Pawan Jury BhilwaraRj
सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने दिसम्बर-2017 में यह क़ानून ( रूलिंग ) लागू किया था कि -- अब से नॉमिनी वारिस नहीं होगा !!! तो अब से नॉमिनी होने के बावजूद वसीयत के अभाव में यह तय करने के लिए विवाद कायम किया जा सकेगा कि सम्पत्ति का वारिस होगा !! भ्रष्ट मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवको ने इस रूलिंग के कारण खड़ी होने वाली समस्याओ को ख़त्म करने के लिए आवश्यक क़ानून को लागू करने से इनकार कर दिया है।
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तो अब से जिस सम्पत्ति का नॉमिनी है किन्तु वसीयत नहीं है तो मुकदमेबाजी की जा सकेगी। और यहाँ तक कि, यदि वसीयत मौजूद होने पर भी मामला दायर किया जा सकेगा। वारिसान के निर्धारण के लिए वकील 20 हजार से लेकर लाखों रूपये तक की फ़ीस वसूल सकेंगे। और यदि एक से अधिक पक्षकार दावेदार है और सम्पत्ति प्रचुर मात्रा में है तो फ़ीस कहीं ऊँची वसूल की जा सकेगी। इससे संपत्तियों के हस्तान्तरण में विलम्ब होगा और अर्थव्यवस्था धीमी होगी। यह पूरा ड्रामा सिर्फ इसीलिए किया गया है ताकि जज इस प्रकार के मामलो में मोटी घूस खा सके। क्योंकि यह जानी मानी बात है कि जहां मामला पैसो का हो जजों को घूस दिए बिना मामला नहीं सुलटाया जा सकता। तो इससे वकीलों एवं जजों दोनों की आमदनी बढ़ेगी।
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संघ के कई नेता वकालत के पेशे में है और संघ के कई कार्यकर्ताओं के वकीलों के साथ गहरे गठजोड़ है। अत: वे वकीलों एवं जजों की आमदनी बढ़ाना चाहते है। सिर्फ इसी वजह से संघ के स्वयंसेवकों एवं भ्रष्ट मोदी साहेब ने इस रूलिंग के प्रभाव को खत्म करने के लिए क़ानून बनाने से इनकार कर दिया है।
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समाधान -- ज्यूरी सिस्टम लाये बिना इन लोगो को किसी भी तरह से सुधारा नहीं जा सकता।
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