Rahul Tiwari BagahaBr
रेलवे मंत्रालय और उपलब्ध सार्वजनिक आँकड़ों के आधार पर पिछले लगभग 10 वर्षों में भारतीय 🚂 रेलवे के डिब्बों की संख्या में आश्चर्यजनक बदलाव!!
(01) AC कोच (AC-1, AC-2, AC-3)
2014 के आसपास: लगभग 13,000 – 14,000
2024-25 तक: लगभग 25,000
→कुल वृद्धि: लगभग 11,000 – 12,000 AC डिब्बे
.
(02) Sleeper कोच (नॉन-AC स्लीपर)
2014 के आसपास: लगभग 32,000
2024-25 तक: लगभग 36,000
→कुल वृद्धि: लगभग 3,000 – 4,000 स्लीपर डिब्बे
.
(03) General / Unreserved कोच (अनरिज़र्व्ड जनरल)
2014 के आसपास: लगभग 14,000
2024-25 तक: लगभग 21,000
→कुल वृद्धि: लगभग 6,000 – 7,000 जनरल डिब्बे
----------------------
!!महत्वपूर्ण बात!!
आज देश में गरीबी और बेरोजगारी की वजह से जनरल डिब्बों में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसके बावजूद जनरल डिब्बों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, जबकि AC डिब्बों की वृद्धि सबसे तेज हुई है!!
इस स्थिति को देखकर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि
क्या रेलवे की प्राथमिकता में साधारण यात्रियों की सुविधा होनी चाहिए या महंगे टिकट देने वाले यात्रियों की?
जब देश में बड़ी आबादी अभी भी सीमित आय में जीवन यापन कर रही है, तब जनरल डिब्बों की पर्याप्त संख्या होना भी उतना ही जरूरी है, ताकि आम यात्रियों को यात्रा में कम से कम कठिनाई हो।
स्रोत:
• संसद में रेलवे मंत्रालय के जवाब
• Indian Railways के उपलब्ध आँकड़े
• सार्वजनिक समाचार रिपोर्ट (2024-25)
---------------
भारतीय रेलवे की समस्याओं का उचित कानूनी समाधान:
(01) EVM-VVPAT में लगा हुआ काला काँच और लाइट सेंसर द्वारा 30% से अधिक वोटों को चुराया जा सकता है! जब-तक भारत के नागरिकों को >बैलट पेपर से वोट देने के विकल्प का कानून< का अधिकार नहीं मिलता है, तब-तक हम लोग शक्ति विहीन हीं रहेंगे!, हमने आजादी के बाद जो एकमात्र अधिकार हासिल किया था, अपने नेताओं को वोट देकर चुनने का अधिकार!!-
वह भी > EVM-VVPAT के काले काँच और लाइट सेंसर द्वारा संशय में डाल दिया गया है। इसलिए भारत के नागरिकों को सबसे पहले हमारा सबसे शक्तिशाली अधिकार— बैलट पेपर से वोट देने के विकल्प का कानूनी अधिकार, सत्ताधारियों से छीनना होगा!!
.
(02) भारतीय रेलवे आम जनमानस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है इसलिए रेल मंत्री को >वोट वापसी पासबुक कानून< के अंतर्गत लाना होगा, ताकि अधिक समस्या आने पर नागरिक उन्हें नौकरी से बदल सके।
.
(03) >जूरी कोर्ट न्याय व्यवस्था कानून और सरकारी जमीन किराया बंटवारा कानून< जल्द से जल्द लागू करने के लिए पब्लिक डिमांड खड़ा करके राज्य के नागरिकों को राज्य में हीं रोजगार दिलवाकर रेलवे में भीड़ को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
A. भ्रष्ट जज सिस्टम को बंद करके >जुरी कोर्ट न्याय व्यवस्था कानून< लागू कर देने से, क्षेत्र के लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिलने लग जाएगा। इस कानून को लागू करवा देने से, जब आमलोग अपना रोजगार करना शुरू करेंगे तो पुलिस और जजों के साठगांठ से उनको अधिक परेशानी नहीं होगी।
वर्तमान में पुलिस और जजों की सांठगांठ के वजह से छोटे-छोटे व्यापारियों को बहुत अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए छोटे-छोटे व्यापार/उद्योग शुरू होते हीं बंद हो जाते हैं।
B. >सरकारी जमीन किराया बंटवारा कानून< लागू करवा देने से - जिले के सभी खाली पड़े हुए सरकारी जमीनों पर— घर, दुकान और उद्योग लगाने के लिए प्लॉट बनवाकर लीज पर दिया जाएगा, इससे लगभग आधे रेट पर - घर दुकान और फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन मिल सकेगी, इस वजह से क्षेत्र के नागरिकों को क्षेत्र में ही व्यवसाय और रोजगार मिलने लगेगा इसके वजह से बहुत हद तक ट्रेनों में भीड़ कम हो जाएगी।।
---------------------------------
.
राहुल तिवारी: 88106-40928
2025 - बिहार- बगहा विधानसभा एवं दिल्ली- चांदनी चौक विधानसभा पूर्व कैंडिडेट। 2029 बिहार- बेतिया लोकसभा कैंडिडेट।
ऊपर दिए गए कानूनों के ड्राफ्ट को पढ़ने के लिए इस Website पर जाएं: rrpindia.in
.