Pawan Jury BhilwaraRj
देवी इंदिरा गांधी तकनीकी रूप से तानाशाह नही थी ; लेकिन वे पूर्ण लोकतंत्र की भी पक्षधर नही थी ।
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भारतीय संविधान चुनकर आए प्रधानमंत्री को यह संवैधानिक शक्ति देता है कि वह आपात क़ालीन परिस्थितियों में इमर्जेंसी लगा सके । इंदिरा जी चुनकर आयी थी और उन्होंने अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए इमर्जेंसी लगायी थी । अतः वह एक कठोर फ़ैसला था , किंतु तानाशाह फ़ैसला नही था ।
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यदि कल भारत का जनरल फ़ौजों के बल पर पीएम को जेल में डालकर टेक ओवर कर लेता है तो वह तानाशाही होगी । क्योंकि यह संविधान सम्मत नही है ।
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दूसरी बात - जब भारत की जनता ने देखा कि उन्होंने ग़द्दारों को सत्ता पकड़ा दी है , तो 1979 में उन्होंने फिर से इंदिरा जी को चुना था । इस लिहाज़ से जनता ने उन्हें इमर्जेंसी के लिए माफ़ कर दिया था । वे फिर से लोकतांत्रिक तरीक़े से चुन कर सत्ता में लौट आयी ।
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मैं आपातकाल के फ़ैसले को सही नही मानता । लेकिन इंदिरा जी जूरी सिस्टम और राईट टू रिकॉल क़ानूनो की विरोधी थी , और उस समय जो हालात थे उनसे सिर्फ़ इन कानूनो को लागू करके ही निपटा जा सकता था । और यहीं पर उन्होंने जीवन की सबसे बड़ी भूल की । यदि वे देश जूरी सिस्टम और राईट टू रिकॉल पी एम का क़ानून डाल देती तो ख़ुद को इमर्जेंसी लगाने से बचा सकती थी ।
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