> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-29

Pawan Jury BhilwaraRj

प्रश्न -- राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम के प्रस्ताव अच्छे है , लेकिन आप बार बार मोदी साहेब और संघ का विरोध क्यों करते हो ? खुद के एजेंडे के प्रचार पर ध्यान दो , दुसरो की टांग खींचने से क्या लाभ है। इससे आपकी मांग को मिल रहा समर्थन और भी घट जाएगा। क्योंकि सबकी टांग खींचने से सभी आपके दुश्मन बन जायेंगे। फिर आपका समर्थन कौन करेगा। अत: आपका प्रचार का तरीका गलत है।
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स्पष्टीकरण --
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१) पहली बात तो यह है कि -- हम सिर्फ संघ या मोदी साहेब का ही विरोध नहीं करते , बल्कि कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी, सपा , बसपा समेत देश की प्रत्येक उस पार्टी का विरोध करते है जो राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम का विरोध करते है। लेकिन चूंकि इस समय सत्ता में संघ है और देश में सभी फैसले संघ ले रहा है अत: विरोध का आधिक्य उन्ही के हिस्से में आता है। इससे बचने का कोई उपाय नहीं है।
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जब कोंग्रेस सत्ता में थी तब हम कोंग्रेस के गलत फैसलों का भी विरोध कर रहे थे। आप किसी भी रिकालिस्ट के 2014 से पहले के पोस्ट देख सकते है, या यू ट्यूब पर जाकर 2014 से पहले के वीडियो देख सकते है। वहां आपको ऐसे 100 से अधिक वीडियो मिलिंगे जो सिर्फ कोंग्रेस को कोसने के लिए बनाये गए थे। तब कोंग्रेस ऐसे फैसले ले रही थी जो देश हित में नहीं थे अत: उन्हें कोस रहे थे , अब संघ भी ऐसे फैसले कर रहा है तो उनकी भी आलोचना करते है। अब जबकि संघ सत्ता में है और देश के सारे नीति विषयक फैसले लेने का अधिकार भी उनके पास ही है तब भी आप यदि यह चाहते है कि हम विपक्ष की आलोचना करें लेकिन सत्ता की आलोचना न करे, तो आप हमारे साथ ज्यादती कर रहे है।
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२) दूसरी बात यह है कि -- हमने किसी भी राजनैतिक पार्टी या संगठन का विरोध खुद से शुरू नहीं किया है। हम चुपचाप राईट टू रिकॉल , ज्यूरी सिस्टम कानूनों की जनता मांग कर रहे थे और जनता में इनका प्रचार कर रहे थे। लेकिन संघ के स्वयंसेवकों ने नागरिको को यह कहकर भड़काना शुरू किया कि हमारे ड्राफ्ट देश विरोधी है, वामपंथी है , अला है, फला है आदि।
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तो जब उन्होंने राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम कानून ड्राफ्ट्स को गलत तरीके से कोसना शुरू किया तो हमें भी नागरिको को यह जानकारी देनी पड़ी कि, संघ के स्वयंसेवक इन कानूनों का विरोध कर रहे है। तो विरोध उन्होंने शुरू किया। हमने नहीं किया। इसी तरह से कोंग्रेस और आम आदमी पार्टी भी जनता को बरगला रही है कि हमारे ड्राफ्ट यूजलेस है। अत: हमे उनके बारे में भी जनता को सूचित करना पड़ता है।
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३) हम मानते है कि , एक सच्चा कार्यकर्ता वह है जो अपनी उर्जा का एक हिस्सा अच्छे कानूनों के प्रचार में लगाए और एक हिस्सा नागरिको में यह जानकारी फैलाने में लगाए कि कौन कौन लोग इन कानूनों का विरोध कर रहे है , अर्थात इन कानूनों के लागू होने में रोड़े डाल रहे है। यदि ऐसे लोगो को एक्सपोज नहीं किया गया तो इन कानूनों के समर्थक भी ऐसे लोगो का समर्थन करते रहेंगे जो इन कानूनों को लागू नहीं होने देना चाहते। यह काफी अप्रिय कार्य है। लेकिन एक कार्यकर्ता को यह करना पड़ता है।
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उदाहरण के लिए यदि हम कहते है कि देश से 2 करोड़ बंगलादेशी घुसपेठियो एवं रोहिंग्यो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए क़ानून बनाना चाहिए तो हमें नागरिको को यह जानकारी भी देनी पड़ेगी कि संघ के स्वयसेवक एवं मोदी साहेब इन्हें खदेड़ने के कानून का विरोध कर रहे है। यदि हम नागरिको को यह जानकारी नहीं देंगे तो जो नागरिक इन्हें देश से खदेड़ने का समर्थन करते है वे भी गलतफहमी में संघ के साथ चिपके रहेंगे और उन्हें ही वोट करते रहेंगे। इस तरह ये क़ानून कभी भी नहीं आ पायेगा।
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तो हम नागरिको को यह सूचित करते है कि आप बंगलादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने के क़ानून का समर्थन तो करते है किन्तु इस बात को भी नोट करें कि संघ इस क़ानून का विरोध कर रहा है। ये जानकारी देने के बाद यह नागरिक के विवेक पर निर्भर है कि वह किसे चुनता है -- १) बंगलादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने के क़ानून को या , २) उस संघ को जो इस कानून का विरोध कर रहा है। दोनों सूचनाये होने के बाद वह जो भी तय करे, यह उसका अधिकार है। हमें उससे कोई सरोकार नहीं।
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