Pawan Jury BhilwaraRj
ज्यादातर से भी ज्यादा संभावनाएं है कि श्रीदेवी की असमय मृत्यु उन "दवाइयों" की वजह से हुयी हो जिनका सेवन वे जवान एवं छरहरा दिखने के लिए करती थी। अन्यथा, जिस स्तर का स्वास्थ्य प्रबंधन एवं सुविधाएँ उन्हें उपलब्ध थी, उन्हें ध्यान में रखते हुए 54 वर्ष की आयु में ऐसा हादसा होना दूर की बात है।
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स्वस्थ रहने के लिए इतना काफी है कि व्यक्ति प्रकृति की अवहेलना न करते हुए नियमित व्यायाम करे और संतुलित आहार ले।
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यह घटना उन लोगो के लिए एक सबक है जो अपने "लुक" को मारक बनाने एवं खेलो में अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए विभिन्न प्रकार के ड्रग लेते है। साथ ही यह उन अभिभावकों के लिए भी एक चेतावनी है जो अपने बच्चो को ग्लेमर वर्ल्ड या पदक जिताऊ खेलो में अपनी जगह बनाने के लिए प्रेरित करते है, या अपने बच्चो के गिर्द ऐसा माहौल रचते है जिससे बच्चे खेलो में पदक लाने या ग्लेमर की दुनिया में नाम कमाने की कोशिश करें ( उदाहरण के लिए फिल्म, मॉडलिंग एवं खेल )
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"सामान्य खेल" एवं "पदक जिताऊ खेल" बिलकुल अलग तरह की चीजे है। बिना कोई स्टेरॉयड लिए सप्ताह में 5 दिन एक घंटा प्रतिदिन सामान्य ढंग से खेलना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। लेकिन स्टेरॉयड लेकर खेल में पदक जीतने के लिए जोर लगाने से प्रति 1000 में से 999 किशोरों का अकादमिक कैरियर एवं साथ ही मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य भी तबाह हो जाता है। इस बचे हुए 1 व्यक्ति को पेड मीडिया द्वारा हीरो की तरह प्रस्तुत किया जाता है, ताकि इसे देखकर लाखो किशोर भी इस अंध दौड़ की और आकर्षित होकर अपनी जिन्दगी तबाह करें। यहाँ तक कि आज हाई स्कूल स्तर तक की प्रतियोगिताओं में भी बच्चे पदक जीतने के लिए स्टेरॉयड का सेवन करने लगे है। और यदि एक बच्चा ड्रग लेता है तो अन्य प्रतिस्पर्धियो के पास सिर्फ दो रास्ते बचते है -- या तो वे हार मान ले, या फिर वे भी ड्रग लेना शुरू करें।
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सौन्दर्य निखारने एवं खेलकूद की क्षमता बढ़ाने का धंधा अच्छा मुनाफा देने वाला है , किन्तु इससे 10 गुना बड़ा कारोबार उन दवाईयों एवं थेरेपियो का है जो इन सौन्दर्य निखारने एवं क्षमता बढाने वाले नुस्खो को लेने से उपजे साइड इफेक्ट्स को काबू करने में प्रयुक्त होती है !!
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अफ़सोस की बात है कि मोदी साहेब को शामिल करते हुए हमारे सभी राजनैतिक दलों के शीर्ष नेता इस तरह के माहौल को प्रोत्साहित करते है जिससे युवा और ख़ास तौर से युवतियां ग्लेमर वर्ल्ड ( फ़िल्में एवं मॉडलिंग ) एवं पदक जीतने वाले खेलो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले।
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गलीज फिल्म दंगल का निर्माण इसी आशय से किया गया था। गलीज फिल्म "दंगल" किशोरों को ड्रग लेने एवं मांस खाने के लिए प्रेरित करती है। किन्तु इस मूल उद्देश्य को महिला सशक्तिकरण की चाशनी में डुबो कर परोसा गया। ठीक उसी तरह जैसे अरविन्द केजरीवाल का मूल उद्देश्य कुर्सी लपकना था, किन्तु उन्होंने इसके लिए भ्रष्टाचार एवं जनलोकपाल के कवर का इस्तेमाल किया। दंगल भी महिला सशक्तिकरण की आड़ में स्पोर्ट्स ड्रग एवं मांसाहार को प्रोत्साहित करती है।
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प्रस्तावित समाधान -- स्कूल जाने वाले सभी बच्चो को ऐसी सूची दी जानी चाहिए जिसमे यह विवरण हो कि पिछले 20 वर्षो में स्कूलों से पास होने वाले छात्रों में से कितने छात्रों ने फ़िल्में, मॉडलिंग, खेलकूद, औषध विज्ञान, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रो में अपना कैरियर बनाने की कोशिश की एवं वे सभी छात्र आज किस परिस्थिति में कैसा जीवन यापन कर रहे है। यह जानकारी बच्चो को खुद से यह समझाने में सहायता करेगी कि उन्हें फिल्मो एवं खेलकूद में अपने आप को खपाने की जगह गणित-विज्ञान पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
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