Rahul Tiwari Jury
क्या बंगाल के जो 27 लाख मतदाताओं ने SIR में नाम काटे जाने पर आपत्ति जताई थी उनके द्वारा वोट नहीं दिए जाने से बंगाल में BJP चुनाव जीत गई है ? आइए जानते हैं!
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(01)
चुनाव आयोग के द्वारा हर चुनाव में वोटरलिस्ट की जांच करके मतदाताओं की छटनी करनी होती है। इनमें से कुछ लोग राज्य छोड़ गए होते हैं कुछ लोग मृत्य हो गए होते हैं जिसके वजह से लाखों लोगों को वोटरलिस्ट से हर बार हटाया जाता है।
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लेकिन 2026 वेस्ट बंगाल चुनाव में 27 लाख लोगों ने आपत्ति दर्ज कराया था यानी की 27 लाख लोग वोट देना चाहते थे लेकिन उनको वोट देने से हटाया गया।
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इसबार बंगाल चुनाव में कुल लगभग 6 करोड़ 10 लाख लोगों ने वोट दिया।
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BJP को कुल 207 सीट मिला है और कुल वोट 2 करोड़ 92 लाख मिला है।
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TMC को को 80 सीट मिला है और कुल वोट 2 करोड़ 60 लाख मिला है।
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BJP , TMC से 32 लाख वोटो के बढ़त से चुनाव जीती है।
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अगर 27 लाख लोगों में से 50% लोग 13.5 लाख वोटर्स भी किसी किन्हीं अन्य पार्टीज को वोट न देकर सीधा TMC को हीं वोट दे देते, तो भी TMC BJP से चुनाव जीत नहीं पाती।
क्योंकि TMC को चुनाव जीतने के लिए कम से कम 32 लाख से अधिक वोट चाहिए थी।
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(02)
अब लिए असली VOTE चोरी के खेल को समझते हैं।
असल में विश्व के शासकों को भारत में अधिक असली राजनीतिक पार्टियों को एवं निर्दलीय प्रत्याशियों को सत्ता से दूर बनाए रखना है वह नहीं चाहते हैं कि भारत की राजनीति में अधिक प्रतिस्पर्धा आए।
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आप 2025 दिल्ली और बिहार विधानसभा का चुनाव देखिए इन दोनों राज्यों में इसबार के विधानसभा चुनाव में एक भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता है!! ऐसा शायद इतिहास में पहली बार हुआ।
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ठीक इसी तरीके से 2026 विधानसभा चुनाव के 5 राज्यों में केवल 3 प्रत्याशी हीं चुनाव जीते हैं—
West Bengal - 0
Tamilnadu - 0
Kerala - 2
Asam - 0
PuduCherry - 1
ऐसा भारत के अब तक के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है की 2025 और 2026 के 7 राज्यों के विधानसभा चुनाव में हजारों निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने के बावजूद भी केवल और केवल 3 निर्दलीय प्रत्याशी हीं चुनाव जीते हैं!!
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असल में भारत में EVM होने से सभी नेताओं को पता है कि अगर उन्होंने किसी बड़ी पार्टी से टिकट लेकर चुनाव नहीं लड़ा तो उनको चुनाव जीतना नामुमकिन हो सकता है। क्योंकि उन्हें भी पिछले 15-20 वर्ष के कार्यों के दौरान अनुभव हो जाता है कि अब भारत में केवल और केवल बड़ी पार्टियों के नेता ही चुनाव जीत पाते हैं। इसलिए वह लोग जैसे ही बड़े नेता बनते हैं वैसे ही बड़ी पार्टियों से टिकट लेकर चुनाव लड़ने के फिराक में लग जाते हैं।
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लेकिन मैंने ऐसे कई लोगों से बात किया है, बहुत सारे लोगों का अनुभव रहा है कि उन्हें कम से कम जितनी वोट मिलने की उम्मीद थी उतनी भी वोट उनको प्राप्त नहीं हुई है।
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ठीक इसी तरीके से छोटी पार्टियों के प्रत्याशियों के साथ भी यहीं हो रहा है, मैंने बिल्कुल सामने से - दिल्ली, बिहार और वेस्ट बंगाल चुनाव में अनुभव किया है कि भारत में लगातार छोटी पार्टियों को भी सत्ता से बाहर रखने का षड्यंत्र बहुत ही शातिर तरीके से हो रहा है।
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समाज में जिन व्यक्तियों के भीतर समस्याओं का समाधान करने के लिए ऊर्जा होता है वह कईबार निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक सफर शुरू करते हैं और बाद में छोटी पार्टियों में शामिल होकर भी उन पार्टियों की टिकट से चुनाव लड़ते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे वह सत्ता में भीतर घुसते जाते हैं वैसे-वैसे नेताओं के अंदर लालच भरते जाता है और वह यह भी अच्छे ढंग से समझते हैं की बड़ी पार्टियों से टिकट लेने पर ही चुनाव जीता जा सकता है। तो वह अगली बार किसी बड़ी पार्टी से टिकट लेकर चुनाव लड़ते हैं उसके बाद चुनाव जीते हैं या हारते हैं।
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इन सभी तथ्यों को समझने से हम यह बिलकुल आसानी से समझ सकते हैं कि, भारत का पूरा चुनावी ढांचा इस तरीके से तैयार किया गया है कि चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशियों को किसी बड़ी पार्टी से टिकट लेकर ही चुनाव जितना पड़ेगा।
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बड़ी पार्टियों से टिकट लेने के लिए 50 लाख रुपए से लेकर 5 करोड रुपए तक या इससे अधिक रुपया देना पड़ता है।
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अगर कोई व्यक्ति पार्टी का टिकट और चुनाव का खर्चा यानी कि लगभग 5 करोड रुपए लगाकर चुनाव जीतता है तो हम ऐसे व्यक्ति से बिल्कुल भी यह उम्मीद नहीं रखते हैं कि वह अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में थोड़ा भी जनता के समस्याओं पर ध्यान देगा।
क्योंकि 5 करोड़ रुपए लगाए हुए व्यक्ति को अपने 5 करोड़ से कम से कम 50-100 करोड़ कमाना ही पड़ेगा नहीं तो उसके इन्वेस्टर उसकी जान ले लेंगे!!
