Pawan Jury BhilwaraRj
प्रधानमंत्री बुलेट ट्रेन की ब्याज दर पर झूठ बोलकर पूरे देश के नागरिको को भ्रमित कर रहे है ;
.
झूठ -- बुलेट ट्रेन के लिए हमें 0.1% की ब्याज दर से पैसा मिला है।
सच -- हमें 6.5% से 7% की ब्याज दर से रूपये चुकाने होंगे !!!
.
यह शर्म की बात है कि भारत के चुने हुए प्रधानमन्त्री टीवी / प्रेस में 90 करोड़ नागरिको के सामने यह सफ़ेद झूठ बोल देते है कि बुलेट ट्रेन के लिए हमें सिर्फ 0.1% की ब्याज दर से पैसा चुकाना होगा !! और इससे भी ज्यादा शर्म की बात यह है कि सोनिया गांधी एवं अरविन्द केजरीवाल जैसे विपक्ष में बैठे नेता इसका प्रतिरोध नहीं करते !! और डूब मरने वाली बात यह है कि संघ ( संघ=बीजेपी उर्फ़ गंगाधर=शक्तिमान ) , कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से इस झूठ का खंडन नहीं कर रहे है !!!
.
मान लीजिये कि ऋण 1974 में लिए गया तथा इसकी ब्याज दर 0.1% थी। लगभग 43 वर्ष पहले।
.
1974 में 1 US$ = 8 रू = 300 येन, अत: 1 रू = 37 येन
2017 में 1 US$ = 65 रू = 112 येन, अत: 1 रू = 1.72 येन
.
तो अगले 43 साल में येन रूपये के मुकाबले 22 गुना मजबूत हो गया है। हमें ब्याज येन में चुकाना है, रूपये में नहीं।
.
तो यदि हम यह मानकर चले कि येन में लिए गए ब्याज की दर 0% है तो रूपये में चुकाई जाने वाली ब्याज की स्वभाविक दर निचे दिए गए फार्मूले में r के मान के बराबर होगी :
.
(1 + r)^43 = 37/1.72 = 22
r = 7.4 % लगभग
.
दूसरे शब्दों में बुलेट ट्रेन के लिए लिए गए ऋण पर हमें उतना ही ब्याज चुकाना होगा जितना बैंक किसी FD पर चुकाता है। वर्तमान स्थिति में 5 वर्ष के लिए FD पर यह दर 7% से कम है।
.
तो ब्याज दर का निर्धारण अगले 50 वर्षो में रूपये एवं येन के भाव से तय होगा !!! एक तरह से यह एक जुआ है, बिजनेस मॉडल नहीं है।
.
और सबसे जरुरी बात यह कि यह ब्याज हमें येन में चुकाना होगा, रूपये में नहीं !! और बुलेट ट्रेन से जापानी जो मुनाफा कमाएंगे उसके भी हमें येन चुकाने होंगे !! बुलेट ट्रेन ऐसा कोई उत्पादन नहीं करेगी जिसे निर्यात करके हम डॉलर जुटा सके। भारतीय इसमें रूपये देकर सवार होंगे और रूपये के इस मुनाफे के बदले हमें येन चुकाने होंगे। जितना रुपया गिरेगा उतना हमें दोहरा घाटा होगा। ब्याज की दर भी बढ़ती जाएगी और मुनाफे के बदले येन देने का भार भी बढ़ता जाएगा। ये भारत की जगह जापानियों के विकास का मॉडल ज्यादा नज़र आता है !!!
.
कुल मिलाकर भारत में एवं भारतीयों द्वारा निर्मित बुलेट ट्रेन हमारे फायदे की चीज है, लेकिन जापान / चीन की ट्रेने विकास के नाम पर एक मजाक है। और 0.1% की ब्याज दर का प्रोपेगेंडा इस मजाक को और भी निर्मम बना दे रहा है।
.
चीन अपनी हाई स्पीड एवं बुलेट ट्रेन्स खुद से बनाता है , और हमें भी वही रास्ता लेना चाहिए। किन्तु सोनिया-मोदी-केजरीवाल और इनके अंध भगत भारत में शताब्दी एवं राजधानी ट्रेनों की संख्या और ट्रेक बढ़ाने का तक का विरोध कर रहे है, भारतीय बुलेट ट्रेनों की बात तो भूल ही जाइये !!
.
सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगतो से हम और उम्मीद भी क्या रख सकते है ?
.
समाधान - राईट टू रिकॉल रेल मंत्री एवं ज्यूरी सिस्टम लागू करके हम भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का रेलों का स्वदेशी ढांचा खड़ा कर सकते है। लेकिन इससे जापानीयो , अमेरिकनों एवं चीनियों को घाटा हो जायेगा। यही वजह है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके अंध भगत इन कानूनों के धुर विरोधी है।
.
==========