Pawan Jury BhilwaraRj
फेसबुक के सोफ्टवेयर में इस तरह के फीचर है जो मनोरंजक सामग्री एवं लुगदी लेखन के प्रसार को बढ़ावा , किन्तु गंभीर एवं सार्थक गतिविधियो को हतोत्साहित करते है।
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लुगदी लेखन सामग्री एवं मनोरंजन --- लुगदी लेखन में "टाइप एन्ड थ्रो" किस्म का पाठ्य शामिल है। घटनाओ पर की गयी त्वरित एवं चलताऊ संक्षिप्त प्रतिक्रियाएं, जो कि 2-4 घंटे में काल कलवित हो जाती है। अगले दिन न तो लिखने वाले को याद रहती है और न ही पढ़ने वाले पर इसका प्रभाव रहता है। अपने दैनिक कार्यकलाप एवं विभिन्न रोचक विषयों पर फेसबुक पर मित्रो से चर्चा करना मनोरंजन में शामिल है। पूरी दुनिया में 95% से अधिक नागरिक इन्ही कार्यो के लिए फेसबुक का ज्यादातर इस्तेमाल करते है।
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गंभीर एवं सार्थक गतिविधियाँ --- इसमें विस्तृत विषय वस्तु से सम्बंधित पाठ्य शामिल है। ये पाठ्य सामाजिक, धार्मिक , सामुदायिक एवं राजनैतिक व्यवस्था में सुधार लाने से सम्बन्धित विवरणों से युक्त या किसी विषय पर नए अनुसन्धान से सम्बंधित होते है। इनका पाठ्य विशद होता है। कुछ 5% यूजर ये गतिविधियाँ बहुतायत से करते है।
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ज्यादातर यूजर्स अपना अधिकाँश मनोरंजन मूलक गतिविधियों पर खर्च करते है , तथा साथ ही वे राजनैतिक या व्यवस्थागत सुधार की सामग्री का भी प्रसार करते है। लेकिन ये ज्यादातर यूजर अपनी तरफ से सार्थक विषय से सम्बंधित पोस्ट खोजते नहीं है। यदि इनके सामने कोई सार्थक पोस्ट आयेगी तो ये इसे पढ़ लेते है, एवं सहमत होने पर उसे आगे बढ़ा देते है। यहाँ यह बात समझना जरुरी है कि -- यदि उनकी न्यूज फीड में कोई सार्थक पोस्ट आएगी तो वे इसे पढ़ लेंगे और उनकी न्यूज फीड में नहीं आने पर वे नहीं पढेंगे। मान लीजिये कि, ऐसे 100 यूजर्स के सामने यदि कोई सार्थक पोस्ट जाती है तो सम्भावनाएं है कि इनमे से 15 लोग इसे सरसरी निगाह से पढ़ लेंगे एवं कोई 1 यूजर इसे आगे शेयर कर देगा या अपनी वाल पर कॉपी करके रखेगा।
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फेसबुक के सोफ्टवेयर के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे वह किसी पोस्ट की विषय वस्तु के बारे में स्वत: ही यह अंदाजा लगा सके, कि विषय वस्तु सार्थक है या मनोरंजक है। अत: यह निर्धारित करने के लिए फेसबुक किसी पोस्ट को दिए गए वर्गों में विभाजित करता है -- a) विस्तृत पाठ्य , २) फोटो , वीडियो एवं छोटे पाठ्य। यदि किसी पोस्ट में प्लेन टेक्स्ट है एवं यह विस्तृत भी है, तो फेसबुक का सोफ्टवेयर इस पर फ़िल्टर लगा देता है , किन्तु फोटो, वीडियो एवं छोटे पाठ्य होने पर इसे बूस्ट करता है। फेसबुक का सोफ्टवेयर यूजर्स को (a) श्रेणी के स्तम्भ पढने से रोकने के लिए जाया तौर पर उनका डेटा एवं समय श्रेणी (b) पर खर्च करने की नीति पर काम करता है।
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१) फेसबुक आधे पेज से ज्यादा लम्बे आर्टिकल्स पर फ़िल्टर लगाता है , एवं लम्बाई बढ़ने के साथ साथ फिल्टरिंग बढ़ती जाती है। यदि आपने 1 पेज से अधिक लम्बा पाठ्य पोस्ट किया है तो फेसबुक इसे कम लोगो की न्यूज फीड में भेजेगा। और यदि यह पोस्ट 4 पेज से अधिक का है तो इसकी न्यूज फीड और भी कम यूजर की वाल पर जायेगी। फेसबुक का सोफ्टवेयर यह चिन्हित करता है कि अमुक पोस्ट में सिर्फ टेक्स्ट है, कोई इमेज वगेरह नहीं है।
