राजवीरसिंह चौहान
'राइट टू रिकॉल पार्टी' के संस्थापक श्री राहुल तिवारी ने EVM पर कई समय से संशोधन किया है और इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि VVPAT प्रिंटर मशीन के काले शीशे के पीछे, मतदाता की जानकारी के बिना ही फर्जी वोटिंग होती है। वे पूरे देश में अपना अभियान चला रहे हैं, जिसमें उनकी दो स्पष्ट माँगें हैं: 1. हर मतदाता को वोट डालने के बाद VVPAT की रसीद दी जाए; और 2. जिस मशीन से VVPAT की रसीद प्रिंट होती है, उसका शीशा काला होने के बजाय पारदर्शी रखा जाए—बशर्ते EVM का इस्तेमाल जारी रखना हो तो।
दूसरे, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 328 के अनुसार, हर भारतीय नागरिक के पास वोट डालते समय EVM या बैलेट पेपर में से किसी एक को चुनने का विकल्प होता है। इसका मतलब है कि अगर कोई नागरिक वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ पर जाता है और बैलेट पेपर मांगता है, तो संविधान में उसे बैलेट पेपर देने का प्रावधान किया गया है।
अगर हर जागरूक नागरिक जो टैक्स देता है, भेड़-बकरियों की तरह चले जाने के बजाय, संविधान के अनुसार अपने मुलभुत अधिकारों की मांग करे, तो चुनाव नतीजों में 100% पारदर्शिता बनी रहेगी, जैसा कि जनता उम्मीद भी करती है और चाहती भी है।
जो लोग EVM पर भरोसा करते हैं (ज्यादातर सारे अंधभक्त)... उन्हें EVM के ज़रिए ही वोट देने दिया जाये... और बाकी आम जनता बैलेट पेपर से वोट देने के अधिकार की मांग कर सकती है। CCTV के ज़माने में बूथ कैप्चर होंगे... बैलेट पेपर के बक्से लूटे जाएँगे... ऐसे मनगढ़ंत डर में फँसने की कोई ज़रूरत नहीं है!!! अगर आप ट्विटर इस्तेमाल करते है तो इनकी तरह अपने सीएम से मांग कर सकते है।। 👍