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(03)
अब भारत में चल रहे समस्याओं का सबसे बड़ी वजह विपक्ष में बैठे हुए पार्टियों के नेता ही हैं यह समझना बहुत जरूरी है।
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इन पार्टियों के शीर्ष अध्यक्षों को पता है कि अगर उन्होंने EVM के VVPAT में लगा हुआ काला काँच और लाइट सेंसर द्वारा वोटों की चोरी हो सकने के बारे में कुछ भी कहा तो अमेरिका उनको दंड के रूप में सत्ता से बिल्कुल बाहर कर देगा और उन्हें चुनाव जीतना है तो अमेरिका के दिए हुए निर्देशों पर हीं कार्य करना पड़ेगा।
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कई लोग देखते हैं कि यह नेता अमेरिका को बुरा बोल रहा है यह नेता उन भ्रष्ट पूंजीपतियों को बुरा बोल रहा है, मेरा कहना है कि वह सब दिखावा है वहलोग केवल वही बुराइयों को बोलते हैं जिन बुराइयों से उन बुरे व्यक्तियों का बिल्कुल ना बराबर नुकसान होगा और उनका बड़ा-बड़ा लूट चलता रहेगा।
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2010 में महात्मा हरिप्रसाद जी ने असली EVM को नेशनल न्यूज़ चैनल सहारा समय पर Live Demo देकर वोट चोरी करके दिखाया था— आज तक किसी भी विपक्ष पार्टी के नेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उनकी वीडियो को शेयर नहीं किया है 16 वर्षों के बाद भी यह लोग लगातार महात्मा हरी प्रसाद जी के असली EVM वोट चोरी के वीडियो को छुपा रहे हैं!!!!!!!!!!!!
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यह विपक्ष में बैठे हुए नेता कभी भी विधानसभा में और लोकसभा में जनता के समस्याओं का समाधान करने के लिए किसी भी कानून को लागू करने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल नहीं रखते हैं। इसी बात से यह साबित होता है कि यहलोग केवल जनता को अपने नकली मुद्दों में फंसाकर लूट रहे हैं।
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जैसे राहुल गांधी ने वोटरलिस्ट की गड़बड़ी का हल्ला मचाकर EVM के VVPAT में लगा हुआ काला काँच और लाइट सेंसर द्वारा द्वारा 30% से अधिक वोटों को MOCK POLL में बायपास करते हुए चुराया जा सकता है" उसने इस बात को भारत के 100 करोड़ मतदाताओं से छुपा लिया!!
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अब आप देखिए कहीं भी आपको इस बात की जानकारी नहीं मिलेगी, किसी भी मीडिया में नहीं मिलेगी, किसी भी बिकाऊ यूट्यूबर के वीडियो में नहीं मिलेगी, किसी भी इन्फ्लूएंसर द्वारा यह जानकारी नहीं मिलेगी, सभी के सभी आपसे यह जानकारी छुपा रहे हैं!!
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क्योंकि विपक्ष के पार्टियों के शीर्ष अध्यक्ष यह जानते हैं कि अगर उन्होंने यह जानकारी जनता को दिया, तो अमेरिका मीडिया और EVM के द्वारा उसको सत्ता से बिल्कुल बाहर कर सकता है।
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(04)
राजनीति में अधिक प्रतिस्पर्धा के लिए मतदाताओं का मत पूरी ईमानदारी से प्रत्याशियों तक पहुंचना बहुत ही महत्वपूर्ण है।
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हम EVM हटाओ सेना और राइट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि भारत की राजनीति में अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धा बनना शुरू हो, तभी राज्य के मुख्यमंत्री पर अधिक से अधिक विधायकों और पार्टियों का दबाव पड़ेगा और तभी वह मुख्यमंत्री अपनी सरकार ईमानदारी से चलाएगा।
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मतदाताओं का मत ईमानदारी से पहुंचने के लिए बैलट पेपर द्वारा पारदर्शी चुनाव होना चाहिए और वोटों की गिनती वही मतदान कक्ष में बैलट बॉक्स को बगैर 1 इंच भी हिलाए वहीं पर होना चाहिए और इस पूरे कार्यकाल का लाइव कैमरा द्वारा प्रसारण जनता के मोबाइल और टीवी में होना चाहिए। तभी 100% मतदाताओं का मत ईमानदारी से प्रत्याशियों तक पहुंच सकता है।
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और इस पूरे मांग को लागू करवाने के लिए भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर— संविधान अनुच्छेद 328 कानून के तहत मतदाताओं को बैलट पेपर से वोट देने के विकल्प का कानून लागू करने के लिए दबाव बनाना पड़ेगा।
हमें हर एक महीने अपने-अपने मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ट्वीट भेजकर उसपर दबाव बनाकर अपना नागरिक कर्तव्य निभाना होगा और अधिक से अधिक नागरिकों को इस मांग में जोड़कर सभी लोगों से नागरिक कर्तव्य निभाने का विनती करना होगा इसके अलावा हमारे पास कोई भी विकल्प नहीं है अगले कुछ दशक में हमारा देश पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।।
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