किन्तु यदि आपने इस टेक्स्ट के साथ कोई इमेज अटेच कर दी है तो फेसबुक का सोफ्टवेयर इसे मनोरंजक पोस्ट की तरह चिन्हित करके बूस्ट कर देता है।
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२) फेसबुक सभी प्रकार की इमेजेस , फोटो , वीडियो आदि को बूस्ट करता है , जिससे ये फोटो / वीडियो ज्यादा यूजर्स की न्यूज फीड पर जाते है। ये फोटो , वीडियो यूजर्स का डेटा एवं समय जाया तौर पर खा लेते है।
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३) यदि आपने प्रोफाइल पिक्चर अपडेट की है तो अधिकतम यूजर्स को न्यूज फीड जाती है।
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फेसबुक ज्यादा से ज्यादा फोटो, वीडियो की न्यूज फीड आपकी वाल पर भेजता है। ताकि यूजर्स का डेटा एवं प्राथमिक समय मनोरंजन पर व्यतीत किया जा सके। मान लीजिये कोई यूजर कुल 30 मिनिट से 1 घंटा प्रतिदिन फेसबुक पर बिताता है। तो जब भी वह फेसबुक पर आएगा उसे फोटो , वीडियो वगेरह ज्यादातर दिखाई देंगे। वह इमेज एवं वीडियो देखेगा एवं निकल जाएगा। पाठ्य सामग्री की न्यूज फीड अपेक्षाकृत कम होने से उसे इन्हें पढने का अवसर नहीं मिलेगा।
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उल्लेखनीय है कि , जटिल विषय को समझने एवं समझाने का सबसे प्रभावी माध्यम पाठ्य सामग्री ही है। वीडियो किसी जटिल विषय को आसानी से नहीं समझा पाते, अलबत्ता वे दर्शक के मन में यह भाव पैदा कर देते है कि उसे विषय समझ आ गया है। पर अंततोगत्वा वीडियो मनोरंजन ही करते है। इसीलिए फेसबुक प्लेन टेक्स्ट पर फ़िल्टर लगाता है, लेकिन वीडियो को बूस्ट करता है।
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४) फेसबुक ने यूजर्स का अतिरिक्त समय खाने के लिए टेग करने का ऑप्शन दिया हुआ है। और ऐसा फीचर जान बुझकर नहीं जोड़ा गया है जिससे व्यक्ति खुद को टेग होने से बचा सके। ज्यादातर यूजर टेग रिमूव करना जानते भी नहीं है, एवं टैग रिमूव में काफी समय खर्च हो जाता है। फेसबुक ने टैग वाली पोस्ट पर नोटिफिकेशन ऑफ़ करने का फीचर भी नहीं जोड़ा हुआ है। फेसबुक टेग किये गए सभी पोस्ट्स के सभी कमेंट्स की नोटिफिकेशन भेजते रहता है। असीमित नोटिफिकेशन होने कारण यूजर नोटिफिकेशन देखना बंद कर देता है , और काम के कमेन्ट की नोटिफिकेशन अपठित रह जाती है। इस तरह फोटो , वीडियो से बचा हुआ समय फेसबुक टेग के माध्यम से चूस लेता है। अलबत्ता मनोरंजन प्रधान यूजर्स को टेग करने या टैग होने से कोई समस्या नहीं आती। लेकिन सीमित समय में सार्थक एक्टिविटी करने वाले यूजर को डेटा एवं समय की काफी हानि होती है।
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५) फेसबुक ने जानबूझकर सर्चिंग ऑप्शन इतना पूअर किया हुआ है कि व्यक्ति खुद के ही पुराने पोस्ट नहीं ढूंढ पाता। टाइप एंड थ्रो सामग्री को वापिस ढूँढने की आवश्यकता नहीं होती, किन्तु सार्थक विषय पर किये गए विस्तृत पोस्ट की फिर से जरूरत आ जाती है। इसके लिए एक्टिविटी लॉग में निरंतर स्क्रोल करते रहना होता है, जो कि एक अवधि के बाद व्यवहारिक नही है। पोस्ट करो और भूल जाओ।
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६) फेसबुक ने जान बुझकर ऐसी व्यवस्था नहीं दी है जिससे यूजर अपनी प्रोफाइल पर विभिन्न विषयों से सम्बंधित पोस्ट्स के लिए अलग से सेक्शन बना सके , एवं आगंतुक जब किसी यूजर की वाल पर आये तो वह अपनी रुचि एवं विषय की पोस्ट के वर्ग में दर्ज पोस्ट्स को चयनात्मक आधार पर पढ़ सके।
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७) यदि आप किसी आर्टिकल में कोई लिंक / न्यूज लिंक रखते है तो फेसबुक पोस्ट पर फ़िल्टर लगा देता है।
