जब इंदिरा जी को अदालत में बुलाया तो , १० मिनिट पहले यह आदेश जारी कर दिया था कि यदि इंदिरा जी के आने पर कोई व्यक्ति अपनी कुर्सी छोड़कर खड़ा होगा तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा । सिन्हा ने एक फ़र्ज़ी मुक़दमे का सहारा लेकर इंदिरा जी के अगले 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी । ऐसे हालात में इंदिरा जी के पास सिर्फ़ दो रास्ते थे ;
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1. वे राईट टू रिकॉल जज , राईट टू रिकॉल पी एम और जूरी सिस्टम लागू करे , या
2. इमर्जेंसी लगाए
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वे राईट टू रिकॉल / जूरी सिस्टम के ख़िलाफ़ थी, अतः इमर्जेंसी के सिवाय उनके पास कोई मार्ग नही बचा था । यदि वे इमर्जेंसी न लगाती तो हालात बदतर हो जाते । इसकी तस्दीक़ जनता सरकार के शासन काल से की जा सकती है ।
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परमाणु परीक्षण और पाकिस्तान के टुकड़े कर देने की वजह से अमेरिका और रूस इंदिरा जी से नाराज़ हो गए थे और उन्हें अपदस्थ करना चाहते थे । और इसके लिए उन्होंने भारत के भ्रष्ट जजों का इस्तेमाल किया ।
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दरअसल भ्रष्ट जजों को जूरी सिस्टम और राईट टू रिकॉल के अलावा किसी भी तरह से क़ाबू में नही किया जा सकता । किसी भी तरह से नही । लेकिन इंदिरा जी जूरी सिस्टम / राईट टू रिकॉल कानूनो के ख़िलाफ़ थी । ऐसे हालात में इमर्जेंसी एक मात्र विकल्प था ।
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