> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-29

Pawan Jury BhilwaraRj

एनजीटी ने श्री श्री रविशंकर की संस्था द्वारा निर्मित तीन मंजिला इमारत को गिराने के आदेश दिये है। एनजीटी ने कोलकाता में श्री श्री रविशंकर की उन तमाम इमारतों को भी गिराने के आदेश दिए है जो पर्यावरण का उल्लंघन करती है।
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एनजीटी में बैठे भ्रष्ट जज "चयनात्मक कार्यवाही" करने के लिए कुख्यात है, और हिन्दू संत , मंदिरो एवं उनके आश्रम किस किस तरह से पर्यावरण का उलंघ्घन कर रहे है इस पर एनजीटी विशेष नजर रखता है।
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<http://indiatoday.intoday.in/story/ngt-orders-demolition-of-building-owned-by-sri-sri-ravi-shankar-kolkata/1/1077209.html>;
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श्री श्री ने विश्व सांस्कृतिक समारोह किया था तब भी एनजीटी ने उन पर आरोप लगाया था कि इस आयोजन से यमुना का पारिस्थितकी तंत्र गड़बड़ा गया है। इसके एवज में एनजीटी ने उन पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया था, और समारोह में भी ढेर सारे अड़ंगे लगाये थे।
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एनजीटी इससे पहले देशनोक की करणी माता मंदिर में अगबत्ती, चुनरी, ध्वजा, श्रृंगार सामग्री, नारियल आदि चढाने पर रोक लगा चुका है। एन जी टी का मानना है कि इससे मंदिर में प्रदुषण होता है।
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एनजीटी शवदाह पर रोक लगाने के लिए भी प्रयासरत है। एनजीटी का कहना है कि , हिन्दुओ में अंतिम संस्कार के लिए शवो को लकड़ी से जलाने के कारण भारत में प्रदुषण फ़ैल रहा है व इससे पारिस्थितकी तंत्र की हानि हो रही है। एनजीटी अंतिम संस्कार के लिए बिजली का प्रयोग किये जाने का क़ानून चाहता है।
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एन जी टी के कर्मो की सूची बेहद लम्बी है। ये संस्था हिन्दू धर्म को तोड़ने के कारोबार में अग्रणी है। दरअसल एनजीटी को जज चलाते है। मतलब जब तक आप भ्रष्ट और मिशनरीज के एजेंट नहीं है तब तक आप एनजीटी में नहीं आ सकते। जो जज रिटायर हो जाते है उन्हें सुप्रीम कोर्ट से एनजीटी में भेज दिया जाता है।
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समाधान - भारत में ज्यूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल जज के क़ानून को लागू किया जाए और देश के सभी ( सभी - लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ) जजों को नौकरी से निकाला जाए। इन कानूनों के आने के बाद ये जज बनने के लिए आवेदन कर सकते है। जो चुने जायेगे उनकी नौकरी चलेगी, शेष की नहीं।
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एनजीटी अध्यक्ष की नियुक्ति भी नागरिको की सहमती से होनी चाहिए। राईट टू रिकॉल एनजीटी अध्यक्ष का क़ानून आने से नागरिको को अध्यक्ष को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार मिल जाएगा। पर्यावरण से सम्बंधित मामलो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी करेगी। यदि ज्यूरी मानती है कि पर्यावरण का उल्लंघन हुआ है तो आर्थिक दंड लगा सकती है वर्ना आरोपी को बरी कर सकती है।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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