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८) फेसबुक में सेमी ब्लोक करने का ऑप्शन नहीं दिया गया है। ऐसा कोई विकल्प नहीं है जिससे यूजर किसी व्यक्ति के कमेन्ट करने पर तो रोक लगा सके किन्तु वह उसके पब्लिक पोस्ट देखता रह सके। ब्लोक करने से यूजर पूरी तरह से गायब हो जाता है।
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९) नोट्स सेक्शन में यूजर अपने चयनित पोस्ट रख सकता है , एवं इन तक तुरंत पहुँच सकता है। किन्तु फेसबुक ने नोट्स सेक्शन की पहुंच काफी मुश्किल बनायी है। मोबाइल पर यह खैर काफी मुश्किल है ही लेकिन कंप्यूटर पर भी इसे ऐसी जगह रखा गया है कि अमूमन यूजर को नोट्स सेक्शन तब तक नहीं मिलता जब तक उन्हें रूट न बताया जाए।
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१०) फेसबुक का सोफ्टवेयर लिंक्स से युक्त इंडेक्स पोस्ट को सपोर्ट नहीं करता। यदि आप पोस्ट्स के लिंक्स की सूची बनाते है तो आपको इन्हें लगातार एडिट करते रहना होता है। बार बार एडिट करने से फेसबुक अमुक पोस्ट को डिलीट कर देता है। फेसबुक कई लिंक्स होने के कारण भी बहुधा इन्हें डिलीट कर देता है।
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११) फेसबुक ने प्रोफाइल को वेरीफाई करने का ऑप्शन नहीं दिया हुआ है। इससे नामालूम एवं सच्ची प्रोफाइल में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। फेक प्रोफाइल से अनुचित सामग्री का प्रसार बढ़ता है।
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समाधान ?
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1) यदि आपको किसी व्यक्ति के राजनैतिक पोस्ट्स की नियमित फीड बेक चाहिए तो उसकी प्रोफाइल को "see first" या "get notification" , या "close friends" का मार्क करके रखें।
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2) अपने महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक पोस्ट्स के लिंक किसी एक स्टेटस पोस्ट में रखें एवं इस पोस्ट का लिंक अपने कवर / प्रोफाइल पिक्चर के डिस्क्रिप्शन में रख दें। आप को जब भी यह पोस्ट चाहिए तब आप सिर्फ एक क्लिक करके इन्हें पढ़ सकते है। यदि आप अपने कवर पिक्चर पर यह लिख देते है कि , इस पिक्चर को क्लिक करके डिस्क्रिप्शन को देखें तो जो भी यूजर आपकी प्रोफाइल पर आएगा, वह स्वत: इन महत्त्वपूर्ण पोस्ट्स को बिना ढूंढें सीधे पढ़ सकेगा।
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3) अपनी प्रोफाइल में जाकर किसी विषय से सम्बंधित एक एल्बम क्रियेट करें। प्रथम पोस्ट में एक फोटो अपलोड करें। अब आप इस एल्बम में जितने चाहे उतने चित्र विहीन पोस्ट रख सकते है। और आप इस तरह से 50 विषयों से सम्बंधित 50 एल्बम बना सकते है। जब भी आप कोई पोस्ट करें तो सम्बंधित विषय के एल्बम में पोस्ट कर दे। इस तरह आप विभिन्न विषयों के लिए एल्बम बना सकते है , एवं इन एल्बम में पोस्ट्स को ढूंढना बेहद आसान है।
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4) किसी विषय पर सार्थक चर्चा के लिए अलग से कन्वर्सेशन थ्रेड का इस्तेमाल कर सकते है। इस लिंक को आप सेव कर सकते है। विषय / व्यक्ति से सम्बंधित चर्चा के लिए ऐसे कई थ्रेड बनाये जा सकते है। इससे किसी विषय / व्यक्ति से सम्बंधित आपकी चर्चा सुरक्षित रहेगी एवं आपके लिए इस तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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