> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-11-01

Pawan Jury BhilwaraRj

केंचुआ का Stand Alone झूठ
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"स्टेण्ड अलोन मशीन" क्या होता है ?
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(1) ऐसी मशीन जो किसी अन्य मशीन या डिवाइस से किसी भी तरीके से डेटा नहीं लेती, उसे स्टेण्ड अलोन मशीन कहते है। और यहाँ इस बात से कोई मतलब नहीं होता है कि मशीन डेटा इंटरनेट से ले रही है या किसी हार्ड ड्राइव या डिवाइस से।
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(2) उदाहरण के लिए, आपका लेपटॉप यदि इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होता तो यह एक स्टेण्ड अलोन मशीन है। लेकिन यदि आप उसमें एक पेन ड्राइव लगा देते है तो जैसे ही आप इसमें पेन ड्राइव इन्सर्ट करते है उसी समय आपका लेपटॉप स्टेण्ड अलोन नहीं रह जाता है। क्योंकि पेन ड्राइव एक ऐसा डिवाइस है जो लेपटॉप में डेटा डाल सकता है। और पेन ड्राइव में क्या डेटा है, और यह अपने साथ कहाँ से क्या डेटा लेकर आया है, हमें नहीं पता।
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(3) अब मान लीजिये कि 20 दिसंबर को किसी विधानसभा में चुनाव है, और 5 दिसम्बर को नाम वापसी की अंतिम तारीख है। तो 4 दिसम्बर को यह किसी को भी पता नहीं होता कि, इस विधानसभा में अंतिम प्रत्याशियों की संख्या क्या रहेगी, और उन्हें क्या चुनाव चिन्ह मिलेगा। और इसीलिए यह सूचना कलेक्टर के स्ट्रांग रूम में रखी 1000 स्टेण्ड अलोन EVM को भी पता नहीं होती।
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(4) प्रश्न: क्या EVM "स्टेण्ड अलोन मशीन" है ?
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(5) प्रति प्रश्न: फिर इन 1000 EVM को वोटिंग वाले दिन यह कैसे पता चलता है कि, किस नाम के कितने प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है, और उनके चुनाव चिन्ह क्या है ? इन सभी 1000 मशीनों में केंडिडेट इन्फोर्मेशन कैसे और कब डाली जाती है ?
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(6) ऊपर लिखा हुआ प्रति प्रश्न ही इस प्रश्न का सबसे बेहतर जवाब है। क्योंकि EVM के स्टेंड अलोन मशीन होने का दावा करने वाला व्यक्ति इस सवाल का जवाब यह कहे बिना नहीं कर सकता कि- किसी न किसी डिवाइस के माध्यम से केंडिडेट इन्फोर्मेशन का डेटा सभी मशीनों में ट्रान्सफर किया जाता है। अब वो डिवाइस क्या है, वह भी अप्रासंगिक सूचना है।
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(7) क्योंकि जैसे ही यह साबित होता है कि Evm में चुनाव के 10 दिन पहले किसी न किसी डिवाइस के माध्यम से डेटा भेजा जाता है, उसी समय यह साबित हो जाता है कि Evm को स्टेंड अलोन कहना एक सफ़ेद झूठ है, और संवैधानिक संस्था होने की आड़ में केंचुए को ऐसे 100 झूठ होने की छूट भी है। क्योंकि पेड मीडिया की खुराक भकोसने वाले लोग यह मानते है कि संवैधानिक संस्थाएं झूठ नहीं बोलती !!
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(8) तो Evm को यह डेटा कब और कैसे भेजा जाता है ?
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(9) अंतिम प्रत्याशियों की सूची प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग से प्रत्येक विधानसभा में एक इंजिनियर आता है और निर्वाचन अधिकारी से विधानसभा में चुनाव लड़ रहे प्रत्यशियों के नाम, उनकी संख्या एवं क्रमांक आदि डेटा लेकर अपने लेपटोप में फीड करता है।
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(10) यह लेपटोप क्या है किस सर्वर से इंटरेक्ट करता है, हमें नहीं पता। लेकिन बिना इंटरनेट के यह लेपटोप अपडेटेड सिम्बल इन्फोर्मेशन नहीं ले पायेगा। क्योंकि अपडेटेड सिम्बल इन्फोर्मेशन केंचुए की वेबसाइट से लेनी होती है।
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(11) इसके बाद अमुक इंजिनियर इस लेपटोप में डेटा फीड करता है और अमुक डेटा लेकर लेपटोप में मौजूद सॉफ्टवेयर एक एनक्रिप्टेड कमांड फाइल बनाता है। इंजिनियर इस कमांड फाइल को लेपटोप से एक डेटा केबल युक्त पेन ड्राइव में डालता है, और फिर यह पेन ड्राइव अमुक विधानसभा की सभी Evm में इन्सर्ट करके अमुक एनक्रिप्टेड कमांड फाइल अपलोड कर देता है।
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(12) यदि किसी विधानसभा में वोट चोरी करनी है तो अमुक एनक्रिप्टेड फाइल में वोट चोरी की कमांड जोड़ी जा सकती है। Evm में रियल टाइम क्लॉक होती है, अत: यह भी जोड़ा जा सकता है कि वोट चोरी का प्रोग्राम वोटिंग के दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ही वोट चुराएगा, मोक पोल में नहीं।
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