Pawan Jury BhilwaraRj
राजनैतिक दल अपने वोट बैंक के आधार पर नीतियाँ बनाते है। सभी प्रकार के वोट बैंको को मीडिया सबसे अधिक प्रभावित करता है। भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियन्त्रण में है। इस लिहाज से बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत का सबसे बड़ा वोट बैंक है। अत: भारत के सभी राजनैतिक दल इस सबसे बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश में रहते है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हितो एवं भारत की जनता के हितो के बीच स्वाभाविक टकराव है। अत: जैसे जैसे बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में मजबूत होगी, वैसे वैसे भारतीय नागरिक एवं देश कमजोर होगा। जैसे जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा बढ़ता जाएगा, वैसे वैसे भारत के अन्य वोट बैंको को प्रभावित करने की उनकी क्षमता बढती जायेगी। जैसे जैसे उनकी यह क्षमता बढ़ेगी, हमारी सभी राजनैतिक पार्टियाँ वोट पाने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर और भी निर्भर होती चली जायेगी।
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राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष का क़ानून आने से बहुराष्ट्रीय कम्पनियां मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता खो देगी। राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट --- <https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/546885878822944>
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अधिक विवरण जानने के लिए यह लेख पढ़े -- <https://www.facebook.com/notes/pawan-jury/858398990945005/>
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